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Siddharthnagar News: रिश्ते का सहारा दे रहा जीने का हाैसला
Sat, 03 Oct 2026 01:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 03 Oct 2026 01:14 AM IST
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तुलसियापुर। सूरी, उम्र 90 वर्ष। आंखों की रोशनी नहीं है। पति भी दुनिया छोड़ चुके हैं और अपनी कोई संतान भी नहीं। जिंदगी के इस पड़ाव पर खून का रिश्ता उनकी जिंदगी के लिए अब ताकत बना हुआ है। विधवा बहन के साथ बाढ़ के पानी के बीच सूरी हिम्मत से जिंदगी गुजार रही हैं। बालानगर टोले में रहने वाली 90 वर्षीय नेत्रहीन विधवा महिला सूरी करीब 15 वर्ष पहले पथरदेईया गांव से अपना घर छोड़कर बालानगर रहने आई थीं।
25 साल पहले पति की मृत्यु के बाद उनका कोई सहारा नहीं था। ऐसे में वह अपनी विधवा और संतान विहीन बहन श्यामकली (82) के पास आ गईं। तभी से दोनों बहनें एक-दूसरे का सहारा बनी हुई हैं।
इन दिनों बालानगर टोला बाढ़ की चपेट में है। आवागमन की परेशानी के बीच ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे समय में 90 वर्ष की यह बुजुर्ग महिला भी बाढ़ प्रभावित इलाके में अपनी बहन के साथ रह रही हैं। आंखों से दिखाई न देने के बावजूद उन्हें बाढ़ का खौफ नहीं है। उम्र के इस पड़ाव पर न तो उनके पास संतान का सहारा है और न ही जीवन की राह आसान है।
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इसके बावजूद वह परिस्थितियों के सामने टूटने के बजाय अपनी बहन के साथ डटी हुई हैं। दोनों बहनों का एक-दूसरे के प्रति स्नेह और भरोसा ही उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।
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25 साल पहले पति की मृत्यु के बाद उनका कोई सहारा नहीं था। ऐसे में वह अपनी विधवा और संतान विहीन बहन श्यामकली (82) के पास आ गईं। तभी से दोनों बहनें एक-दूसरे का सहारा बनी हुई हैं।
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इन दिनों बालानगर टोला बाढ़ की चपेट में है। आवागमन की परेशानी के बीच ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे समय में 90 वर्ष की यह बुजुर्ग महिला भी बाढ़ प्रभावित इलाके में अपनी बहन के साथ रह रही हैं। आंखों से दिखाई न देने के बावजूद उन्हें बाढ़ का खौफ नहीं है। उम्र के इस पड़ाव पर न तो उनके पास संतान का सहारा है और न ही जीवन की राह आसान है।
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इसके बावजूद वह परिस्थितियों के सामने टूटने के बजाय अपनी बहन के साथ डटी हुई हैं। दोनों बहनों का एक-दूसरे के प्रति स्नेह और भरोसा ही उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।