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Siddharthnagar News: बॉर्डर पार होते ही दोगुनी हो जाती है मछली की कीमत
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तालाब में मछली पकड़ते मछुआरे।
जिले से नेपाल में होती है मछली की तस्करी, निर्यात शुरू हो जाए तो मछली पालकों की होगी दोगुनी आय
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बाॅर्डर पार होते ही मछली की कीमत दोगुनी हो जाती है। यहीं कारण है कि बाॅर्डर पर सक्रिय तस्कर एवं उनसे जुड़े कॅरियर जिले की मछली को नेपाल में पहुंचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं। हालांकि, एसएसबी, पुलिस और नेपाल पुलिस भी इन तस्करों को दबोचने में लगी रहती है, लेकिन उन्हें जिले की 68 किमी खुली सीमा का लाभ मिलता है। मछली पालकों का कहना है कि नेपाल में मछली के मूल्य और मांग को देखते हुए निर्यात शुरू किया जाए तो मछली पालकों की आय लगभग दोगनी हो जाएगी, जबकि फिलहाल यहां कि मछली से तस्कर मालामाल हो रहे हैं।
कालानमक चावल के साथ मछली पालन भी सिद्धार्थनगर की पहचान बन रहा है। वार्षिक वृद्धि के अनुसार जिले में कामर्शियल तालाबों में 54 प्रतिशत वृद्धि हुई है। जिले में एक साल में 56953 एमटी का उत्पादन होता है, यहां की मछली गोरखपुर, वाराणसी, बस्ती, बलरामपुर, महराजगंज सहित अन्य मंडियों में जाती है। 654.96 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर हो गया है। मछली पालन से 23 से 30 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है, जबकि जिले में रोजगार के संसाधनों का अभाव है और पांच लाख से अधिक लोग प्रवासी मजदूर हैं। मछली को नेपाल चेकपोस्ट के जरिए नेपाल में निर्यात करने के लिए नियम आड़े आ रहे हैं। फिलहाल निर्यात के लिए जांच लैब की आवश्यकता है। ये संसाधन उपलब्ध हो जाए तो भारतीय मछली पालकों को लाभ के साथ नेपाल के लोगाें को आसानी से पर्याप्त मछली उपलब्ध होगी।
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बॉर्डर पर पकड़े जा चुके हैं मछली तस्कर
बढ़नी बाॅर्डर के पास से नेपाल ले जाते समय नेपाली पुलिस ने एक क्विंटल 37 किलो मछली के साथ में चार लोगों को साइकिल सहित गिरफ्तार किया था। गैर परंपरागत रास्तों से लाई गई मछली को नेपाल पुलिस ने कृष्णा नगर में शिव नगर से साइकिल से मछली ले जाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसकी कुल वजन एक क्विंटल 37 किलो थी। पकड़े गए मछलियों को लिखा पड़ी के बाद जमीन में दफन कर दिया गया था। नेपाल पुलिस के इंस्पेक्टर के विशाल कार्की ने बताया नेपाल में भारतीय किसी भी प्रकार की पशु, पक्षी, मुर्गी, चूजा, मछली इत्यादि का आना वर्जित है, बिना किसी जांच के भारत से नेपाल में मछली भेजने पर सुरक्षा कारणों से रोक है। सिद्धार्थनगर की कपिलवस्तु कोतवाली पुलिस ने तीन माह पहले ही एक पिकअप में मांगुर मछली और एक डीसीएम झींगा पकड़ा था। इस मामले में कानूनी कार्रवाई की गई, जबकि कोतवाली क्षेत्र के झूलनीपुर बसंतपुर से नरकुल बाजार से एसएसबी ने मछली पकड़कर कस्टम को सौंपा था।
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इतना अंतर है मछली की कीमत में
प्रजाति सिद्धार्थनगर (रुपये में), नेपाल (भारतीय/ नेपाली मुद्रा )
पंगासियस, 90 160/270
रोहू 140 300/500
रूपचंदा 120 -130 180/300
कामन कार्प 140 280/450
एसी मंडी के बाद बन सकता है विकल्प
