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Siddharthnagar News: विसरा का झंझट खत्म, पोस्टमार्टम होने पर ही मिलेगी सहायता
Sat, 13 Jul 2024 01:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 13 Jul 2024 01:46 AM IST
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सर्पदंश के मामले में पोस्टमार्टम अनिवार्य
बाढ़ और बारिश के बीच बढ़ते हैं सांप के काटने के मामले
अगर किसी को सांप डसता है तो पोस्टमार्टम और पंचनामा जरूरी, फिर मिलेंगे सहायता राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अब सर्पदंश के मामले में पोस्टमार्टम कराने भर से सहायता राशि पीड़ित परिवार को मिल जाएगी। विसरा जांच संबंधित रिपोर्ट आने के बाद सहायता राशि जैसी कोई दिक्कत नहीं होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही आवेदन करने के साथ दिन के भीतर चार लाख रुपये की सहायता राशि पीडि़त को मिल सकेगी। बर्सेत पीड़ित परिवार को घटना होने के बाद आर्थिक सहायता के लिए लाश को पोस्टमार्टम करवाना होगा।
बारिश और बाढ़ के मौसम में सर्पदंश के मामले में बढ़ जाते हैं। गांव में आज भी लोग झाड़फूंक पर भरोसा करते हैं। इस वजह से न जाने कितने लोगों की मौत हो जाती है। जबकि कुछ लोग सर्पदंश के शिकार होने के बाद अस्पताल पर पहुंचते हैं। कई बार इलाज के दौरान उनकी जान चली जाती है। अस्पताल पर मरने वालों को तो रिकार्ड में आ जाता है, लेकिन गांव में झाड़फूंक के दौरान मरने वाले न जाने कितने लोग कागजी में दर्ज नहीं होते हैं। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में इस राज्य आपदा का दर्जा देते हुए मृतक के परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की योजना शुरू की। इसमें पंचायत नामा और पोस्टमार्टम होने पर ही सहायता राशि देने का प्रावधान किया गया। लेकिन जानकारी न होने के कारण गांव में मरने वालों के बारे में जानकारी ही नहीं देते हैं। जबकि कई बार अस्पताल में मरने वालों का पोस्टमार्टम नहीं करवाते हैं।
ऐसे में सहायता राशि से वंचित हो जाते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि न होने विसरा जांच के लिए भेजा जाता है। जिससे कारण स्पष्ट हो सके। लेकिन इसमें विसरा जांच की झंझट को खत्म कर दिया गया है। इससे पंचायतनामा और पोस्टमार्टम कराने के बाद ही राशि मिल जाएगी। इस संबंध में सीडीओ जयेंद्र कुमार ने बताया कि सर्पदंश की घटना में सरकार की ओर से आश्रित परिवार को सहायता देने का नियम है। बर्सेत लाश का पंचायतनामा और पोस्टमार्टम होना जरूरी है।
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मौत के बाद यह जरूरी
सर्पदंश के मामले में पुलिस को बुलाकर पंचायतनामा कराया जाए। मृतक का पोस्टमार्टम करवाया जाए। पोस्टमार्टम होने के बाद मृतक की विसरा प्रिजर्व करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सारी प्रक्रिया पूरी होने सात दिन के भीतर आश्रित परिवार को सहायता राशि मिलेगा। ऐसा शासन की ओर से नियम है।
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हर साल कई लोगों की जाती है जान
जनपद बाढ़ प्रभावित है। बारिश के समय में जनपद का ६० प्रतिशत हिस्सा बाढ़ से डूब जाता है। इस स्थिति में सांप सहित अन्य जहरीले जंतू गांव में चले आते हैं। पैर पडऩे या अन्य कारण से लोगों को काट लेते हैं। जो अस्पताल तक पहुंचते हैं। उनके बारे में जानकारी होती है। जबकि, न जाने कितने लोगों का पता नहीं चलता है। पर सर्पदंश के मामले की जानकारी प्रशासन को दी जाए तो आर्थिक सहायता मिल सकती है।
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बाढ़ और बारिश के बीच बढ़ते हैं सांप के काटने के मामले
अगर किसी को सांप डसता है तो पोस्टमार्टम और पंचनामा जरूरी, फिर मिलेंगे सहायता राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अब सर्पदंश के मामले में पोस्टमार्टम कराने भर से सहायता राशि पीड़ित परिवार को मिल जाएगी। विसरा जांच संबंधित रिपोर्ट आने के बाद सहायता राशि जैसी कोई दिक्कत नहीं होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही आवेदन करने के साथ दिन के भीतर चार लाख रुपये की सहायता राशि पीडि़त को मिल सकेगी। बर्सेत पीड़ित परिवार को घटना होने के बाद आर्थिक सहायता के लिए लाश को पोस्टमार्टम करवाना होगा।
बारिश और बाढ़ के मौसम में सर्पदंश के मामले में बढ़ जाते हैं। गांव में आज भी लोग झाड़फूंक पर भरोसा करते हैं। इस वजह से न जाने कितने लोगों की मौत हो जाती है। जबकि कुछ लोग सर्पदंश के शिकार होने के बाद अस्पताल पर पहुंचते हैं। कई बार इलाज के दौरान उनकी जान चली जाती है। अस्पताल पर मरने वालों को तो रिकार्ड में आ जाता है, लेकिन गांव में झाड़फूंक के दौरान मरने वाले न जाने कितने लोग कागजी में दर्ज नहीं होते हैं। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में इस राज्य आपदा का दर्जा देते हुए मृतक के परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की योजना शुरू की। इसमें पंचायत नामा और पोस्टमार्टम होने पर ही सहायता राशि देने का प्रावधान किया गया। लेकिन जानकारी न होने के कारण गांव में मरने वालों के बारे में जानकारी ही नहीं देते हैं। जबकि कई बार अस्पताल में मरने वालों का पोस्टमार्टम नहीं करवाते हैं।
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ऐसे में सहायता राशि से वंचित हो जाते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि न होने विसरा जांच के लिए भेजा जाता है। जिससे कारण स्पष्ट हो सके। लेकिन इसमें विसरा जांच की झंझट को खत्म कर दिया गया है। इससे पंचायतनामा और पोस्टमार्टम कराने के बाद ही राशि मिल जाएगी। इस संबंध में सीडीओ जयेंद्र कुमार ने बताया कि सर्पदंश की घटना में सरकार की ओर से आश्रित परिवार को सहायता देने का नियम है। बर्सेत लाश का पंचायतनामा और पोस्टमार्टम होना जरूरी है।
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मौत के बाद यह जरूरी
सर्पदंश के मामले में पुलिस को बुलाकर पंचायतनामा कराया जाए। मृतक का पोस्टमार्टम करवाया जाए। पोस्टमार्टम होने के बाद मृतक की विसरा प्रिजर्व करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सारी प्रक्रिया पूरी होने सात दिन के भीतर आश्रित परिवार को सहायता राशि मिलेगा। ऐसा शासन की ओर से नियम है।
हर साल कई लोगों की जाती है जान
जनपद बाढ़ प्रभावित है। बारिश के समय में जनपद का ६० प्रतिशत हिस्सा बाढ़ से डूब जाता है। इस स्थिति में सांप सहित अन्य जहरीले जंतू गांव में चले आते हैं। पैर पडऩे या अन्य कारण से लोगों को काट लेते हैं। जो अस्पताल तक पहुंचते हैं। उनके बारे में जानकारी होती है। जबकि, न जाने कितने लोगों का पता नहीं चलता है। पर सर्पदंश के मामले की जानकारी प्रशासन को दी जाए तो आर्थिक सहायता मिल सकती है।