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Siddharthnagar News: बौद्ध परिपथ विकास का रास्ता खुला...सीमापार के गहरा होगा संबंध
Sun, 31 May 2026 02:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 31 May 2026 02:47 AM IST
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कपिलवस्तु/सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से सटे कपिलवस्तु क्षेत्र के लिए बौद्ध पर्यटन विकास की बड़ी पहल की गई है। ग्रेटर लुंबिनी एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत चार नगरपालिकाओं और शहरी विकास और भवन निर्माण विभाग के बीच हुए समझौते से कपिलवस्तु समेत तीन जिलों में बौद्ध परिपथ के विकास का रास्ता खुल गया है। इसका असर सीमा से जुड़े भारतीय क्षेत्रों, विशेषकर सिद्धार्थनगर जिले के पर्यटन और व्यापार पर भी पड़ने की उम्मीद है।
कपिलवस्तु भगवान बुद्ध के बाल्यकाल और शाक्य गणराज्य की राजधानी के रूप में विश्व स्तर पर पहचान रखता है। इसके बावजूद यहां पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के विकास की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। नई परियोजना के तहत लुंबिनी को केंद्र में रखकर कपिलवस्तु, रूपन्देही और नवलपरासी के प्रमुख बौद्ध स्थलों को आधुनिक पर्यटन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। शुक्रवार को हुए समझौते पर कपिलवस्तु नगरपालिका के मेयर सुदीप पौडेल, लुंबिनी सांस्कृतिक नगरपालिका की उपमेयर कल्पना हरिजन, रामग्राम के मेयर धनपत यादव, देवदह के मेयर ध्रुव प्रसाद खरेल और विभाग के महानिदेशक रवींद्र बोहरा ने हस्ताक्षर किए।
परियोजना को अंतरराष्ट्रीय विकास संघ के सहयोग से लागू किया जाएगा। इसके तहत सड़क, पर्यटक सुविधाएं, विरासत संरक्षण, शहरी आधारभूत ढांचा, पर्यावरणीय प्रबंधन और पर्यटन सेवाओं के विस्तार पर काम होगा। स्थानीय निकायों को तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग भी दिया जाएगा।
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कपिलवस्तु नगरपालिका के मेयर सुदीप पौडेल ने कहा कि यह परियोजना बुद्ध सर्किट क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर है। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
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सिद्धार्थनगर को भी मिल सकता है लाभ
- कपिलवस्तु और लुंबिनी आने वाले अधिकांश विदेशी पर्यटक सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी, खुनुवां और सोनौली सीमा मार्गों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में नेपाल में बौद्ध पर्यटन ढांचे के मजबूत होने का सीधा लाभ भारतीय सीमा क्षेत्र के होटल, परिवहन, व्यापार और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को भी मिलने की उम्मीद है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत की ओर से भी कपिलवस्तु, पिपरहवा और गणवरिया जैसे बौद्ध स्थलों को इससे जोड़ा जाए तो पूरा सीमा क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
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कपिलवस्तु भगवान बुद्ध के बाल्यकाल और शाक्य गणराज्य की राजधानी के रूप में विश्व स्तर पर पहचान रखता है। इसके बावजूद यहां पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के विकास की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। नई परियोजना के तहत लुंबिनी को केंद्र में रखकर कपिलवस्तु, रूपन्देही और नवलपरासी के प्रमुख बौद्ध स्थलों को आधुनिक पर्यटन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। शुक्रवार को हुए समझौते पर कपिलवस्तु नगरपालिका के मेयर सुदीप पौडेल, लुंबिनी सांस्कृतिक नगरपालिका की उपमेयर कल्पना हरिजन, रामग्राम के मेयर धनपत यादव, देवदह के मेयर ध्रुव प्रसाद खरेल और विभाग के महानिदेशक रवींद्र बोहरा ने हस्ताक्षर किए।
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परियोजना को अंतरराष्ट्रीय विकास संघ के सहयोग से लागू किया जाएगा। इसके तहत सड़क, पर्यटक सुविधाएं, विरासत संरक्षण, शहरी आधारभूत ढांचा, पर्यावरणीय प्रबंधन और पर्यटन सेवाओं के विस्तार पर काम होगा। स्थानीय निकायों को तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग भी दिया जाएगा।
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कपिलवस्तु नगरपालिका के मेयर सुदीप पौडेल ने कहा कि यह परियोजना बुद्ध सर्किट क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर है। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
सिद्धार्थनगर को भी मिल सकता है लाभ
- कपिलवस्तु और लुंबिनी आने वाले अधिकांश विदेशी पर्यटक सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी, खुनुवां और सोनौली सीमा मार्गों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में नेपाल में बौद्ध पर्यटन ढांचे के मजबूत होने का सीधा लाभ भारतीय सीमा क्षेत्र के होटल, परिवहन, व्यापार और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को भी मिलने की उम्मीद है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत की ओर से भी कपिलवस्तु, पिपरहवा और गणवरिया जैसे बौद्ध स्थलों को इससे जोड़ा जाए तो पूरा सीमा क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।