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Siddharthnagar News: डेढ़ करोड़ से चमकाया जमुआर घाट, अब बनने लगीं वेदियां
Sat, 04 Nov 2023 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 04 Nov 2023 01:11 AM IST
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फोटो-- नगर पालिका ने घाट पर निर्धारित नहीं किया है वेदी का स्थान
कोटा स्टोन पर शुरू हुआ वेदी बनाने का काम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर के जमुआर घाट पर कोटा स्टोन से चमकाई गईं सीढि़यों पर इन दिनों ईंटों को जोड़कर छठपूजा के लिए वेदियां बनाई जा रही हैं। राजस्थानी पत्थर से बने घाट पर वेदियों को बनाने से नहीं रोका गया तो घाट की खूबसूरती कम हो जाएगी। ऐसा इसलिए कि नगर पालिका परिषद ने घाट पर वेदियां बनाने के लिए स्थान निर्धारित नहीं किया है।
शहर के बीच और नेशनल हाईवे के नीचे बहने वाले प्राकृतिक नाले को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। यहां लोग पानी के करीब बैठक खुशनुमा अहसास करते हैं। अब इसी घाट पर वेदियां बनाई जा रही हैं। जमुआर घाट पर छठ पूजा की तैयारी में नगर पालिका परिषद पीछे है। इधर, पूजा करने वालों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। ये लोग पक्की वेदी बनाकर रंगाई-पुताई भी करेंगे।
सफाई कर्मचारियों ने शुक्रवार को घाट पर पड़ीं दुर्गा की प्रतिमाओं को हटाने का काम शुरू किया, जबकि घाट पर स्वच्छता का अभाव दिखा। यही कारण है कि वेदी बनाने वालों ने कोटा स्टोन की सीढि़यों को ही साफ पाया। जमुआर घाट पर शुक्रवार को बैठीं मीरा देवी ने कहा कि कुछ लोगों ने नई सीढ़ी पर वेदियां बना ली हैं। देखादेखी और लोग भी अब उन्हीं सीढि़यों पर वेदियां बनाएंगे।
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शहर के राजेश ने कहा कि दोनों पुलों के बीच में जगह तो है, लेकिन सफाई की कमी है। सीढि़यों के पास भी सफाई नहीं है। लोग जहां साफ जगह पाएंगे, वहीं पूजा करना चाहेंगे। एक युवक ने कहा कि मैं कुछ कहूंगा तो धर्म विरोधी हो जाऊंगा, लेकिन एक दिन के लिए बनी पूजा की वेदी 365 दिन वेदी घाट पर रहेगी।
छठ पूजा में जुटते हैं लोग
जमुआर घाट पर छठ पूजा के अवसर पर करीब के लोग जाते हैं। शहरी क्षेत्र व पुरानी नौगढ़ के अलावा आसपास के गांवों के लोग घाट पर उमड़ते हैं। पुरानी नौगढ़ क्षेत्र की ओर नई सीढि़यां बनी हैं। यहां बैठने के लिए बेंच भी रखे गए हैं। इन सीढि़यों पर वेदियां बनाई जा रही हैं। इसके दूसरी ओर भी पक्के स्थान पर पक्की वेदियां बनाई गई हैं, जबकि इधर बिना फर्श वाले स्थान पर भी वेदियां बनाई गई हैं।
दोनों पुलों के बीच में भी जगह
घाट पर कुछ लोग मिट्टी से जुड़ाई करके वेदी बनाते हैं। जब पूजा का अवसर आता है तो वेदी बना लेते हैं और पूजा करते हैं। वे जलस्रोत के किनारे पक्के निर्माण न करके प्रकृति संरक्षण में योगदान देते हैं। एक ही वेदी पर कई महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं। नेशनल हाईवे के ओवरब्रिज और डोम राजा के पुल के बीच में भी वेदी बनाने की जगह बन सकती है।
चिकनी मिट्टी और ईंट से बनानी चाहिए वेदियां
आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि छठ पूजा के लिए ईंट की वेदी बनाकर चिकनी मिट्टी से लेपन करना चाहिए। यह प्रकृति की उपासना का पर्व है। इसमें जलस्रोत में सूर्य देव की पूजा की जाती है। शास्त्र के अनुसार, पूजा करने के बाद वेदी को सेराया जाता है। इसलिए कच्ची वेदी बनाना ही उचित है।
वर्जन
जमुआर घाट में सफाई कराई जा रही है। नए घाट पर वेदी बनाने वालों को रोका जाएगा ताकि सीढि़यों की खूबसूरती कम न हो।
-विंध्याचल गुप्ता, ईओ नगर पालिका परिषद, सिद्धार्थनगर।
जमुआर घाट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया था। इसी सोच के साथ घाट पर कोटा स्टोन लगाए गए और पुल का भी जीर्णोद्धार किया गया। हालांकि, जिस प्रकार घाट को विकसित करने के लिए मैंने सोचा था, उसका विकास नहीं हो पाया है। वर्तमान समय के जिम्मेदार वहां कुछ बेहतर कार्य करें तो मुझे भी खुशी होगी।
-श्याम बिहारी जायसवाल, पूर्व चेयरमैन, नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर
घाट सुंदर रहे और पूजा भी हो
जमुआर घाट को जनता की सुविधा के लिए सुंदर बनाया गया है। नगर पालिका को चाहिए कि लोगों को पूजा करने के लिए बेहतर सुविधाएं दें और लोगों को चाहिए कि ऐसी पूजा करें कि हमारे शहर की सुंदरता भी कम न हो।
-चंद्र प्रकाश लाल श्रीवास्तव, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व प्रधानाचार्य
छठ पूजा पहले बिहार में ही ज्यादा होती थी, लेकिन अब यहां भी काफी संख्या में महिलाएं छठ पूजा करने लगी हैं। पक्की वेदी की बजाय कच्ची वेदी बनानी चाहिए। इससे पूजा भी हो जाएगी और घाट पर लगे राजस्थानी पत्थर भी खराब नहीं होंगे।
-हनुमान प्रसाद वैद्य, पूर्व पार्षद
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कोटा स्टोन पर शुरू हुआ वेदी बनाने का काम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर के जमुआर घाट पर कोटा स्टोन से चमकाई गईं सीढि़यों पर इन दिनों ईंटों को जोड़कर छठपूजा के लिए वेदियां बनाई जा रही हैं। राजस्थानी पत्थर से बने घाट पर वेदियों को बनाने से नहीं रोका गया तो घाट की खूबसूरती कम हो जाएगी। ऐसा इसलिए कि नगर पालिका परिषद ने घाट पर वेदियां बनाने के लिए स्थान निर्धारित नहीं किया है।
शहर के बीच और नेशनल हाईवे के नीचे बहने वाले प्राकृतिक नाले को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। यहां लोग पानी के करीब बैठक खुशनुमा अहसास करते हैं। अब इसी घाट पर वेदियां बनाई जा रही हैं। जमुआर घाट पर छठ पूजा की तैयारी में नगर पालिका परिषद पीछे है। इधर, पूजा करने वालों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। ये लोग पक्की वेदी बनाकर रंगाई-पुताई भी करेंगे।
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सफाई कर्मचारियों ने शुक्रवार को घाट पर पड़ीं दुर्गा की प्रतिमाओं को हटाने का काम शुरू किया, जबकि घाट पर स्वच्छता का अभाव दिखा। यही कारण है कि वेदी बनाने वालों ने कोटा स्टोन की सीढि़यों को ही साफ पाया। जमुआर घाट पर शुक्रवार को बैठीं मीरा देवी ने कहा कि कुछ लोगों ने नई सीढ़ी पर वेदियां बना ली हैं। देखादेखी और लोग भी अब उन्हीं सीढि़यों पर वेदियां बनाएंगे।
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शहर के राजेश ने कहा कि दोनों पुलों के बीच में जगह तो है, लेकिन सफाई की कमी है। सीढि़यों के पास भी सफाई नहीं है। लोग जहां साफ जगह पाएंगे, वहीं पूजा करना चाहेंगे। एक युवक ने कहा कि मैं कुछ कहूंगा तो धर्म विरोधी हो जाऊंगा, लेकिन एक दिन के लिए बनी पूजा की वेदी 365 दिन वेदी घाट पर रहेगी।
छठ पूजा में जुटते हैं लोग
जमुआर घाट पर छठ पूजा के अवसर पर करीब के लोग जाते हैं। शहरी क्षेत्र व पुरानी नौगढ़ के अलावा आसपास के गांवों के लोग घाट पर उमड़ते हैं। पुरानी नौगढ़ क्षेत्र की ओर नई सीढि़यां बनी हैं। यहां बैठने के लिए बेंच भी रखे गए हैं। इन सीढि़यों पर वेदियां बनाई जा रही हैं। इसके दूसरी ओर भी पक्के स्थान पर पक्की वेदियां बनाई गई हैं, जबकि इधर बिना फर्श वाले स्थान पर भी वेदियां बनाई गई हैं।
दोनों पुलों के बीच में भी जगह
घाट पर कुछ लोग मिट्टी से जुड़ाई करके वेदी बनाते हैं। जब पूजा का अवसर आता है तो वेदी बना लेते हैं और पूजा करते हैं। वे जलस्रोत के किनारे पक्के निर्माण न करके प्रकृति संरक्षण में योगदान देते हैं। एक ही वेदी पर कई महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं। नेशनल हाईवे के ओवरब्रिज और डोम राजा के पुल के बीच में भी वेदी बनाने की जगह बन सकती है।
चिकनी मिट्टी और ईंट से बनानी चाहिए वेदियां
आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि छठ पूजा के लिए ईंट की वेदी बनाकर चिकनी मिट्टी से लेपन करना चाहिए। यह प्रकृति की उपासना का पर्व है। इसमें जलस्रोत में सूर्य देव की पूजा की जाती है। शास्त्र के अनुसार, पूजा करने के बाद वेदी को सेराया जाता है। इसलिए कच्ची वेदी बनाना ही उचित है।
वर्जन
जमुआर घाट में सफाई कराई जा रही है। नए घाट पर वेदी बनाने वालों को रोका जाएगा ताकि सीढि़यों की खूबसूरती कम न हो।
-विंध्याचल गुप्ता, ईओ नगर पालिका परिषद, सिद्धार्थनगर।
जमुआर घाट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया था। इसी सोच के साथ घाट पर कोटा स्टोन लगाए गए और पुल का भी जीर्णोद्धार किया गया। हालांकि, जिस प्रकार घाट को विकसित करने के लिए मैंने सोचा था, उसका विकास नहीं हो पाया है। वर्तमान समय के जिम्मेदार वहां कुछ बेहतर कार्य करें तो मुझे भी खुशी होगी।
-श्याम बिहारी जायसवाल, पूर्व चेयरमैन, नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर
घाट सुंदर रहे और पूजा भी हो
जमुआर घाट को जनता की सुविधा के लिए सुंदर बनाया गया है। नगर पालिका को चाहिए कि लोगों को पूजा करने के लिए बेहतर सुविधाएं दें और लोगों को चाहिए कि ऐसी पूजा करें कि हमारे शहर की सुंदरता भी कम न हो।
-चंद्र प्रकाश लाल श्रीवास्तव, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व प्रधानाचार्य
छठ पूजा पहले बिहार में ही ज्यादा होती थी, लेकिन अब यहां भी काफी संख्या में महिलाएं छठ पूजा करने लगी हैं। पक्की वेदी की बजाय कच्ची वेदी बनानी चाहिए। इससे पूजा भी हो जाएगी और घाट पर लगे राजस्थानी पत्थर भी खराब नहीं होंगे।
-हनुमान प्रसाद वैद्य, पूर्व पार्षद