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Siddharthnagar News: व्यवस्था बेदम...चंदे के इंतजाम पर चमक रही बिजली

Thu, 12 Feb 2026 01:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Feb 2026 01:20 AM IST
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The system is ineffective...electricity is shining on the arrangement of donations.
नरहरिया काली मंदिर के निकट पेड़ों के सहारे दौड़ाए गए बिजली के केबिल।
बस्ती। निगम के पास नए खंभे और तार लगवाने की कोई योजना नहीं है। इसके लिए आम उपभोक्ताओं पर ही बोझ थोपा जा रहा है। शहर के विस्तारित क्षेत्र में बिना तार-खंभे के ही कनेक्शन बांट दिए जा रहे हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को नए खंभे-तार आदि की व्यवस्था के लिए उन्हीं से खर्च वहन करने को कहा जाता है।
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निगम का कहना हैं कि नई आबादी वाले क्षेत्र के विद्युतीकरण के लिए डिपाॅजिट योजना से ही कार्य कराए जा सकते हैं। निगम के पास तत्काल में अपनी कोई योजना नहीं होती है। इस वजह से विस्तारित क्षेत्र के उपभोक्ता मजबूर होकर समूह बनाते हैं और चंदा एकत्र कर संविदा कर्मचारियों के माध्यम से जिम्मेदारों तक पहुंचाते हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें डिपाजिट योजना के तहत तैयार एस्टीमेट का विवरण नहीं दिखाया जाता है।
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सिर्फ एक रफ कागज पर जोड़कर हिसाब अनाधिकृत रूप से हिसाब बता दिया जाता है। इसमें गोलमाल की आशंका बनी रहती है। रौतापार के पश्चिमी क्षेत्र के रहने वाले राम सागर बताते हैं कि दो साल पहले विद्युतीकरण के नाम पर मोहल्लेवासियों से 30 हजार रुपये वसूल किए गए थे।
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इसमें केवल चार पीसीसी पोल लगाए गए। सालभर बाद विभागीय योजना से केबिल और कनेक्शन बाॅक्स लगवाए गए। मोहल्ले में 20 घर की नई कॉलोनी है। बिजली कनेक्शन के लिए सभी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त रुपये देने पड़े हैं। इसके बाद पोल-तार के लिए अलग से चंदा एकत्र कर देना पड़ा है। तब जिम्मेदारों ने विद्युतीकरण की पहल की है।
इसी तरह पुरानी बस्ती क्षेत्र के नरहरिया नई कॉलोनी, जामडीह नई कॉलोनी, लबनापार नई कॉलोनी महदेव ताल नई कॉलोनी आदि जगहों पर भी विभागीय जिम्मेदार डिपाजिट योजना से खंभे-तार लगाने की बात कहकर लंबा खेल किए हैं।
बस्ती खास की रहने वाली प्रियंका बताती है कि उनके मोहल्ले में काफी दिनों से पोल-तार नहीं लगे हैं। ट्रांसफार्मर भी नहीं लगाया गया है। डेढ़ सौ मीटर दूर से केबिल खींचकर कनेक्शन मिला है। एक किलोवॉट कनेक्शन लेने में पांच हजार से अधिक रुपये खर्च हो गए।
अधिक रुपया लेकर तत्काल काम हो जाए तब भी ठीक हैं। विभागीय जिम्मेदार पहले दौड़ाते हैं। इसके बाद प्राइवेट कर्मचारियों को आगे करके कहते हैं इन्हीं से सब समझ लीजिए। उनसे पूछने पर रुपयों की मांग होती है, तब कनेक्शन मिल पाता है।
अब चार खंभा और उस पर तार दौड़ाने के लिए 40 हजार रुपये की मांग की जा रही है। मोहल्ले के लोग इतना रुपये देने के लिए तैयार नहीं है। गांधीनगर क्षेत्र के तुरकहिया मोहल्ले के फारूख ने बताया कि उनके यहां नई कॉलोनी में चार खंभे लगाने के लिए 35 हजार रुपये चंदा एकत्र करके दिया गया है। उपभोक्ताओं को एस्टीमेट की कोई कॉपी नहीं दी गई है। डिपाजिट योजना में जिम्मेदारी पूरी मनमानी कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं पर थोपा जा रहा अतिरिक्त खर्च : मड़वानगर के उपभोक्ता दिनेश कुमार ने कहा कि जब निगम कॉलोनियों में तार और खंभे सुव्यवस्थित नहीं कर पा रहे हैं। बांस-बल्लियों के सहारे कनेक्शन दिया जा रहा है तो बिजली का बिल वसूलना नहीं चाहिए।

हमारे मोहल्ले से हर महीने लाखों रुपये का राजस्व निगम को जा रहा है लेकिन, निगम खंभे-तार की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। अधिकारियों से मिलने पर वह सिर्फ डिपाजिट योजना बताकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। वहीं दीनानाथ का कहना है कि निगम का मुख्य काम बिजली बेचना है। ऐसे में खंभे, तार, ट्रांसफार्मर की व्यवस्था करना उनकी जिम्मेदारी है। मगर यह खर्च भी उपभोक्ताओं पर थोपा जा रहा है। बिजली का बिल तो हम लोग दे रहे हैं खंभे, तार का भी रुपया हम लोगों से वसूल किया जा रहा है।
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