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Siddharthnagar News: शिक्षकों की मांगें मानी गईं, अब मूल्यांकन को मिलेगी गति
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- प्रयागराज में शिक्षक की हत्या के विरोध में थे शिक्षक, प्रभावित हो रहा था मूल्यांकन
सिद्धार्थनगर। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन को अब गति मिलेगी और समय से मूल्यांकन कार्य पूरा हो जाएगा। क्योंकि शासन ने शिक्षकों की मांगें मान ली है। हत्या के मामले में केस दर्ज कराने के साथ ही शिक्षकों के बजाए कर्मचारियों से उत्तर पुस्तिका भेजे जाने की मांग को मान लिया है, जिसकी शिक्षक मांग कर रहे थे। इसी लिए दो दिन मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार कर दिया था। जिससे मूल्यांकन की गति थम गई थी। इससे परीक्षा परिणाम पर असर पड़ेगा।
बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन जिले में तीन केंद्रों पर 16 मार्च से शुरू हुआ जो 31 मार्च तक पूरा करना है। वाराणसी के शिक्षक की हत्या के बाद माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश नेतृत्व ने विरोध में मूल्यांकन कार्य पूर्ण रूप से एक दिन बंद कर किया था। शनिवार को फिर प्रदेश के आह्वान पर दो करोड़ आर्थिक सहायता देने की मांग के समर्थन में कार्य बहिष्कार किया। शिक्षकों की मांगें थी कि कॉपी शिक्षकों से भेजने के बजाए कर्मचारियों से भिजवाया जाए। इसके अलावा हत्या के मामले में कड़ी कार्रवाई की जाए। जिला विद्यालय निरीक्षक सोमारू प्रधान ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में आंदोलित शिक्षकों की मांग को उत्तर प्रदेश सरकार ने मान लिया है। इसीक्रम में बोर्ड के सचिव ने यह विज्ञप्ति जारी किया है। इसमें कहा है कि आगामी परीक्षाओं के बंडल शिक्षकों से मूल्यांकन केंंद्रों पर नहीं भिजवाया जाएगा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से भिजवाया जाएगा। यह आंदोलन शिक्षकों के लिए एक उनके मांग के समर्थन में सरकार द्वारा माना गया। इसके साथ मृतक आश्रित के खाते में 25 लाख रुपए की धनराशि स्थानांतरित हो चुकी है। अभियुक्त के खिलाफ 302 का मुकदमा कायम हो चुका है। तीसरा कोई भी शिक्षक मूल्यांकन केंद्र पर कॉपी नहीं ले जाएगा। 31 मार्च अंतिम तारीख है। इसके पहले ही मूल्यांकन का कार्य समाप्त हो जाएगा। बता दें कि जिले में तीन केंद्रों पर 1326 शिक्षकों की मूल्यांकन ड्यूटी लगाई थी।
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सिद्धार्थनगर। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन को अब गति मिलेगी और समय से मूल्यांकन कार्य पूरा हो जाएगा। क्योंकि शासन ने शिक्षकों की मांगें मान ली है। हत्या के मामले में केस दर्ज कराने के साथ ही शिक्षकों के बजाए कर्मचारियों से उत्तर पुस्तिका भेजे जाने की मांग को मान लिया है, जिसकी शिक्षक मांग कर रहे थे। इसी लिए दो दिन मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार कर दिया था। जिससे मूल्यांकन की गति थम गई थी। इससे परीक्षा परिणाम पर असर पड़ेगा।
बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन जिले में तीन केंद्रों पर 16 मार्च से शुरू हुआ जो 31 मार्च तक पूरा करना है। वाराणसी के शिक्षक की हत्या के बाद माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश नेतृत्व ने विरोध में मूल्यांकन कार्य पूर्ण रूप से एक दिन बंद कर किया था। शनिवार को फिर प्रदेश के आह्वान पर दो करोड़ आर्थिक सहायता देने की मांग के समर्थन में कार्य बहिष्कार किया। शिक्षकों की मांगें थी कि कॉपी शिक्षकों से भेजने के बजाए कर्मचारियों से भिजवाया जाए। इसके अलावा हत्या के मामले में कड़ी कार्रवाई की जाए। जिला विद्यालय निरीक्षक सोमारू प्रधान ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में आंदोलित शिक्षकों की मांग को उत्तर प्रदेश सरकार ने मान लिया है। इसीक्रम में बोर्ड के सचिव ने यह विज्ञप्ति जारी किया है। इसमें कहा है कि आगामी परीक्षाओं के बंडल शिक्षकों से मूल्यांकन केंंद्रों पर नहीं भिजवाया जाएगा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से भिजवाया जाएगा। यह आंदोलन शिक्षकों के लिए एक उनके मांग के समर्थन में सरकार द्वारा माना गया। इसके साथ मृतक आश्रित के खाते में 25 लाख रुपए की धनराशि स्थानांतरित हो चुकी है। अभियुक्त के खिलाफ 302 का मुकदमा कायम हो चुका है। तीसरा कोई भी शिक्षक मूल्यांकन केंद्र पर कॉपी नहीं ले जाएगा। 31 मार्च अंतिम तारीख है। इसके पहले ही मूल्यांकन का कार्य समाप्त हो जाएगा। बता दें कि जिले में तीन केंद्रों पर 1326 शिक्षकों की मूल्यांकन ड्यूटी लगाई थी।
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