{"_id":"62950be218d3a15842570713","slug":"the-certifying-organization-failed-the-seeds-of-black-paddy-siddharthnagar-news-gkp438704742","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रमाणित करने वाली संस्था ने कालानमक धान के बीज को किया फेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रमाणित करने वाली संस्था ने कालानमक धान के बीज को किया फेल
विज्ञापन
प्रमाणित करने वाली संस्था ने कालानमक धान के बीज को किया फेल
सिद्धार्थनगर। इस बार सरकारी गोदामों पर भेजने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में 65 क्विंटल कालानमक धान का बीज तैयार किया था। बीज को प्रमाणित करने वाली संस्था ने उसके रंग को आधार मानते हुए उसे खारिज कर दिया। अब एक बार फिर कृषि विभाग जांच के लिए फिर धान का नमूना भेजेगा। इस संबंध में पत्र लिखेगा।
प्रदेश सरकार ने जिले को रोजगार से पहचान देने और आय बढ़ाने के लिए एक जिला एक उत्पाद के तहत उस जनपद के रोजगार के मुख्य व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए पहल की थी। जिले को कालानमक धान को एक जनपद एक उत्पाद में चयनित किया गया है। अभी तक जिले में कालानमक धान का बीज कृषि विभाग के गोदामों पर नहीं मिलता था। किसानों को बीज मिले और कालानमक धान की खेती का रकबा बढ़े, इस उद्देश्य से पहली बार सरकारी समितियों पर बीज उपलब्ध कराने की कवायद शुरू हुई थी। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के फार्म हाउस में धान का बीज कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में तैयार किया गया।
56 क्विंटल बीज इस बार सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को बेचने की योजना थी। उस पर भी पानी फिरता दिख रहा है। कारण धान के बीज को प्रमाणित करने के लिए राज्य अनुसंधान केंद्र लखनऊ भेजा गया था। वहां पर बीज के रंग को देखते हुए उस पर संदेह जताया गया और उसे यह कहकर खारिज कर दिया कि वह अमानक है। ऐसे में इस वर्ष भी किसानों को कालानमक का बीज मिलने की उम्मीद नहीं है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि पहली बार में अमानक घोषित किया गया है, दोबारा उसे जांच के लिए भेजा जाएगा। इस संबंध में पत्राचार किया जा रहा है।
विज्ञापन
रंग व आकार बदलता है, खुशबू एक समान रहती है
कालानमक धान काला होता है, यही उसकी मुख्य पहचान है। ऐसे खाने वाले मानते हैं। धान हल्का भूरा होने के कारण मानक विहीन घोषित कर दिया गया। हालांकि कालानमक धान की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि यह धान जगह-जगह के पानी पर निर्भर करता है। अगर ऊंची भूमि पर धान को लगाएंगे तो एकदम काला रंग होगा। वही धान जहां पर हमेशा पानी रहता है, वहां पर लगाएंगे तो हल्का भूरा और थोड़ा मोटा हो जाता है। खूशबू एक समान होती है। उसमें कोई अंतर नहीं होता है।
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। इस बार सरकारी गोदामों पर भेजने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में 65 क्विंटल कालानमक धान का बीज तैयार किया था। बीज को प्रमाणित करने वाली संस्था ने उसके रंग को आधार मानते हुए उसे खारिज कर दिया। अब एक बार फिर कृषि विभाग जांच के लिए फिर धान का नमूना भेजेगा। इस संबंध में पत्र लिखेगा।
प्रदेश सरकार ने जिले को रोजगार से पहचान देने और आय बढ़ाने के लिए एक जिला एक उत्पाद के तहत उस जनपद के रोजगार के मुख्य व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए पहल की थी। जिले को कालानमक धान को एक जनपद एक उत्पाद में चयनित किया गया है। अभी तक जिले में कालानमक धान का बीज कृषि विभाग के गोदामों पर नहीं मिलता था। किसानों को बीज मिले और कालानमक धान की खेती का रकबा बढ़े, इस उद्देश्य से पहली बार सरकारी समितियों पर बीज उपलब्ध कराने की कवायद शुरू हुई थी। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के फार्म हाउस में धान का बीज कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में तैयार किया गया।
विज्ञापन
56 क्विंटल बीज इस बार सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को बेचने की योजना थी। उस पर भी पानी फिरता दिख रहा है। कारण धान के बीज को प्रमाणित करने के लिए राज्य अनुसंधान केंद्र लखनऊ भेजा गया था। वहां पर बीज के रंग को देखते हुए उस पर संदेह जताया गया और उसे यह कहकर खारिज कर दिया कि वह अमानक है। ऐसे में इस वर्ष भी किसानों को कालानमक का बीज मिलने की उम्मीद नहीं है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि पहली बार में अमानक घोषित किया गया है, दोबारा उसे जांच के लिए भेजा जाएगा। इस संबंध में पत्राचार किया जा रहा है।
विज्ञापन
रंग व आकार बदलता है, खुशबू एक समान रहती है
कालानमक धान काला होता है, यही उसकी मुख्य पहचान है। ऐसे खाने वाले मानते हैं। धान हल्का भूरा होने के कारण मानक विहीन घोषित कर दिया गया। हालांकि कालानमक धान की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि यह धान जगह-जगह के पानी पर निर्भर करता है। अगर ऊंची भूमि पर धान को लगाएंगे तो एकदम काला रंग होगा। वही धान जहां पर हमेशा पानी रहता है, वहां पर लगाएंगे तो हल्का भूरा और थोड़ा मोटा हो जाता है। खूशबू एक समान होती है। उसमें कोई अंतर नहीं होता है।