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Siddharthnagar News: श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई
Mon, 09 Feb 2026 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 09 Feb 2026 12:18 AM IST
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औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भलुवाही में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का की कथा सुनाई गई। कथावाचक विनोद शास्त्री ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव सागर से पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उद्धव-गोपी संवाद, उद्धव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान व्यास ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा से परमात्मा का मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलन की प्रक्रिया ही महारास है। रास का अर्थ है परमानंद की प्राप्ति। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को रास के माध्यम से सदैव के लिए परमानंद की अनुभूति करवाई। इसके आगे भी कथावाचक ने कथा का रसपान करवाया।
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