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Siddharthnagar News: रचनात्मक प्रवृत्ति का विकास करना ही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित को संबोधित करती कुलपति प्र
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बुधवार को कुलपति-छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने छात्र-छात्राओं को सकारात्मक, आत्मनिर्भर, जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक बनने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में रचनात्मक प्रवृत्ति का विकास करना ही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से विद्यार्थी और शिक्षण संस्थान दोनों के उन्नति का मार्गदर्शन होगा। पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ विविध प्रकार के शिक्षणेत्तर गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का प्रमुख आधार स्तंभ साबित हो रहा है। विद्यार्थियों में ज्ञान के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ कौशल युक्त क्षमता उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग निर्धारित करती है। वर्तमान समय में पर्यावरण विज्ञान की महत्ता निरंतर बढ़ती जा रही है इस दृष्टि से विश्वविद्यालय आगामी सत्र से पर्यावरण विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर की कक्षाओं का संचालन करने जा रहा है।
इसी के साथ-साथ कुलपति ने बताया कि बीएएलएलबी पाठ्यक्रम संचालन की प्रक्रिया विश्वविद्यालय ने प्रारंभ की है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ज्ञान के विविध आयामों का लाभ सिद्धार्थनगर और आसपास के लोगों को मिलना चाहिए। इसलिए यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों के बारे में अपने समाज में चर्चा करनी चाहिए।
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वास्तव में विद्यार्थी ही विश्वविद्यालय का एंबेसडर बनकर विश्वविद्यालय के विकास और आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अधिक से अधिक विश्वविद्यालय के ज्ञान और कौशल की क्षमता का लाभ लें।
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बुधवार को कुलपति-छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने छात्र-छात्राओं को सकारात्मक, आत्मनिर्भर, जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक बनने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में रचनात्मक प्रवृत्ति का विकास करना ही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से विद्यार्थी और शिक्षण संस्थान दोनों के उन्नति का मार्गदर्शन होगा। पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ विविध प्रकार के शिक्षणेत्तर गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का प्रमुख आधार स्तंभ साबित हो रहा है। विद्यार्थियों में ज्ञान के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ कौशल युक्त क्षमता उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग निर्धारित करती है। वर्तमान समय में पर्यावरण विज्ञान की महत्ता निरंतर बढ़ती जा रही है इस दृष्टि से विश्वविद्यालय आगामी सत्र से पर्यावरण विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर की कक्षाओं का संचालन करने जा रहा है।
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इसी के साथ-साथ कुलपति ने बताया कि बीएएलएलबी पाठ्यक्रम संचालन की प्रक्रिया विश्वविद्यालय ने प्रारंभ की है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ज्ञान के विविध आयामों का लाभ सिद्धार्थनगर और आसपास के लोगों को मिलना चाहिए। इसलिए यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों के बारे में अपने समाज में चर्चा करनी चाहिए।
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वास्तव में विद्यार्थी ही विश्वविद्यालय का एंबेसडर बनकर विश्वविद्यालय के विकास और आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अधिक से अधिक विश्वविद्यालय के ज्ञान और कौशल की क्षमता का लाभ लें।