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Siddharthnagar News: शाम होते ही बंद हो गए मंदिरों के पट
Sat, 28 Oct 2023 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 28 Oct 2023 11:56 PM IST
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शहर में स्थित सिंहेश्वरी मंदिर का दरवाजा बंद करते महंत दिव्यांशु। संवाद
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शरद पूर्णिमा पर नहीं रखा गया खीर का प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण के कारण शनिवार शाम चार बजे मंदिरों के पट बंद हो गए। उसके बाद लोगों ने देव प्रतिमाओं का स्पर्श और विधि-विधान से पूजन नहीं किया। यही कारण रहा है कि शरद पूर्णिमा की पूजा नहीं हुई। लोगों ने भगवान विष्णु व लक्ष्मी का ध्यान किया। शहर के श्री सिंहेश्वरी मंदिर में देर रात तक लोगों का तांता लगा रहता है, लेकिन शनिवार को मंदिर के पट बंद सन्नाटा छा गया था।
आचार्य दिव्यांशु ने बताया कि चंद्रग्रहण के कारण शरद पूर्णिमा की पूजा नहीं हो सकी। आरोग्यता के लिए लोगों ने खीर का प्रसाद बाहर नहीं रखा। हालांकि, चंद्रग्रहण में लोगों ने रात में जागरण करके भगवान का ध्यान व मंत्र जप किया। शरद पूर्णिमा के दिन अचल प्रतिमाएं बाहर निकालकर पूजा की जाती थीं, लेकिन इस बार चल, अचल प्रतिमाओं को ग्रहण के सूतक काल में भी स्पर्श नहीं किया गया।
इसी प्रकार हनुमानगढ़ी, पल्टा देवी मंदिर, योगमाया मंदिर, दुर्गा मंदिर पुरानी नौगढ़, समय माता मंदिर कठेला सहित अन्य मंदिरों में भी पट बंद हो गए थे।
चंद्रग्रहण की पूर्व संध्या पर मंदिरों के पट बंद कर दिए गए हैं। शरद पूर्णिमा पर बनने वाली अमृत खीर भी नहीं बनाई गई। लोगों चंद्रमा के ग्रहण को लेकर पूरी रात जागते रहे, ग्रहण खत्म होने के बाद लोगों ने स्नान कर पूजा की।
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शरद पूर्णिमा पर नहीं रखा गया खीर का प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण के कारण शनिवार शाम चार बजे मंदिरों के पट बंद हो गए। उसके बाद लोगों ने देव प्रतिमाओं का स्पर्श और विधि-विधान से पूजन नहीं किया। यही कारण रहा है कि शरद पूर्णिमा की पूजा नहीं हुई। लोगों ने भगवान विष्णु व लक्ष्मी का ध्यान किया। शहर के श्री सिंहेश्वरी मंदिर में देर रात तक लोगों का तांता लगा रहता है, लेकिन शनिवार को मंदिर के पट बंद सन्नाटा छा गया था।
आचार्य दिव्यांशु ने बताया कि चंद्रग्रहण के कारण शरद पूर्णिमा की पूजा नहीं हो सकी। आरोग्यता के लिए लोगों ने खीर का प्रसाद बाहर नहीं रखा। हालांकि, चंद्रग्रहण में लोगों ने रात में जागरण करके भगवान का ध्यान व मंत्र जप किया। शरद पूर्णिमा के दिन अचल प्रतिमाएं बाहर निकालकर पूजा की जाती थीं, लेकिन इस बार चल, अचल प्रतिमाओं को ग्रहण के सूतक काल में भी स्पर्श नहीं किया गया।
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इसी प्रकार हनुमानगढ़ी, पल्टा देवी मंदिर, योगमाया मंदिर, दुर्गा मंदिर पुरानी नौगढ़, समय माता मंदिर कठेला सहित अन्य मंदिरों में भी पट बंद हो गए थे।
चंद्रग्रहण की पूर्व संध्या पर मंदिरों के पट बंद कर दिए गए हैं। शरद पूर्णिमा पर बनने वाली अमृत खीर भी नहीं बनाई गई। लोगों चंद्रमा के ग्रहण को लेकर पूरी रात जागते रहे, ग्रहण खत्म होने के बाद लोगों ने स्नान कर पूजा की।
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