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जिला अस्पताल में आसान हुआ नेत्र रोग का इलाज

Fri, 25 Feb 2022 12:02 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Feb 2022 12:02 AM IST
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Treatment of eye diseases became easy in district hospital
जिला अस्पताल में आसान हुआ नेत्र रोग का इलाज
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- चिकित्सकों की संख्या बढ़ने से मरीजों को राहत
- पहले दो ही चिकित्सक के भरोसे थी ओपीडी
सिद्धार्थनगर। नेत्र रोग से संबंधित मरीजों को अब जिला अस्पताल में नेत्र परीक्षण कराने और चिकित्सकों को दिखाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। साथ ही समय से ऑपरेशन भी हो सकेगा, क्योंकि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद चिकित्सकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वह नियमित बैठ भी रहे हैं। इससे मरीजों को राहत मिलेगी।
जिला अस्पताल पर जिले की तकरीबन 27 लाख की आबादी का जिम्मा है। एक हजार से अधिक मरीज नियमित ओपीडी में आते हैं, जबकि 24 घंटे में 50 से अधिक मरीज इमरजेंसी में आते हैं। आबादी बढ़ी, लेकिन सुविधाओं का अभाव था। मेडिकल कॉलेज बनने और जिला अस्पताल के संबद्ध होने के बाद लगातार सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है।
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चिकित्सक की तैनाती के साथ ही संसाधन भी बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे मरीजों को सहूलियत होगी। जिला अस्पताल के नेत्रालय कक्ष के बाहर हर दिन मरीजों की लंबी लाइन लगती थी। मरीजों को अपनी बारी का इंतजार करने के लिए घंटों खड़े रहना पड़ता था। कुछ लोग तो बिना इलाज के लौट जाते थे। कारण दो ही चिकित्सक थे, ऐसे में अगर कोई अवकाश पर चला गया तो समस्या और बढ़ जाती थी। मगर अब बेहतर सुविधाएं मिलने की संभावना है, क्योंकि अब तीन और नेत्र रोग विशेषज्ञ आ गए हैं। चिकित्सकों की संख्या अब पांच पहुंच गई है।
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इस संबंध में सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि चिकित्सकों की संख्या बढ़ी है। अब मरीजों को इलाज में और आसानी हो जाएगी।
ऑपरेशन के लिए नहीं करना होगा इंतजार
जिला अस्पताल के नेत्रालय बिंग में चिकित्सकों की संख्या बढ़ने से सबसे अधिक लाभ बुजुर्गों को होगा, क्योंकि मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए पहले दिन निर्धारित होता था कि इसी दिन ऑपरेशन हो पाएगा। ऐसे में ऑपरेशन वाले दिन ओपीडी प्रभावित होती थी, क्योंकि दो ही चिकित्सक थे। अब डॉक्टरों की टीम बन गई है। ऐसे में सप्ताह में कई दिन ऑपरेशन हो सकेगा।

100 से अधिक मरीज पहुंचते हैं प्रतिदिन
नेत्र रोग विभाग में औसतन 100 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसमें वृद्ध जनों की संख्या अधिक रहती है। वहीं, गर्मी के सीजन में आंख से संबंधित संक्रामक बीमारी शुरू होने के बाद मरीजों की संख्या 200 तक पहुंच जाती है।
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