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Siddharthnagar News: तो नेपाल में विदेशी सामानों से सस्ते हुए भारतीय इलेक्ट्रानिक्स आइटम
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भारत नेपाल सीमा पर एसएसबी के गिरफ्त में इलेक्ट्रॉनिक सामान। स्त्रोत्र एसएसबी
- त्योहार को देखते हुए सीमा पर बढ़ गई इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की तस्करी
- हूबहू ब्रांड पहुंचा देते हैं नेपाल, वहीं सामान जापान और कोरिया निर्मित देखकर लोग देते हैं मुंह मांगी कीमत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक दौर था कि नेपाल के रास्ते चीनी इलेक्ट्राॅनिक्स सामानाें की भारतीय बाजार में मांग अधिक थी। इस ट्रेड का फायदा उठाते हुए तस्कर नेपाल से भारत में इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों के खपाते थे, लेकिन अब स्थिति उलट हो गई है। भारतीय बाजारों में बने सामान अपेक्षाकृत सस्ते साबित होने लगे हैं। नेपाल में चीन सहित अन्य विदेशी सामानों के बाजार में भारतीय सामानों का बाजार तैयार हो गया है।
अवैध तरीके से सामान पहुंचने के कारण टैक्स भी कम लग रहा है। इस कारण नेपाल में मेड इन देलही के टैग वाले इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों को नेपाल में खपाया जा रहा है। दिवाली से ठीक पहले इन सामानों की मांग बढ़ी तो सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे कैरियर और उनके सामान चढ़ रहे हैं।
तस्कर सीजन और मांग के हिसाब से सामान की तस्करी करते हैं। इस बार दीपावली में दिल्ली में बने हुए इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों की तस्करी बढ़ी है, तो बॉर्डर क्षेत्रों में भी यह चर्चा का विषय बन गया है। दिल्ली में बने सामान तो जापान और कोरिया से आने वाले सामान की तरह देख रहे हैं, लेकिन दोनों देशों से आने वाले सामानों की अपेक्षा वे सस्ते साबित हो रहे हैं। बढ़नी के एक दुकानदार ने बताया कि अब दौर बदल गया है। एक तो नेपाल में पहले की अपेक्षा चीनी सामानों की तस्करी कम हो गई, दूसरे भारतीय सामान चीनी सामानों की अपेक्षा सस्ते साबित होने लगे हैं।
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एक पखवाड़ा के बीच बार्डर पर इलेक्ट्रॉनिक सामानों की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर पगडंडी का सहारा लेकर पहुंच रहे हैं और सामान को बार्डर पार पहुंचाकर मालामाल हो रहे हैं। ककरहवा के दुकानदार ने बताया कि अवैध रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स सामान को बॉर्डर पार करने में टैक्स भी बच रहा है।
जिले से लगने वाली भारत-नेपाल की 68 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली है। मुख्य मार्गों पर सुरक्षा एजेंसियांं और स्थानीय थाने की पुलिस की नजर रहती है। लेकिन पगडंडियों तक पैठ नहीं है। इसका फायदा तस्कर उठाते हैं। मांग बढ़ने के साथ ही इस पार से उस पार सामान पहुंचाने का काम करते हैं। इसमें अजान, खाद से लेकर सोना, चांदी, कपड़ा और मादक पदार्थ सहित अन्य सामान शामिल हैं।
जैसा कि सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में सामने आ चुका है, लेकिन मौजूदा समय में बार्डर पर इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की तस्करी बढ़ी है। तस्कर बल्ब, झालर सहित अन्य सामान भारत से नेपाल लेकर जा रहे हैं। दीपावली पर्व को देखते हुए तस्करी बढ़ी है। कारण दीपावली पर लोग घर को रोशन करते हैं। इसके लिए खूब खर्च करते हैं। नेपाल में कोरिया, जापान सहित विदेश के सामान बाजारों में बिकता है, इसी बाजार में अब भारतीय इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों की बिक्री बढ़ गई है।
सूत्रों की मानें तो उन्हीं सामान की हूबहू कॉपी दिल्ली में तैयार की जाती है। उसी को तस्कर खरीदकर लाते हैं और नेपाल पहुंचा देते हैं। जिसकी उन्हें मुहंमांगी कीमत मिलती है। कारण इन सामानों के टिकाऊ होने का भरोसा लोगों में है, जिसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। पिछले एक पखपाड़ा में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं, लेकिन तस्कर गैर परंपरागत मार्ग का सहारा लेकर सामान बाॅर्डर पार पहुंचा दे रहे हैं।