बढ़नी के अकरहरा में मछली पालन का निरीक्षण करने आए मत्स्य पालन विभाग के निदेशक प्रशांत शर्मा ने ढेबरुआ में 50 करोड़ रुपये की एसी मंडी बनाने का प्रस्ताव मांगा है। एसी मंडी के साथ मछली के प्रासेसिंस यूनिट बनने की संभावना है, जिसमें लैब होगी। लैब बनने के बाद मछली की जांच होगी, जो निर्यात के लिए आवश्यक है। कस्टम इंस्पेक्टर रामधारी पटेल ने बताया कि एनीमल क्वांरंटीन सर्टिफिकेट दिखाने पर मछली का निर्यात हो सकता है। इंडो नेपाल बॉर्डर पर ऐसी जांच की सुविधा नहीं है। यह जांच कोलकाता में होती है।
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दो करोड़ रुपये बजट की जरूरत
एनीमल क्वारंटीन सर्टिफिकेट के लिए दो करोड़ रुपये खर्च होंगे, लेकिन इससे नेपाल में मछली निर्यात का रास्ता साफ हो जाएगा। निर्यात शुरू करने के लिए प्रशासन ने पहल शुरू की है। एक सर्वे के अनुसार नेपाल में करीब दो करोड़ आबादी है और एक नेपाली साल भर में 35 किग्रा मछली खाते हैं, जबकि यूपी में प्रति व्यक्ति 4.5 किलो ही खपत है।
वकार अनवर फैज, मछली पालक
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नेपाल की पहाड़ी क्षेत्रों में गहरे तालाब नहीं बनाए जा सकते हैं, इस कारण नेपाल में मछली के निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके लिए नेपाल सरकार से भी करनी होगी ताकि निर्यात बढ़े तो अतिरिक्त टैक्स न थोपा जाए। नेपाल में मछली की मांग के कारण ही गैर परंपरागत रास्तों से तस्करी की खबरें आती हैं। निर्यात शुरू हो तो यहां के लोगों की तकदीर बदल जाएगी।
यासीर महबूब, मछली पालक
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वर्जन
फोटो--
जिले में मछली पालन के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो रहा है। नेपाल सहित अन्य देशों में मछली निर्यात की संभावनाओं पर भी कार्य शुरू हुआ है। बढ़नी में 50 करोड़ रुपये से एसी मछली मंडी बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। निर्यात के संबंध में मत्स्य पालन विभाग के निदेशक से निरंतर बात की जा रही है।
जयेंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बाॅर्डर पार होते ही मछली की कीमत दोगुनी हो जाती है। यहीं कारण है कि बाॅर्डर पर सक्रिय तस्कर एवं उनसे जुड़े कॅरियर जिले की मछली को नेपाल में पहुंचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं। हालांकि, एसएसबी, पुलिस और नेपाल पुलिस भी इन तस्करों को दबोचने में लगी रहती है, लेकिन उन्हें जिले की 68 किमी खुली सीमा का लाभ मिलता है। मछली पालकों का कहना है कि नेपाल में मछली के मूल्य और मांग को देखते हुए निर्यात शुरू किया जाए तो मछली पालकों की आय लगभग दोगनी हो जाएगी, जबकि फिलहाल यहां कि मछली से तस्कर मालामाल हो रहे हैं।
कालानमक चावल के साथ मछली पालन भी सिद्धार्थनगर की पहचान बन रहा है। वार्षिक वृद्धि के अनुसार जिले में कामर्शियल तालाबों में 54 प्रतिशत वृद्धि हुई है। जिले में एक साल में 56953 एमटी का उत्पादन होता है, यहां की मछली गोरखपुर, वाराणसी, बस्ती, बलरामपुर, महराजगंज सहित अन्य मंडियों में जाती है। 654.96 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर हो गया है। मछली पालन से 23 से 30 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है, जबकि जिले में रोजगार के संसाधनों का अभाव है और पांच लाख से अधिक लोग प्रवासी मजदूर हैं। मछली को नेपाल चेकपोस्ट के जरिए नेपाल में निर्यात करने के लिए नियम आड़े आ रहे हैं। फिलहाल निर्यात के लिए जांच लैब की आवश्यकता है। ये संसाधन उपलब्ध हो जाए तो भारतीय मछली पालकों को लाभ के साथ नेपाल के लोगाें को आसानी से पर्याप्त मछली उपलब्ध होगी।
