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Siddharthnagar News: कलयुग में मोक्ष का मार्ग दिखाती है श्रीराम कथा
Tue, 31 Mar 2026 01:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 31 Mar 2026 01:14 AM IST
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चिल्हिया। क्षेत्र के ग्राम पंचायत अलीदापुर स्थित गौरा बाजार में आयोजित सात दिवसीय राम कथा के तीसरे दिन रविवार की संध्या को कथा व्यास आचार्य संतोष शुक्ल ने श्रद्धालुओं को कथा श्रवण कराते हुए भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि कलियुग में श्रीराम कथा मनुष्य को मोक्ष का मार्ग दिखाती है और राम नाम के सुमिरन से सभी पापों का नाश होता है।
कथा के दौरान आचार्य ने शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव ब्रह्म और माता पार्वती शक्ति के प्रतीक हैं। विवाह के उपरांत माता मैना द्वारा पार्वती को स्त्री धर्म की दी गई शिक्षा का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचक ने भगवान कार्तिकेय के जन्म और उनके द्वारा तारकासुर वध का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान शिव एक-दूसरे के आराध्य रहे हैं और उनके स्वरूप को केवल भक्ति और प्रेम के माध्यम से ही समझा जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि श्रीराम कथा मनुष्य के दुखों का नाश करती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। कलियुग में राम नाम की महिमा सबसे अधिक प्रभावशाली है। त्रेता युग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि राम नाम लिखे पत्थर समुद्र में तैर गए जबकि स्वयं भगवान श्रीराम द्वारा फेंका गया पत्थर डूब गया, यह राम नाम की महिमा को दर्शाता है।
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कथा के दौरान आचार्य ने शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव ब्रह्म और माता पार्वती शक्ति के प्रतीक हैं। विवाह के उपरांत माता मैना द्वारा पार्वती को स्त्री धर्म की दी गई शिक्षा का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचक ने भगवान कार्तिकेय के जन्म और उनके द्वारा तारकासुर वध का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान शिव एक-दूसरे के आराध्य रहे हैं और उनके स्वरूप को केवल भक्ति और प्रेम के माध्यम से ही समझा जा सकता है।
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उन्होंने आगे कहा कि श्रीराम कथा मनुष्य के दुखों का नाश करती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। कलियुग में राम नाम की महिमा सबसे अधिक प्रभावशाली है। त्रेता युग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि राम नाम लिखे पत्थर समुद्र में तैर गए जबकि स्वयं भगवान श्रीराम द्वारा फेंका गया पत्थर डूब गया, यह राम नाम की महिमा को दर्शाता है।
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