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Siddharthnagar News: सड़कों से पानी हटते ही बहाल हुआ आवागमन
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शाहपुर सिंगारजोत मार्ग से हटने लगा बाढ़ का पानी। संवाद
शाहपुर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी के उफान से आई बाढ़ के कारण चार दिन से बाधित शाहपुर-सिंगारजोत मुख्य मार्ग पर रविवार से आवागमन बहाल हो गया। नदी का जलस्तर घटने के साथ सड़क से पानी उतरने लगा है। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही उतरौला, बलरामपुर और गोंडा आने-जाने वाले राहगीरों को राहत मिली है।
राप्ती नदी के उफान के कारण करीब 100 गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया था। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी थी। इसके चलते इस रास्ते से उतरौला, बलरामपुर और गोंडा जाने वाले लोगों को डुमरियागंज से बेवा होते हुए करीब 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी।
शनिवार से राप्ती के जलस्तर में गिरावट शुरू हुई। रविवार सुबह रमवापुर उर्फ नेबुआ और सिरसिया गांव के पास सड़क पर करीब दो से पांच इंच पानी रह गया था। कुछ स्थानों से पानी पूरी तरह हट गया था। जलभराव कम होते ही लोगों ने आवागमन शुरू कर दिया। मार्ग बहाल होने से ग्रामीणों के साथ वाहन चालकों और व्यापारियों को भी राहत मिली।
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बाहरी व्यापारियों की संख्या घटने से प्रभावित था मंडी कारोबार
नवीन मंडी के थोक आलू व्यापारी हमीद ने बताया कि बाढ़ के कारण शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग बंद होने से उतरौला और बलरामपुर से आने वाले व्यापारियों की संख्या काफी कम हो गई थी। इसका सीधा असर मंडी के कारोबार पर पड़ रहा था। मार्ग खुलने से कारोबार सामान्य होने की उम्मीद है।
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माल ढुलाई में लग रहा था अतिरिक्त समय और खर्च
वाहन चालक इंद्रजीत यादव ने बताया कि बाढ़ के दौरान शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर कई जगह एक से दो फीट तक पानी भर गया था। उतरौला, गोंडा और बलरामपुर जाने के लिए डुमरियागंज से दूसरे रास्ते से करीब 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। इससे समय और ईंधन दोनों अधिक खर्च हो रहे थे। अब मार्ग खुलने से यह परेशानी दूर हो गई है।
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चार दिन बाद शहर की ओर निकले ग्रामीण
तेनुई गांव निवासी मनोज पांडेय ने बताया कि बाढ़ के कारण गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया था। शनिवार से पानी घटने के बाद रविवार को वह इसी मार्ग से डुमरियागंज पहुंचे। उन्होंने बताया कि रमवापुर उर्फ नेबुआ और सिरसिया के बीच अभी हल्का जलभराव है, जो जल्द हटने की उम्मीद है।
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राप्ती नदी के उफान के कारण करीब 100 गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया था। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी थी। इसके चलते इस रास्ते से उतरौला, बलरामपुर और गोंडा जाने वाले लोगों को डुमरियागंज से बेवा होते हुए करीब 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी।
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शनिवार से राप्ती के जलस्तर में गिरावट शुरू हुई। रविवार सुबह रमवापुर उर्फ नेबुआ और सिरसिया गांव के पास सड़क पर करीब दो से पांच इंच पानी रह गया था। कुछ स्थानों से पानी पूरी तरह हट गया था। जलभराव कम होते ही लोगों ने आवागमन शुरू कर दिया। मार्ग बहाल होने से ग्रामीणों के साथ वाहन चालकों और व्यापारियों को भी राहत मिली।
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बाहरी व्यापारियों की संख्या घटने से प्रभावित था मंडी कारोबार
नवीन मंडी के थोक आलू व्यापारी हमीद ने बताया कि बाढ़ के कारण शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग बंद होने से उतरौला और बलरामपुर से आने वाले व्यापारियों की संख्या काफी कम हो गई थी। इसका सीधा असर मंडी के कारोबार पर पड़ रहा था। मार्ग खुलने से कारोबार सामान्य होने की उम्मीद है।
माल ढुलाई में लग रहा था अतिरिक्त समय और खर्च
वाहन चालक इंद्रजीत यादव ने बताया कि बाढ़ के दौरान शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर कई जगह एक से दो फीट तक पानी भर गया था। उतरौला, गोंडा और बलरामपुर जाने के लिए डुमरियागंज से दूसरे रास्ते से करीब 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। इससे समय और ईंधन दोनों अधिक खर्च हो रहे थे। अब मार्ग खुलने से यह परेशानी दूर हो गई है।
चार दिन बाद शहर की ओर निकले ग्रामीण
तेनुई गांव निवासी मनोज पांडेय ने बताया कि बाढ़ के कारण गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया था। शनिवार से पानी घटने के बाद रविवार को वह इसी मार्ग से डुमरियागंज पहुंचे। उन्होंने बताया कि रमवापुर उर्फ नेबुआ और सिरसिया के बीच अभी हल्का जलभराव है, जो जल्द हटने की उम्मीद है।