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Siddharthnagar News: नेपाल से आने वाली तबाही की नहीं होती दवाई..बाढ़ में बर्बाद होते हैं लोग
Sat, 13 Jul 2024 01:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 13 Jul 2024 01:52 AM IST
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डुमरियागज क्षेत्र के ग्राम बगाहवा गांव मे घुसा बाढ़ का पानी। संवाद
नेपाल के पानी से हर साल शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में होता है बड़ा नुकसान
बाढ़ में बर्बाद हो जाती है फसल, जमींदोज हो जाते हैं मकान
बाढ़ से कई दिनों से प्रभावित हैं क्षेत्र के कई गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसियापुर। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से कई गांव और टोले बाढ़ से घिरे हुए हैं। कभी नदियों का जलस्तर कम तो कभी ज्यादा हो रहा है। अधिकतर रास्ते बंद हो चुके हैं। तीन नदियों और कुछ पहाड़ी नालों का जलस्तर बढ़ने से लगभग दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी भर जाता है। रास्ते बाधित हो जाते हैं, लेकिन नेपाल से आने वाली तबाही की दवाई ढूंढा ही नहीं जाता है। नतीजा हजारों एकड़ फसल का नुकसान हो जाता है। घर तबाह हो जाते हैं। कारोबार के लिए लोग निकल नहीं पाते हैं। बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन पर समय से पहले बाढ़ से बचाव के लिए ठोस उपाय न करने का भी आरोप लगाया है।
शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के खैरी उर्फ झुंगहवां, तौलिहवा, खैरी शीतल प्रसाद, मटियार उर्फ भुतहवा, गडऱखा, तालकुंडा, बसहिया, पकडि़हवा, रेकहट, पथरदेइया समेत लगभग दो दर्जन से अधिक गांवों व टोलों में नेपाल से आने वाली बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, घोरही नदी और सोतवा व सुरही पहाड़ी नालों के जलस्तर के बढ़ने से लगभग हर साल बाढ़ आ जाता है। जिससे लगभग पांच हजार हेक्टेयर धान की फसल बाढ़ के पानी के कारण खराब हो जाती है। मौजूदा समय में जुलाई महीने में नेपाल के पहाड़ों व मैदानी भागों में रिकार्ड बारिश होने से इन नदियों व नालों का जलस्तर बढ़ गया। जुलाई का महीना धान की फसल के रोपाई का समय होता है।
शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्र लोगों से बात हुई तो उनका दर्द छलक कर बाहर का आ गया। क्षेत्र के कोदई साहनी, रामनरेश, मुबारक, दिनेश निषाद ने बताया कि अबकी बार जब बाढ़ आई तो लगभग आधे किसानों ने धान की रोपाई कर दिया था। बाढ़ के पानी के आने और पांच दिन तक खेतों में जमा रहने से पूरी रोपाई व बेहन खराब हो गई है। मो. सफात ने बताया कि प्रशासन बाढ़ आने पर सक्रिय होता है। बाढ़ प्रभावित गांवों में नाव लगा दी जाती है, लाई, चूरा बांटकर काम पूरा कर लिया जाता है, लेकिन बाढ़ से बचाव का कोई ठोस उपाय नहीं किया जाता।
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मो. रफीक, निसार चौधरी, झगड़ू, मनबहाल ने बताया कि तौलिहवा ग्राम पंचायत के बालानगर टोले में बूढ़ी राप्ती नदी 2017 से ही कटान कर रही है। गांव के किनारे ठोकर लगाने की मांग तभी से किया जा रहा है, लेकिन ठोकर नहीं लगा और लगभग एक दर्जन नदी में गिर गए। राम अवतार, राम हरीश, देवेंद्र, लाल खां आदि ने बताया कि 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं खैरी शीतल प्रसाद आए थे। ग्रामीणों ने उनसे बूढ़ी राप्ती नदी पर ठोकर की मांग की थी। उन्होंने आश्वासन भी दिया था, लेकिन ठोकर नहीं लगा।
अशोक पासवान ने बताया कि गत वर्ष पहली जुलाई को ही पन्नापुर व तमकुहवा के बीच बनी पुलिया बह गई थी। पूरे साल पुलिया बनवाने के लिए मांग की गई। लेकिन पुलिया नहीं बनी, बाढ़ फिर से आ गई। चार माह रोजगार के लिए परेशानी, आवागमन में दिक्कत, इलाज सहित कई परेशानी से जूझना पड़ेगा। नेपाल से आने वाले सैलाब से निजात की व्यवस्था न होने तक इस समस्या से जूझना पड़ेगा।
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बाढ़ में बर्बाद हो जाती है फसल, जमींदोज हो जाते हैं मकान
बाढ़ से कई दिनों से प्रभावित हैं क्षेत्र के कई गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसियापुर। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से कई गांव और टोले बाढ़ से घिरे हुए हैं। कभी नदियों का जलस्तर कम तो कभी ज्यादा हो रहा है। अधिकतर रास्ते बंद हो चुके हैं। तीन नदियों और कुछ पहाड़ी नालों का जलस्तर बढ़ने से लगभग दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी भर जाता है। रास्ते बाधित हो जाते हैं, लेकिन नेपाल से आने वाली तबाही की दवाई ढूंढा ही नहीं जाता है। नतीजा हजारों एकड़ फसल का नुकसान हो जाता है। घर तबाह हो जाते हैं। कारोबार के लिए लोग निकल नहीं पाते हैं। बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन पर समय से पहले बाढ़ से बचाव के लिए ठोस उपाय न करने का भी आरोप लगाया है।
शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के खैरी उर्फ झुंगहवां, तौलिहवा, खैरी शीतल प्रसाद, मटियार उर्फ भुतहवा, गडऱखा, तालकुंडा, बसहिया, पकडि़हवा, रेकहट, पथरदेइया समेत लगभग दो दर्जन से अधिक गांवों व टोलों में नेपाल से आने वाली बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, घोरही नदी और सोतवा व सुरही पहाड़ी नालों के जलस्तर के बढ़ने से लगभग हर साल बाढ़ आ जाता है। जिससे लगभग पांच हजार हेक्टेयर धान की फसल बाढ़ के पानी के कारण खराब हो जाती है। मौजूदा समय में जुलाई महीने में नेपाल के पहाड़ों व मैदानी भागों में रिकार्ड बारिश होने से इन नदियों व नालों का जलस्तर बढ़ गया। जुलाई का महीना धान की फसल के रोपाई का समय होता है।
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शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्र लोगों से बात हुई तो उनका दर्द छलक कर बाहर का आ गया। क्षेत्र के कोदई साहनी, रामनरेश, मुबारक, दिनेश निषाद ने बताया कि अबकी बार जब बाढ़ आई तो लगभग आधे किसानों ने धान की रोपाई कर दिया था। बाढ़ के पानी के आने और पांच दिन तक खेतों में जमा रहने से पूरी रोपाई व बेहन खराब हो गई है। मो. सफात ने बताया कि प्रशासन बाढ़ आने पर सक्रिय होता है। बाढ़ प्रभावित गांवों में नाव लगा दी जाती है, लाई, चूरा बांटकर काम पूरा कर लिया जाता है, लेकिन बाढ़ से बचाव का कोई ठोस उपाय नहीं किया जाता।
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मो. रफीक, निसार चौधरी, झगड़ू, मनबहाल ने बताया कि तौलिहवा ग्राम पंचायत के बालानगर टोले में बूढ़ी राप्ती नदी 2017 से ही कटान कर रही है। गांव के किनारे ठोकर लगाने की मांग तभी से किया जा रहा है, लेकिन ठोकर नहीं लगा और लगभग एक दर्जन नदी में गिर गए। राम अवतार, राम हरीश, देवेंद्र, लाल खां आदि ने बताया कि 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं खैरी शीतल प्रसाद आए थे। ग्रामीणों ने उनसे बूढ़ी राप्ती नदी पर ठोकर की मांग की थी। उन्होंने आश्वासन भी दिया था, लेकिन ठोकर नहीं लगा।
अशोक पासवान ने बताया कि गत वर्ष पहली जुलाई को ही पन्नापुर व तमकुहवा के बीच बनी पुलिया बह गई थी। पूरे साल पुलिया बनवाने के लिए मांग की गई। लेकिन पुलिया नहीं बनी, बाढ़ फिर से आ गई। चार माह रोजगार के लिए परेशानी, आवागमन में दिक्कत, इलाज सहित कई परेशानी से जूझना पड़ेगा। नेपाल से आने वाले सैलाब से निजात की व्यवस्था न होने तक इस समस्या से जूझना पड़ेगा।