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Siddharthnagar News: किरण के तिनके, विदेश में चमके
Mon, 05 Oct 2026 12:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 05 Oct 2026 12:47 AM IST
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मंजू से उपयोगी सामान बनातीं महिलाएं,
देवरिया। बेहरा डाबर की किरण ने दादी से सीखे हुनर को अपनाया और मूंज के तिनकों से उत्पाद तैयार करने का कारोबार शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और उनके हुनर की चमक विदेश तक पहुंची। फ्रांस और लंदन तक उनके उत्पाद जाते हैं।
कभी सात बच्चों के परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था, लेकिन आर्थिक तंगी के दौर में बचपन में सीखा हुनर काम आया। आज किरण मूंज के उत्पाद तैयार कर सालाना पांच लाख रुपये से अधिक कमा रही हैं। उनके हुनर से 17 अन्य महिलाओं के परिवारों की आमदनी भी बढ़ रही है। बेहरा डाबर की किरण करीब 60 तरह के मूंज उत्पाद तैयार करती हैं।
इनमें रोटी बॉक्स, गिफ्ट बॉक्स, वॉल प्लेट, डाइनिंग टेबल मैट, फ्रूट बॉक्स, बुक कवर, टी-कोस्टर, कलश, टिफिन बॉक्स और पूजा आसनी शामिल हैं। साथ काम करने वाली महिलाओं को तैयार उत्पाद के हिसाब से भुगतान किया जाता है
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हुनर को बाजार तक पहुंचाने में डिजिटल प्रशिक्षण ने भी बड़ी भूमिका निभाई। जागृति से प्रशिक्षण लेने के बाद किरण ने मोबाइल से लेन-देन करना सीखा। फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिये उत्पादों की तस्वीरें साझा कर ऑर्डर लेने शुरू किए।
धीरे-धीरे गांव में तैयार मूंज के उत्पाद विदेशों तक पहुंचने लगे। फ्रांस में 100 बुक मार्क, टी-कोस्टर और गिफ्ट बॉक्स भेजे गए। लंदन में मिठाई के 91 डिब्बे, सात बड़ी डलिया, छह स्टोरेज बॉक्स, 12 वॉल प्लेट और मोनिया भेजी गई।
हुनर के साथ बदली बच्चों की राह : मूंज के काम से सिर्फ घर की आमदनी नहीं बढ़ी, बच्चों की पढ़ाई की राह भी आसान हुई। संवाद
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कभी सात बच्चों के परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था, लेकिन आर्थिक तंगी के दौर में बचपन में सीखा हुनर काम आया। आज किरण मूंज के उत्पाद तैयार कर सालाना पांच लाख रुपये से अधिक कमा रही हैं। उनके हुनर से 17 अन्य महिलाओं के परिवारों की आमदनी भी बढ़ रही है। बेहरा डाबर की किरण करीब 60 तरह के मूंज उत्पाद तैयार करती हैं।
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इनमें रोटी बॉक्स, गिफ्ट बॉक्स, वॉल प्लेट, डाइनिंग टेबल मैट, फ्रूट बॉक्स, बुक कवर, टी-कोस्टर, कलश, टिफिन बॉक्स और पूजा आसनी शामिल हैं। साथ काम करने वाली महिलाओं को तैयार उत्पाद के हिसाब से भुगतान किया जाता है
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हुनर को बाजार तक पहुंचाने में डिजिटल प्रशिक्षण ने भी बड़ी भूमिका निभाई। जागृति से प्रशिक्षण लेने के बाद किरण ने मोबाइल से लेन-देन करना सीखा। फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिये उत्पादों की तस्वीरें साझा कर ऑर्डर लेने शुरू किए।
धीरे-धीरे गांव में तैयार मूंज के उत्पाद विदेशों तक पहुंचने लगे। फ्रांस में 100 बुक मार्क, टी-कोस्टर और गिफ्ट बॉक्स भेजे गए। लंदन में मिठाई के 91 डिब्बे, सात बड़ी डलिया, छह स्टोरेज बॉक्स, 12 वॉल प्लेट और मोनिया भेजी गई।
हुनर के साथ बदली बच्चों की राह : मूंज के काम से सिर्फ घर की आमदनी नहीं बढ़ी, बच्चों की पढ़ाई की राह भी आसान हुई। संवाद