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Siddharthnagar News: कल नाग पंचमी पर होगी नाग देवता की पूजा
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ठाकुर प्रसाद मिश्र।
- हिंदू धर्म में नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा का महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। नाग पंचमी का त्योहार मंगलवार को मनाया जाएगा, जो हिंदू संप्रदाय का प्रमुख त्योहार है। माना जाता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
गालापुर वटवासिनी महाकाली मंदिर के व्यवस्थापक डॉ.ठाकुर प्रसाद मिश्र ने बताया कि तह पर्व नागों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा का प्रतीक है। कहते हैं कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। राजा जनमेजय द्वारा यज्ञ संसार से नागवंश को नष्ट करने के लिए किया गया था। जैसे ही यज्ञ आगे बढ़ा, आस्तिक ऋषि ने आकर यज्ञ रोक दिया। जिस दिन आस्तिक ऋषि ने यज्ञ में विघ्न डाला, उस दिन को हम नाग पंचमी के रूप में मनाते हैं।
नाग पंचमी से जुड़ी एक और कथा यह है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने कालिया नाग का वध किया था। आस्तिक मुनि ने राजा जनमेजय को समाझाया और ये यज्ञ रुकवाया। जिस दिन ये घटना घटी, उस दिन सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी थी। उस दिन आस्तिक मुनि के कारण नागों की रक्षा हो गई। इसके बाद से नाग पंचमी पर्व मनाने की शुरूआत हुई। नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने का भी महत्व है ऐसा बताया जाता है कि महादेव ने अपने बहन से कहा कि तुमने अनजाने में नाग देवता को मारा है, लेकिन इसका दंड तुम्हें जरूर मिलेगा। दरअसल बहन ने अनजाने में नाग को मारा था। इसलिए उस दिन प्रतीकात्मक सजा के तौर पर कपड़े से बनी गुड़िया को पीटा गया। तब से लेकर नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने की परंपरा चली आ रही है।
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नागपंचमी पर छुट्टी करने की मांग
उसका बाजार। सावन में पड़ने वाला नागपंचमी पर्व हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। गांव-गांव गुड्डन पीटने की रस्म, मेला, कुश्ती, दंगल आदि के आयोजन के साथ घरों में मीठे पकवान बनाने की परंपरा है। क्षेत्रीय नागरिक महंत लाल बहादुर दास सहित पंकज अग्रहरि, मनीष पांडेय, सचिन चौरसिया आदि ने कहा कि नागपंचमी के दिन सनातन धर्म में घर घर नागदेवता की पूजा होती है दूध और लावा चढ़ाया जाता है। लोक महत्व के इस पर्व पर स्कूल सहित अन्य सरकारी एवं अर्ध सरकारी विभाग में छुट्टी की जाए। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। नाग पंचमी का त्योहार मंगलवार को मनाया जाएगा, जो हिंदू संप्रदाय का प्रमुख त्योहार है। माना जाता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
गालापुर वटवासिनी महाकाली मंदिर के व्यवस्थापक डॉ.ठाकुर प्रसाद मिश्र ने बताया कि तह पर्व नागों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा का प्रतीक है। कहते हैं कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। राजा जनमेजय द्वारा यज्ञ संसार से नागवंश को नष्ट करने के लिए किया गया था। जैसे ही यज्ञ आगे बढ़ा, आस्तिक ऋषि ने आकर यज्ञ रोक दिया। जिस दिन आस्तिक ऋषि ने यज्ञ में विघ्न डाला, उस दिन को हम नाग पंचमी के रूप में मनाते हैं।
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नाग पंचमी से जुड़ी एक और कथा यह है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने कालिया नाग का वध किया था। आस्तिक मुनि ने राजा जनमेजय को समाझाया और ये यज्ञ रुकवाया। जिस दिन ये घटना घटी, उस दिन सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी थी। उस दिन आस्तिक मुनि के कारण नागों की रक्षा हो गई। इसके बाद से नाग पंचमी पर्व मनाने की शुरूआत हुई। नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने का भी महत्व है ऐसा बताया जाता है कि महादेव ने अपने बहन से कहा कि तुमने अनजाने में नाग देवता को मारा है, लेकिन इसका दंड तुम्हें जरूर मिलेगा। दरअसल बहन ने अनजाने में नाग को मारा था। इसलिए उस दिन प्रतीकात्मक सजा के तौर पर कपड़े से बनी गुड़िया को पीटा गया। तब से लेकर नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने की परंपरा चली आ रही है।
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नागपंचमी पर छुट्टी करने की मांग
उसका बाजार। सावन में पड़ने वाला नागपंचमी पर्व हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। गांव-गांव गुड्डन पीटने की रस्म, मेला, कुश्ती, दंगल आदि के आयोजन के साथ घरों में मीठे पकवान बनाने की परंपरा है। क्षेत्रीय नागरिक महंत लाल बहादुर दास सहित पंकज अग्रहरि, मनीष पांडेय, सचिन चौरसिया आदि ने कहा कि नागपंचमी के दिन सनातन धर्म में घर घर नागदेवता की पूजा होती है दूध और लावा चढ़ाया जाता है। लोक महत्व के इस पर्व पर स्कूल सहित अन्य सरकारी एवं अर्ध सरकारी विभाग में छुट्टी की जाए। संवाद