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Siddharthnagar News: हजरत अली की शहादत का जिक्र सुनकर रो पड़े अकीदतमंद
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-डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर स्थित जामा मस्जिद सहित कई स्थानों पर आयोजित हुई मरसिया मजलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। शिया मुसलमानों के पहले इमाम हजरत अली अलैहिस्सलाम के शहादत दिवस पर बृहस्पतिवार की देर शाम क्षेत्र के मस्जिदों में मरसिया मजलिस हुई। इसमें कस्बा हल्लौर स्थित शिया जामा मस्जिद, मस्जिदे काजमी तथा मरहूम अली मुख्तार, मुजाहिद, हसन जमाल के आवास पर मजलिस सुई। इसमें मौलाना और जाकिर ने हजरत अली की शहादत का वाक्या बयान किया। जिसे सुनकर अकीदतमंद हाय अली की सदा बुलंद कर रो पड़े।
क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित जामा मस्जिद में जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने कहा कि हजरत अली उस वक्त इस्लाम की मदद के लिए आगे आए। जब इस्लाम का कोई भी हमदर्द नहीं था। उन्होंने इस्लाम धर्म को आम लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने हमेशा दुनिया को शांति और अमन का पैगाम दिया था। उन्होंने कहा था कि इस्लाम इंसानियत का धर्म है और वह अहिंसा के पक्ष में है। जाकिर जमाल ने कहा कि हजरत अली पर रमजान महीने की 19 वी तारीख की सुबह में कूफे की मस्जिद में नमाज पढ़ाने के दौरान अब्दुर्रहमान नामक अधर्मी, आतंकवादी ने जहर बुझी तलवार से हमला कर हजरत अली को बुरी तरह से जख्मी कर दिया था। इसके बाद उनकी 21 रमजान की सुबह में शहादत हो गई थी। उसी के याद में हर वर्ष दुनिया भर में हजरत अली को मानने वाले रमजान में तीन दिवसीय नौहां-मातम और मर्सिया मजलिस के जरिये गम का इजहार करते (शोक मनाते) है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। शिया मुसलमानों के पहले इमाम हजरत अली अलैहिस्सलाम के शहादत दिवस पर बृहस्पतिवार की देर शाम क्षेत्र के मस्जिदों में मरसिया मजलिस हुई। इसमें कस्बा हल्लौर स्थित शिया जामा मस्जिद, मस्जिदे काजमी तथा मरहूम अली मुख्तार, मुजाहिद, हसन जमाल के आवास पर मजलिस सुई। इसमें मौलाना और जाकिर ने हजरत अली की शहादत का वाक्या बयान किया। जिसे सुनकर अकीदतमंद हाय अली की सदा बुलंद कर रो पड़े।
क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित जामा मस्जिद में जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने कहा कि हजरत अली उस वक्त इस्लाम की मदद के लिए आगे आए। जब इस्लाम का कोई भी हमदर्द नहीं था। उन्होंने इस्लाम धर्म को आम लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने हमेशा दुनिया को शांति और अमन का पैगाम दिया था। उन्होंने कहा था कि इस्लाम इंसानियत का धर्म है और वह अहिंसा के पक्ष में है। जाकिर जमाल ने कहा कि हजरत अली पर रमजान महीने की 19 वी तारीख की सुबह में कूफे की मस्जिद में नमाज पढ़ाने के दौरान अब्दुर्रहमान नामक अधर्मी, आतंकवादी ने जहर बुझी तलवार से हमला कर हजरत अली को बुरी तरह से जख्मी कर दिया था। इसके बाद उनकी 21 रमजान की सुबह में शहादत हो गई थी। उसी के याद में हर वर्ष दुनिया भर में हजरत अली को मानने वाले रमजान में तीन दिवसीय नौहां-मातम और मर्सिया मजलिस के जरिये गम का इजहार करते (शोक मनाते) है।
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