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पंजाबी गानों में हैं डांस के ज्यादा चांस : सुखविंदर
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सुखविंदर सिंह।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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पंजाबी गानों में हैं डांस के ज्यादा चांस : सुखविंदर
सिद्धार्थनगर। फोक और लोक संगीत किसी भी क्षेत्र का हो, उसे प्रस्तुत करने का सही तरीका होना चाहिए। संगीत में मनोरंजन, भाव और सकारात्मक ऊर्जा होती है। पंजाबी गानों में डांस के ज्यादा चांस है, इस लिए युवाओं को ज्यादा पसंद आ रहा है। इसमें युवा उछल उछलकर डांस करते हैं। स्टेप अच्छे होते हैं। कपिलवस्तु महोत्सव में प्रस्तुति देने वाले बॉलीवुड के प्ले बैक सिंगर सुखविंदर सिंह ने मंगलवार को एक सवाल के जवाब में ये बातें कहीं।
प्ले बैक सिंगर सुखविंदर सिंह ने कहा कि संगीत में आपको अपने कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च करने की नौबत नहीं आती है। कोरोना काल में सभी उद्योग की तरह संगीत पर भी असर पड़ा, लेकिन संगीत के साथ लोगों का अकेलापन दूर हुआ। संगीत थैरेपी से लोग खुश हुए और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई। सेहत अच्छी करने में संगीत की बड़ी भूमिका रही। मेरी एक अच्छी आदत है कि एयरपोर्ट वाले शहर नहीं, बल्कि शहर से सुदूर क्षेत्रों में जाना पसंद करता हूं, क्योंकि लोगों का मनोरंजन करना मेरे जीवन का उद्देश्य है।
जिद नहीं, दीवानगी चाहिए
सुखविंदर सिंह ने कहा कि सफलता के लिए जिद से ज्यादा दीवानगी की जरूरत है। यदि हम दीवानगी से जीतते हैं तो यह पता भी नहीं चलता है कि हराया किसे हैं। रियलिटी शो में संगीत के क्षेत्र में उभरते युवाओं को अवसर मिल रहा है, इसमें संगीत को थोड़ा और बढ़ाया जा सकता है। किसान आंदोलन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत में राजनीति आई तो सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात होगी। किसान अन्नदाता नहीं, बल्कि ईश्वर का रूप है। सुखविंदर सिंह ने कहा कि फिल्मों पर आपत्तिजनक सामग्री की जांच के लिए सेंसर बोर्ड है। इसी प्रकार संगीत का स्तर गिरने से बचाने के लिए एक सेंसर बोर्ड बनाया जाना चाहिए। संगीत में अश्लीलता रोकने की आवश्यकता है। सोशल मीडिया में भी अश्लीलता से अखरता है। कला में नंगापन की बजाए मर्यादा होनी चाहिए, अच्छी संगीत से समाज को सही दिशा और मनोरंजन प्राप्त होता है।
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सिद्धार्थनगर। फोक और लोक संगीत किसी भी क्षेत्र का हो, उसे प्रस्तुत करने का सही तरीका होना चाहिए। संगीत में मनोरंजन, भाव और सकारात्मक ऊर्जा होती है। पंजाबी गानों में डांस के ज्यादा चांस है, इस लिए युवाओं को ज्यादा पसंद आ रहा है। इसमें युवा उछल उछलकर डांस करते हैं। स्टेप अच्छे होते हैं। कपिलवस्तु महोत्सव में प्रस्तुति देने वाले बॉलीवुड के प्ले बैक सिंगर सुखविंदर सिंह ने मंगलवार को एक सवाल के जवाब में ये बातें कहीं।
प्ले बैक सिंगर सुखविंदर सिंह ने कहा कि संगीत में आपको अपने कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च करने की नौबत नहीं आती है। कोरोना काल में सभी उद्योग की तरह संगीत पर भी असर पड़ा, लेकिन संगीत के साथ लोगों का अकेलापन दूर हुआ। संगीत थैरेपी से लोग खुश हुए और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई। सेहत अच्छी करने में संगीत की बड़ी भूमिका रही। मेरी एक अच्छी आदत है कि एयरपोर्ट वाले शहर नहीं, बल्कि शहर से सुदूर क्षेत्रों में जाना पसंद करता हूं, क्योंकि लोगों का मनोरंजन करना मेरे जीवन का उद्देश्य है।
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जिद नहीं, दीवानगी चाहिए
सुखविंदर सिंह ने कहा कि सफलता के लिए जिद से ज्यादा दीवानगी की जरूरत है। यदि हम दीवानगी से जीतते हैं तो यह पता भी नहीं चलता है कि हराया किसे हैं। रियलिटी शो में संगीत के क्षेत्र में उभरते युवाओं को अवसर मिल रहा है, इसमें संगीत को थोड़ा और बढ़ाया जा सकता है। किसान आंदोलन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत में राजनीति आई तो सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात होगी। किसान अन्नदाता नहीं, बल्कि ईश्वर का रूप है। सुखविंदर सिंह ने कहा कि फिल्मों पर आपत्तिजनक सामग्री की जांच के लिए सेंसर बोर्ड है। इसी प्रकार संगीत का स्तर गिरने से बचाने के लिए एक सेंसर बोर्ड बनाया जाना चाहिए। संगीत में अश्लीलता रोकने की आवश्यकता है। सोशल मीडिया में भी अश्लीलता से अखरता है। कला में नंगापन की बजाए मर्यादा होनी चाहिए, अच्छी संगीत से समाज को सही दिशा और मनोरंजन प्राप्त होता है।
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