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बॉर्डर पर पकड़े जा चुके हैं मछली तस्कर
बढ़नी बाॅर्डर के पास से नेपाल ले जाते समय नेपाली पुलिस ने एक क्विंटल 37 किलो मछली के साथ में चार लोगों को साइकिल सहित गिरफ्तार किया था। गैर परंपरागत रास्तों से लाई गई मछली को नेपाल पुलिस ने कृष्णा नगर में शिव नगर से साइकिल से मछली ले जाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसकी कुल वजन एक क्विंटल 37 किलो थी। पकड़े गए मछलियों को लिखा पड़ी के बाद जमीन में दफन कर दिया गया था। नेपाल पुलिस के इंस्पेक्टर के विशाल कार्की ने बताया नेपाल में भारतीय किसी भी प्रकार की पशु, पक्षी, मुर्गी, चूजा, मछली इत्यादि का आना वर्जित है, बिना किसी जांच के भारत से नेपाल में मछली भेजने पर सुरक्षा कारणों से रोक है। सिद्धार्थनगर की कपिलवस्तु कोतवाली पुलिस ने तीन माह पहले ही एक पिकअप में मांगुर मछली और एक डीसीएम झींगा पकड़ा था। इस मामले में कानूनी कार्रवाई की गई, जबकि कोतवाली क्षेत्र के झूलनीपुर बसंतपुर से नरकुल बाजार से एसएसबी ने मछली पकड़कर कस्टम को सौंपा था।
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इतना अंतर है मछली की कीमत में
प्रजाति सिद्धार्थनगर (रुपये में), नेपाल (भारतीय/ नेपाली मुद्रा )
पंगासियस, 90 160/270
रोहू 140 300/500
रूपचंदा 120 -130 180/300
कामन कार्प 140 280/450
एसी मंडी के बाद बन सकता है विकल्प
बढ़नी के अकरहरा में मछली पालन का निरीक्षण करने आए मत्स्य पालन विभाग के निदेशक प्रशांत शर्मा ने ढेबरुआ में 50 करोड़ रुपये की एसी मंडी बनाने का प्रस्ताव मांगा है। एसी मंडी के साथ मछली के प्रासेसिंस यूनिट बनने की संभावना है, जिसमें लैब होगी। लैब बनने के बाद मछली की जांच होगी, जो निर्यात के लिए आवश्यक है। कस्टम इंस्पेक्टर रामधारी पटेल ने बताया कि एनीमल क्वांरंटीन सर्टिफिकेट दिखाने पर मछली का निर्यात हो सकता है। इंडो नेपाल बॉर्डर पर ऐसी जांच की सुविधा नहीं है। यह जांच कोलकाता में होती है।
दो करोड़ रुपये बजट की जरूरत
एनीमल क्वारंटीन सर्टिफिकेट के लिए दो करोड़ रुपये खर्च होंगे, लेकिन इससे नेपाल में मछली निर्यात का रास्ता साफ हो जाएगा। निर्यात शुरू करने के लिए प्रशासन ने पहल शुरू की है। एक सर्वे के अनुसार नेपाल में करीब दो करोड़ आबादी है और एक नेपाली साल भर में 35 किग्रा मछली खाते हैं, जबकि यूपी में प्रति व्यक्ति 4.5 किलो ही खपत है।
वकार अनवर फैज, मछली पालक
नेपाल की पहाड़ी क्षेत्रों में गहरे तालाब नहीं बनाए जा सकते हैं, इस कारण नेपाल में मछली के निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके लिए नेपाल सरकार से भी करनी होगी ताकि निर्यात बढ़े तो अतिरिक्त टैक्स न थोपा जाए। नेपाल में मछली की मांग के कारण ही गैर परंपरागत रास्तों से तस्करी की खबरें आती हैं। निर्यात शुरू हो तो यहां के लोगों की तकदीर बदल जाएगी।
यासीर महबूब, मछली पालक
वर्जन
फोटो
जिले में मछली पालन के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो रहा है। नेपाल सहित अन्य देशों में मछली निर्यात की संभावनाओं पर भी कार्य शुरू हुआ है। बढ़नी में 50 करोड़ रुपये से एसी मछली मंडी बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। निर्यात के संबंध में मत्स्य पालन विभाग के निदेशक से निरंतर बात की जा रही है।
जयेंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी