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Siddharthnagar News: उच्च स्तरीय कमेटी करेगी गुणवत्ता की जांच
Sat, 05 Sep 2026 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 05 Sep 2026 12:34 AM IST
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कांशीराम आवास की जर्जर भवन। संवाद
- फोटो : सांकेतिक
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सिद्धार्थनगर। शहर स्थित कांशीराम आवास के दो फ्लैट की छत ढहने के बाद अब भवन की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच होगी। स्थानीय जांच टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने शासन को पत्र भेजकर टेक्निकल टीम से भवन की गुणवत्ता की जांच कराने का अनुरोध किया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही भवन को रहने योग्य मानने, खाली कराने या ध्वस्तीकरण के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
स्थानीय जांच टीम ने कांशीराम आवास के बाहरी और आंतरिक हिस्सों का निरीक्षण किया है। कांशीराम आवास के अधिकांश फ्लैट जर्जर स्थिति में हैं। इनमें ब्लॉक संख्या 38 से 50 तक की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है। जलभराव के कारण इन 12 ब्लॉकों के 144 फ्लैट की नींव कमजोर होने के साथ प्लास्टर झड़ रहा है। कई जगह दीवार और छत में दरारें भी आ गई हैं। भवन निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार इस हिस्से की स्थिति ऐसी है कि अब इसकी मरम्मत कराना भी मुश्किल है।
जांच टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने कॉलोनी का बृहस्पतिवार को निरीक्षण किया। वहीं, भवनों की विस्तृत तकनीकी जांच के लिए शासन को पत्र भेजा है। अब आईआईटी रुड़की समेत किसी उच्चस्तरीय तकनीकी संस्थान की टीम से भवन की जांच कराए जाने की संभावना है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आवास को खाली कराने या ध्वस्त करने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
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करीब 100 करोड़ रुपये लागत वाले भवन के भविष्य का निर्णय उच्चस्तरीय तकनीकी जांच के बिना करना मुश्किल है। विशेषज्ञों के अनुसार भवन की वास्तविक क्षमता और मजबूती का पता लगाने के लिए निर्माण सामग्री का लैब टेस्ट जरूरी है। तकनीकी जांच में कंक्रीट और स्टील की मजबूती के साथ भवन की नींव, कॉलम, बीम और छत का मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भवन कितना सुरक्षित है और उसकी मरम्मत संभव है या नहीं। वैसे स्थानीय जांच टीम भले ही कुछ बोलने से कतरा रही है लेकिन उच्चस्तरीय टेक्निकल टीम से जांच कराने के निर्णय से साबित हो रहा है कि प्राथमिक जांच में भवन असुरक्षित पाया गया है।
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स्थानीय जांच टीम ने कांशीराम आवास के बाहरी और आंतरिक हिस्सों का निरीक्षण किया है। कांशीराम आवास के अधिकांश फ्लैट जर्जर स्थिति में हैं। इनमें ब्लॉक संख्या 38 से 50 तक की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है। जलभराव के कारण इन 12 ब्लॉकों के 144 फ्लैट की नींव कमजोर होने के साथ प्लास्टर झड़ रहा है। कई जगह दीवार और छत में दरारें भी आ गई हैं। भवन निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार इस हिस्से की स्थिति ऐसी है कि अब इसकी मरम्मत कराना भी मुश्किल है।
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जांच टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने कॉलोनी का बृहस्पतिवार को निरीक्षण किया। वहीं, भवनों की विस्तृत तकनीकी जांच के लिए शासन को पत्र भेजा है। अब आईआईटी रुड़की समेत किसी उच्चस्तरीय तकनीकी संस्थान की टीम से भवन की जांच कराए जाने की संभावना है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आवास को खाली कराने या ध्वस्त करने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
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करीब 100 करोड़ रुपये लागत वाले भवन के भविष्य का निर्णय उच्चस्तरीय तकनीकी जांच के बिना करना मुश्किल है। विशेषज्ञों के अनुसार भवन की वास्तविक क्षमता और मजबूती का पता लगाने के लिए निर्माण सामग्री का लैब टेस्ट जरूरी है। तकनीकी जांच में कंक्रीट और स्टील की मजबूती के साथ भवन की नींव, कॉलम, बीम और छत का मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भवन कितना सुरक्षित है और उसकी मरम्मत संभव है या नहीं। वैसे स्थानीय जांच टीम भले ही कुछ बोलने से कतरा रही है लेकिन उच्चस्तरीय टेक्निकल टीम से जांच कराने के निर्णय से साबित हो रहा है कि प्राथमिक जांच में भवन असुरक्षित पाया गया है।