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Siddharthnagar News: बेटी कर रही नादानी... कातिल बन रहा परिवार
Tue, 12 Mar 2024 11:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 12 Mar 2024 11:23 AM IST
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सिद्धार्थनगर। बेटी घर की इज्जत होती है। उसकी इज्जत बचाने केे लिए पिता और परिवार कुछ भी कर देता है। मौजूदा समय में कुछ ऐसी ही घटनाएं घटित हो रही हैं। बेटियों के कदम बहक रहे हैं। इसमें इज्जत के लिए या तो बेटियों को रास्ते से हटा दे रहे हैं या फिर उससे प्रेम करने वाले को। बेटियों के बहकने के कारण पिता और परिवार के लोग कातिल बन जा रहे हैं। एक माह के भीतर जिले में ऐसी दो घटनाएं सामने आई हैं। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र में एक पिता ने बेटी और खेसरहा क्षेत्र में बेटी के प्रेमी को बुलाकर डंडे से पीटकर हत्या कर दी और कातिल बन गया। इस प्रकार की घटनाओं से समाज चिंता जाहिर कर रहा है। वहीं, समाजशास्त्री बदलते हुए परिवेश का नतीजा बता रहे हैं। जबकि विधि विशेषज्ञ ऐसा कदम उठाने के बजाए कानून का सहारा लेने की बात कर रहे हैं।
इज्जत के लिए बेटी को रास्ते से हटाया, बन गया कातिल
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र एक गांव निवासी 11वीं की छात्रा को उसके पिता ने इसलिए लगा घोंटकर मार दिया कि वह गांव के ही एक लड़के से प्रेम करती थी और उससे मिलती थी, जो पिता को बुरा लगता था। मना किया तो नहीं मानी। इसके बाद गला घोंटकर मार डाला और गांव के ही रहने वाले प्रेमी को कातिल बता दिया। पुलिस की जांच में पकड़ा गया और बेटी की हत्या के जुर्म में सलाखों के पीछे चल गया है। घटना नौ फरवरी को हुई थी।
बेटी के प्रेमी को डंड़े से पीटकर मार डाला
खेसरहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक शादीशुदा युवक पड़ोस के ही दूसरे जनपद एक गांव की लड़की से प्रेम करने लगा। दोनों परिवारों की बीच अच्छी जान पहचान थी। लड़की के पिता ने बेटी को कई बार मना किया। जब दोनों ने नहीं माने तो प्रेमी को घर से बुलवाकर पीटकर मार डाला। पिता के साथ ही दो और रिश्तेदार कत्ल के जुर्म में फंस गए हैं। आरोपी पिता को गिरफ्तार करके पुलिस उसे सलाखों के पीछे भेज चुकी है। जबकि दो पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। बेटियों के बहकने से कातिल बन गए।
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परिवार पर नियंत्रण कम होने की नतीजा है
आज परिवार एक परिवार नहीं रह गया है। छोटे और बड़े का कद्र लोग भूल चुके हैं। किसी का किसी पर नियंत्रण नहीं है। कोई किसी का मानने वाला नहीं है। इसके पीछे परिवार के सदस्यों पर ध्यान नहीं देना। बच्चों को संस्कार नहीं देना आदि वजह है। दूसरी सबसे बड़ी वजह मोबाइल और इंटरनेट है। जो कम उम्र के बच्चों को बहका रहा है। ऐसे में परिवार के मुखिया को चाहिए कि वह बच्चों पर ध्यान दे। उन्हें संस्कार दे, कौन छोटा और कौन बड़ा है। इसके बारे में बताएं और इज्जत करने की सीख दें। इससे बच्चे बहकेंगे नहीं।
डॉ. रघुवर प्रसाद पांडेय, समाजशास्त्री महिला पीजी कॉलेज बस्ती
बोले विधि के जानकार
अगर कोई अपराध करता है तो उसे सजा दिलाने के लिए कानून का सहारा लें। न की खुद अपराध के रास्ते पर चले पड़ें। गुस्सा में लिया जाने वाले फैसला अक्सर गलत होता है। इसलिए कानून का सम्मान करें, उसका सहारा लें। न्याय निश्चित ही मिलेगी।
संजय कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ट अधिवक्ता क्राइम, जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर
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इज्जत के लिए बेटी को रास्ते से हटाया, बन गया कातिल
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र एक गांव निवासी 11वीं की छात्रा को उसके पिता ने इसलिए लगा घोंटकर मार दिया कि वह गांव के ही एक लड़के से प्रेम करती थी और उससे मिलती थी, जो पिता को बुरा लगता था। मना किया तो नहीं मानी। इसके बाद गला घोंटकर मार डाला और गांव के ही रहने वाले प्रेमी को कातिल बता दिया। पुलिस की जांच में पकड़ा गया और बेटी की हत्या के जुर्म में सलाखों के पीछे चल गया है। घटना नौ फरवरी को हुई थी।
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बेटी के प्रेमी को डंड़े से पीटकर मार डाला
खेसरहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक शादीशुदा युवक पड़ोस के ही दूसरे जनपद एक गांव की लड़की से प्रेम करने लगा। दोनों परिवारों की बीच अच्छी जान पहचान थी। लड़की के पिता ने बेटी को कई बार मना किया। जब दोनों ने नहीं माने तो प्रेमी को घर से बुलवाकर पीटकर मार डाला। पिता के साथ ही दो और रिश्तेदार कत्ल के जुर्म में फंस गए हैं। आरोपी पिता को गिरफ्तार करके पुलिस उसे सलाखों के पीछे भेज चुकी है। जबकि दो पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। बेटियों के बहकने से कातिल बन गए।
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परिवार पर नियंत्रण कम होने की नतीजा है
आज परिवार एक परिवार नहीं रह गया है। छोटे और बड़े का कद्र लोग भूल चुके हैं। किसी का किसी पर नियंत्रण नहीं है। कोई किसी का मानने वाला नहीं है। इसके पीछे परिवार के सदस्यों पर ध्यान नहीं देना। बच्चों को संस्कार नहीं देना आदि वजह है। दूसरी सबसे बड़ी वजह मोबाइल और इंटरनेट है। जो कम उम्र के बच्चों को बहका रहा है। ऐसे में परिवार के मुखिया को चाहिए कि वह बच्चों पर ध्यान दे। उन्हें संस्कार दे, कौन छोटा और कौन बड़ा है। इसके बारे में बताएं और इज्जत करने की सीख दें। इससे बच्चे बहकेंगे नहीं।
डॉ. रघुवर प्रसाद पांडेय, समाजशास्त्री महिला पीजी कॉलेज बस्ती
बोले विधि के जानकार
अगर कोई अपराध करता है तो उसे सजा दिलाने के लिए कानून का सहारा लें। न की खुद अपराध के रास्ते पर चले पड़ें। गुस्सा में लिया जाने वाले फैसला अक्सर गलत होता है। इसलिए कानून का सम्मान करें, उसका सहारा लें। न्याय निश्चित ही मिलेगी।
संजय कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ट अधिवक्ता क्राइम, जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर