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स्तूप पूजन के साथ कपिलवस्तु महोत्सव शुरु हुआ
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 29 Dec 2015 11:26 PM IST
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भगवान बुद्ध की क्रीड़ास्थली पर समारोह के पहले दिन देश-प्रदेश के कोने-कोने से बौद्ध भिक्षु एकत्रित हुए। कैंडल जलाकर बौद्ध रीति-रिवाज से स्तूप पूजन किया।
जनप्रतिनिधियों ने माना कि सिद्धार्थ की राजधानी होने के बाद भी कपिलवस्तु का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है। इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा। विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि बौद्ध धर्म के ज्यादातर अनुयाई विदेशों में हैं। उनके सहयोग से ही इस स्थल का विकास हो पाएगा।
श्रीलंका, थाईलैंड, जापान सहित अन्य बौद्धिष्ठ देशों को मुख्यमंत्री ने इस बारे में पत्र लिखा है। वहां से सहमति भी मिली है, मगर अभी तक श्रावस्ती तक ही सिमटे हुए हैं।
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सिद्धार्थ विवि को कपिलवस्तु के विकास की अहम कड़ी बताते हुए कहा कि बौद्ध स्टडी के लिए विदेशी छात्र यहां आएंगे तो विकास की राह खुलनी तय है। सांसद जगदंबिका पाल ने तथागत के क्रीड़ांगन के पिछड़ेपन पर चिंता जताते हुए कहा कि बुद्ध की इस धरा को आगे ले जाने के लिए वह कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। केन्द्रीय पर्यटन विभाग के माध्यम से यहां सुविधाएं विकसित कराने का प्रयास होगा। बुद्धिष्ट सर्किट का निर्माण इसी की कड़ी है। उन्होंने अस्थि कलश यहां लाने का भी प्रयास करने का भरोसा दिया।
उद्घाटन अवसर पर अतिथियों ने बौद्ध भिक्षुओं को कंबल वितरित किया। इस दौरान भिक्षुओं ने गनवरिया स्थित राजप्रासाद को जाने वाले मार्ग को चौड़ा कराने की भी मांग रखी। इस मौके पर जिलाधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीडीओ अखिलेश तिवारी, पूर्व विधायक सईद भ्रमर, चेयरमैन जमील सिद्दीकी, बौद्ध भिक्षु धम्म प्रिय, कामता यादव, पीआर आजाद, डॉ. सुरेंद्र मिश्रा, राणा प्रताप सिंह, जयशंकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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जनप्रतिनिधियों ने माना कि सिद्धार्थ की राजधानी होने के बाद भी कपिलवस्तु का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है। इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा। विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि बौद्ध धर्म के ज्यादातर अनुयाई विदेशों में हैं। उनके सहयोग से ही इस स्थल का विकास हो पाएगा।
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श्रीलंका, थाईलैंड, जापान सहित अन्य बौद्धिष्ठ देशों को मुख्यमंत्री ने इस बारे में पत्र लिखा है। वहां से सहमति भी मिली है, मगर अभी तक श्रावस्ती तक ही सिमटे हुए हैं।
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सिद्धार्थ विवि को कपिलवस्तु के विकास की अहम कड़ी बताते हुए कहा कि बौद्ध स्टडी के लिए विदेशी छात्र यहां आएंगे तो विकास की राह खुलनी तय है। सांसद जगदंबिका पाल ने तथागत के क्रीड़ांगन के पिछड़ेपन पर चिंता जताते हुए कहा कि बुद्ध की इस धरा को आगे ले जाने के लिए वह कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। केन्द्रीय पर्यटन विभाग के माध्यम से यहां सुविधाएं विकसित कराने का प्रयास होगा। बुद्धिष्ट सर्किट का निर्माण इसी की कड़ी है। उन्होंने अस्थि कलश यहां लाने का भी प्रयास करने का भरोसा दिया।
उद्घाटन अवसर पर अतिथियों ने बौद्ध भिक्षुओं को कंबल वितरित किया। इस दौरान भिक्षुओं ने गनवरिया स्थित राजप्रासाद को जाने वाले मार्ग को चौड़ा कराने की भी मांग रखी। इस मौके पर जिलाधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीडीओ अखिलेश तिवारी, पूर्व विधायक सईद भ्रमर, चेयरमैन जमील सिद्दीकी, बौद्ध भिक्षु धम्म प्रिय, कामता यादव, पीआर आजाद, डॉ. सुरेंद्र मिश्रा, राणा प्रताप सिंह, जयशंकर मिश्र आदि मौजूद रहे।