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ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट भी बना रहे
भारतीय सीमा से नेपाल के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की तस्करी लगातार जारी है। इससे पहले नेपाल में जाकर लोग इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का खरीदारी करते थे, लेकिन अब उल्टा भारत से नेपाल इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स जा रहा है, क्योंकि नेपाल में मेड इन जापान, मेड इन कोरिया तथा मेड इन चाइना है, लेकिन मल्टीनेशनल कंपनियां भारत में भी वहीं सामान कुछ ऐसे से सप्लाई किया जा रहा है। अब इस व्यापार में भारतीय सीमा से सटे नेपाली कस्बों में बैठे लोग मेड इन दिल्ली का सामान जो की ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट सामान बनाते हैं। उसको वहां से लाकर नेपाली काशन में व्यापारियों को गैर परंपरागत रास्तों से पहुंचते हैं। वहीं सामान नेपाल के अन्य शहरों जैसे बुटवल भैरव नारायण घाट काठमांडू इतिहास जगह पर पहुंचाया जाता है, फिर वहां से उसको मेड इन जापान ने मेड इन कोरिया बनाकर फिर छोटे काशन में रिटेल के पास भेजा जाता है और भारतीय नागरिक उसको विदेशी सामान खरीद करके लाते है। इसकी वह मुंहमांगी कीमत देते हैं। क्योंकि उन्हें विश्वास रहता है कि भारतीय सामान सस्ता और टिकाऊ होगा।
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बड़ी मात्रा में पकड़ा, इलेक्ट्रॉनिक सामान, तस्कर फरार
29 अक्तूबर को एसएसबी 43 वीं वाहिनी सीमा चौकी कप्सिहवा के पास नेपाल बाॅर्डर पार करने की कोशिश करते हुए बाइक सवार को पकड़ने की कोशिश की तो वह नेपाल में भाग गया। मौके से बाइक पर लदा 100 एलईडी बल्ब, झालर, लैंप, सहित बड़ी मात्रा में सामान पकड़ा गया।
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बचकर निकल गया कैरियर
ककरहवा बॉर्डर के पास एक पखवारा पहले बाॅर्डर पार करते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने इलेक्टॉनिक्स सामान पकड़ा था, लेकिन तस्कर हाथ नहीं लगा। वह सामान से भरा झोला छोड़कर निकल गया था। झोले से बल्ब, झालर, स्विच आदि बरामद हुआ था। लिखापढ़ी करके कार्रवाई की गई थी। यह तो पकड़ में आने वाले मामले हैं। न जाने कितने तस्कर सुरक्षा एजेंसियों की आंख से बचकर निकल जाते हैं।
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- हूबहू ब्रांड पहुंचा देते हैं नेपाल, वहीं सामान जापान और कोरिया निर्मित देखकर लोग देते हैं मुंह मांगी कीमत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक दौर था कि नेपाल के रास्ते चीनी इलेक्ट्राॅनिक्स सामानाें की भारतीय बाजार में मांग अधिक थी। इस ट्रेड का फायदा उठाते हुए तस्कर नेपाल से भारत में इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों के खपाते थे, लेकिन अब स्थिति उलट हो गई है। भारतीय बाजारों में बने सामान अपेक्षाकृत सस्ते साबित होने लगे हैं। नेपाल में चीन सहित अन्य विदेशी सामानों के बाजार में भारतीय सामानों का बाजार तैयार हो गया है।
अवैध तरीके से सामान पहुंचने के कारण टैक्स भी कम लग रहा है। इस कारण नेपाल में मेड इन देलही के टैग वाले इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों को नेपाल में खपाया जा रहा है। दिवाली से ठीक पहले इन सामानों की मांग बढ़ी तो सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे कैरियर और उनके सामान चढ़ रहे हैं।
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तस्कर सीजन और मांग के हिसाब से सामान की तस्करी करते हैं। इस बार दीपावली में दिल्ली में बने हुए इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों की तस्करी बढ़ी है, तो बॉर्डर क्षेत्रों में भी यह चर्चा का विषय बन गया है। दिल्ली में बने सामान तो जापान और कोरिया से आने वाले सामान की तरह देख रहे हैं, लेकिन दोनों देशों से आने वाले सामानों की अपेक्षा वे सस्ते साबित हो रहे हैं। बढ़नी के एक दुकानदार ने बताया कि अब दौर बदल गया है। एक तो नेपाल में पहले की अपेक्षा चीनी सामानों की तस्करी कम हो गई, दूसरे भारतीय सामान चीनी सामानों की अपेक्षा सस्ते साबित होने लगे हैं।
