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Siddharthnagar News: ‘कहत भिखारी’ का नाट्य मंचन देख हर्षित हुए दर्शक
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर महोत्सव में पहले दिन बुधवार को गोरखपुर से आई नाट्य संस्था ‘’रूपांतर नाट्य मंच’’ ने भोजपुरी नाटक ‘’कहत भिखारी’’ का मंचन किया।
इसे देखकर दर्शक हर्षित हो गए। लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के जीवन से प्रेरित इस नाटक में नृत्य और संगीत के साथ-साथ भोजपुरी के लोक संस्कृति को लुभावने और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया गया। लोक गीतों और प्रसंगों से सजे कलाकारों के अभिनय ने भोजपुरी के महानायक भिखारी ठाकुर को मंच पर जीवंत कर दिया। इस नाटक में भिखारी ठाकुर की जीवनी नहीं दिखाई गई है। बल्कि यह उनके कलाकार बनने के दौरान के संघर्षों, चुनौतियों और फिर उनके सामाजिक यथार्थों के वाहक बनने की कहानी है। भिखारी ठाकुर की नाच शैली में खेला गया। यह नाटक सच्चे कलाकार के अंदर की कसमसाहट, तड़प और समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ उसकी रचनाधर्मिता और फिर एक भाषा का महानायक बनने की बात कहता है।
भिखारी ठाकुर के द्वारा रचित बिरहा बहार, कलजुगी प्रेम बेटी-वियोग, गबरघिचोर, बिदेसिया जैसे चर्चित कृतियों के पात्रों और घटनाओं का क्रमिक विकास को इस नाटक में बड़े ही रोचक तरीके से दर्शाया गया। मंच पर बूढ़े भिखारी ठाकुर का अभिनय कर रहे अपर्णेश मिश्र ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया तथा सूत्रधार के तौर पर नाटक एक कड़ी में बंधने का कार्य किया। युवा भिखारी के रूप में आदित्य राजन तथा विभिन्न भूमिकाओं में निशिकांत, पवन, हरिकेश, सृष्टि, निकिता, अदिति, चन्दन, विक्की, प्रदीप ने शानदार अभिनय किया, संगीत दल में शगुन,पवन और आनंद ने मधुर प्रस्तुति से दर्शकों को करतल ध्वनि के लिए मजबूर कर दिया।
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भिखारी ठाकुर के दो प्रमुख किरदारों के अलावा नाटक के सभी पात्र कई बार अलग-अलग भूमिकाओं में दिखे।
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर महोत्सव में पहले दिन बुधवार को गोरखपुर से आई नाट्य संस्था ‘’रूपांतर नाट्य मंच’’ ने भोजपुरी नाटक ‘’कहत भिखारी’’ का मंचन किया।
इसे देखकर दर्शक हर्षित हो गए। लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के जीवन से प्रेरित इस नाटक में नृत्य और संगीत के साथ-साथ भोजपुरी के लोक संस्कृति को लुभावने और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया गया। लोक गीतों और प्रसंगों से सजे कलाकारों के अभिनय ने भोजपुरी के महानायक भिखारी ठाकुर को मंच पर जीवंत कर दिया। इस नाटक में भिखारी ठाकुर की जीवनी नहीं दिखाई गई है। बल्कि यह उनके कलाकार बनने के दौरान के संघर्षों, चुनौतियों और फिर उनके सामाजिक यथार्थों के वाहक बनने की कहानी है। भिखारी ठाकुर की नाच शैली में खेला गया। यह नाटक सच्चे कलाकार के अंदर की कसमसाहट, तड़प और समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ उसकी रचनाधर्मिता और फिर एक भाषा का महानायक बनने की बात कहता है।
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भिखारी ठाकुर के द्वारा रचित बिरहा बहार, कलजुगी प्रेम बेटी-वियोग, गबरघिचोर, बिदेसिया जैसे चर्चित कृतियों के पात्रों और घटनाओं का क्रमिक विकास को इस नाटक में बड़े ही रोचक तरीके से दर्शाया गया। मंच पर बूढ़े भिखारी ठाकुर का अभिनय कर रहे अपर्णेश मिश्र ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया तथा सूत्रधार के तौर पर नाटक एक कड़ी में बंधने का कार्य किया। युवा भिखारी के रूप में आदित्य राजन तथा विभिन्न भूमिकाओं में निशिकांत, पवन, हरिकेश, सृष्टि, निकिता, अदिति, चन्दन, विक्की, प्रदीप ने शानदार अभिनय किया, संगीत दल में शगुन,पवन और आनंद ने मधुर प्रस्तुति से दर्शकों को करतल ध्वनि के लिए मजबूर कर दिया।
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भिखारी ठाकुर के दो प्रमुख किरदारों के अलावा नाटक के सभी पात्र कई बार अलग-अलग भूमिकाओं में दिखे।