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उपजाऊ बनाए रखने के लिए मिट्टी का संरक्षण जरूरी
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‘उपजाऊ भूमि के लिए मिट्टी का संरक्षण जरूरी’
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में विश्व मृदा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
मन्नीजोत। विश्व मृदा दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को जागरूक किया गया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने कहा कि जनसंख्या विस्तार की वजह से समस्याएं बढ़ रही हैं, इसलिए सभी को जागरूक होकर मिट्टी संरक्षण करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मिट्टी का निर्माण विभिन्न अनुपातों में खनिज, कार्बनिक पदार्थ और वायु से होता है। यह जीवन के लिए महत्वपूर्ण होती है, इससे पौधे का विकास होता है और यह कई कीड़ों और जीवों के लिए रहने की जगह है। यह भोजन, कपड़े, आश्रय और चिकित्सा समेत चार आवश्यक जीवित कारकों का स्रोत हैं, इसलिए मिट्टी का संरक्षण जरूरी है। किसानों को जागरूक करने के लिए विश्व मृदा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने कहा कि अगर स्वस्थ रहना है तो मृदा को स्वस्थ रखना होगा और जैविक खेती करनी होगी। जैविक खेती से उपजा अन्न शरीर में जहर नहीं बनाता है। डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि कि मृदा में कई प्रकार के विषाणु रहते हैं, जिस पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो फसलों में विभिन्न रोग लगने की आशंका रहती है। डॉ. एसएन सिंह ने बताया कि अवशेषों को गड्ढे में एकत्र कर डाल वेस्ट डीकंपोजर का प्रयोग करें। इसी तरह मृदा शोधन से फसल की लागत कम होती है और उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में विश्व मृदा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
मन्नीजोत। विश्व मृदा दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को जागरूक किया गया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने कहा कि जनसंख्या विस्तार की वजह से समस्याएं बढ़ रही हैं, इसलिए सभी को जागरूक होकर मिट्टी संरक्षण करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मिट्टी का निर्माण विभिन्न अनुपातों में खनिज, कार्बनिक पदार्थ और वायु से होता है। यह जीवन के लिए महत्वपूर्ण होती है, इससे पौधे का विकास होता है और यह कई कीड़ों और जीवों के लिए रहने की जगह है। यह भोजन, कपड़े, आश्रय और चिकित्सा समेत चार आवश्यक जीवित कारकों का स्रोत हैं, इसलिए मिट्टी का संरक्षण जरूरी है। किसानों को जागरूक करने के लिए विश्व मृदा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने कहा कि अगर स्वस्थ रहना है तो मृदा को स्वस्थ रखना होगा और जैविक खेती करनी होगी। जैविक खेती से उपजा अन्न शरीर में जहर नहीं बनाता है। डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि कि मृदा में कई प्रकार के विषाणु रहते हैं, जिस पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो फसलों में विभिन्न रोग लगने की आशंका रहती है। डॉ. एसएन सिंह ने बताया कि अवशेषों को गड्ढे में एकत्र कर डाल वेस्ट डीकंपोजर का प्रयोग करें। इसी तरह मृदा शोधन से फसल की लागत कम होती है और उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होती है।
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