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एक पखवाड़ा के बीच बार्डर पर इलेक्ट्रॉनिक सामानों की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर पगडंडी का सहारा लेकर पहुंच रहे हैं और सामान को बार्डर पार पहुंचाकर मालामाल हो रहे हैं। ककरहवा के दुकानदार ने बताया कि अवैध रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स सामान को बॉर्डर पार करने में टैक्स भी बच रहा है।
जिले से लगने वाली भारत-नेपाल की 68 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली है। मुख्य मार्गों पर सुरक्षा एजेंसियांं और स्थानीय थाने की पुलिस की नजर रहती है। लेकिन पगडंडियों तक पैठ नहीं है। इसका फायदा तस्कर उठाते हैं। मांग बढ़ने के साथ ही इस पार से उस पार सामान पहुंचाने का काम करते हैं। इसमें अजान, खाद से लेकर सोना, चांदी, कपड़ा और मादक पदार्थ सहित अन्य सामान शामिल हैं।
जैसा कि सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में सामने आ चुका है, लेकिन मौजूदा समय में बार्डर पर इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की तस्करी बढ़ी है। तस्कर बल्ब, झालर सहित अन्य सामान भारत से नेपाल लेकर जा रहे हैं। दीपावली पर्व को देखते हुए तस्करी बढ़ी है। कारण दीपावली पर लोग घर को रोशन करते हैं। इसके लिए खूब खर्च करते हैं। नेपाल में कोरिया, जापान सहित विदेश के सामान बाजारों में बिकता है, इसी बाजार में अब भारतीय इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों की बिक्री बढ़ गई है।
सूत्रों की मानें तो उन्हीं सामान की हूबहू कॉपी दिल्ली में तैयार की जाती है। उसी को तस्कर खरीदकर लाते हैं और नेपाल पहुंचा देते हैं। जिसकी उन्हें मुहंमांगी कीमत मिलती है। कारण इन सामानों के टिकाऊ होने का भरोसा लोगों में है, जिसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। पिछले एक पखपाड़ा में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं, लेकिन तस्कर गैर परंपरागत मार्ग का सहारा लेकर सामान बाॅर्डर पार पहुंचा दे रहे हैं।
ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट भी बना रहे
भारतीय सीमा से नेपाल के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की तस्करी लगातार जारी है। इससे पहले नेपाल में जाकर लोग इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का खरीदारी करते थे, लेकिन अब उल्टा भारत से नेपाल इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स जा रहा है, क्योंकि नेपाल में मेड इन जापान, मेड इन कोरिया तथा मेड इन चाइना है, लेकिन मल्टीनेशनल कंपनियां भारत में भी वहीं सामान कुछ ऐसे से सप्लाई किया जा रहा है। अब इस व्यापार में भारतीय सीमा से सटे नेपाली कस्बों में बैठे लोग मेड इन दिल्ली का सामान जो की ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट सामान बनाते हैं। उसको वहां से लाकर नेपाली काशन में व्यापारियों को गैर परंपरागत रास्तों से पहुंचते हैं। वहीं सामान नेपाल के अन्य शहरों जैसे बुटवल भैरव नारायण घाट काठमांडू इतिहास जगह पर पहुंचाया जाता है, फिर वहां से उसको मेड इन जापान ने मेड इन कोरिया बनाकर फिर छोटे काशन में रिटेल के पास भेजा जाता है और भारतीय नागरिक उसको विदेशी सामान खरीद करके लाते है। इसकी वह मुंहमांगी कीमत देते हैं। क्योंकि उन्हें विश्वास रहता है कि भारतीय सामान सस्ता और टिकाऊ होगा।
बड़ी मात्रा में पकड़ा, इलेक्ट्रॉनिक सामान, तस्कर फरार
29 अक्तूबर को एसएसबी 43 वीं वाहिनी सीमा चौकी कप्सिहवा के पास नेपाल बाॅर्डर पार करने की कोशिश करते हुए बाइक सवार को पकड़ने की कोशिश की तो वह नेपाल में भाग गया। मौके से बाइक पर लदा 100 एलईडी बल्ब, झालर, लैंप, सहित बड़ी मात्रा में सामान पकड़ा गया।
बचकर निकल गया कैरियर
ककरहवा बॉर्डर के पास एक पखवारा पहले बाॅर्डर पार करते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने इलेक्टॉनिक्स सामान पकड़ा था, लेकिन तस्कर हाथ नहीं लगा। वह सामान से भरा झोला छोड़कर निकल गया था। झोले से बल्ब, झालर, स्विच आदि बरामद हुआ था। लिखापढ़ी करके कार्रवाई की गई थी। यह तो पकड़ में आने वाले मामले हैं। न जाने कितने तस्कर सुरक्षा एजेंसियों की आंख से बचकर निकल जाते हैं।