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Siddharthnagar News: 100 विद्यालयों में होगी स्मार्ट क्लास
Tue, 03 Mar 2026 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 03 Mar 2026 12:05 AM IST
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सिद्धार्थनगर। नए सत्र में परिषदीय विद्यालय में तकनीकी शिक्षा और मजबूत होगी और बच्चे ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। जनपद में 400 स्मार्ट क्लास बनाने की योजना है। इसमें 100 विद्यालयों में नए सत्र में स्मार्ट क्लास शुरू होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से बच्चों को पढ़ाई में सहूलियत मिलेगी। सीएसआर फंड से 100 विद्यालयों में काम शुरू हुआ है।
जिले में कुल दो हजार से अधिक परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इसमें करीब सवा तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार निशुल्क किताब, ड्रेस के लिए बैंक खाते के माध्यम से रुपये देने के साथ ही निशुल्क शिक्षा दे रही है। बच्चे तकनीकी रूप से दक्ष हो सकें और सरलता से पढ़ाई कर सकें। इसके लिए निजी विद्यालयों की तर्ज पर विद्यालयों में स्मार्ट क्लास संचालित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें जनपद में स्मार्ट क्लास पहले कई विद्यालयों में चल रहे हैं। चरणबद्ध तरीके से डिजिटल शिक्षा को विस्तार देने की योजना है।
इस पहल से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई अब तकनीक से जुड़कर नई दिशा तय करेंगी। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक एक स्मार्ट क्लास की स्थापना पर सवा दो लाख रुपये खर्च होंगे। इस तरह 400 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने की योजना है। इसमें 300 स्मार्ट क्लास बेसिक शिक्षा विभाग के बजट और 100 स्मार्ट क्लास सीएसआर फंड के जरिये तैयार की जाएंगी। 100 विद्यालय पर सीएसआर फंड से काम शुरू हुआ है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। उम्मीद है कि नए सत्र में 100 विद्यालय में स्मार्ट क्लास शुरू हो जाएगी। इससे बच्चों को पढ़ाई करने में सहूलियत मिलेगी।
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इस संबंध में बीएसए शैलेश कुमार ने बताया कि स्मार्ट क्लास बनाने का काम चल रहा है। जैसे-जैसे तैयार होंगे, बच्चों को पढ़ाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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स्मार्ट क्लास में यह सुविधाएं रहेंगी
स्मार्ट क्लास में डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, साउंड सिस्टम और इंटरनेट के जरिये कक्षा में पढ़ाई कराई जाएगी। विषयों को वीडियो, एनिमेशन और ग्राफिक्स के माध्यम से समझाया जाएगा, जिससे बच्चों की समझ बेहतर होगी और सीखने में रुचि बढ़ेगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अब निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। स्मार्ट क्लास का संचालन सिर्फ औपचारिकता न बने, इसके लिए शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे स्मार्ट क्लास चलाना अनिवार्य होगा। इसके संचालन और उपयोग की रिपोर्ट ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से शासन से निगरानी हो रही है। वहीं, से बीएसए को रिपोर्ट भेजी जा रही है, लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विद्यालयों से जवाब-तलब की कार्रवाई भी होगी।
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जिले में कुल दो हजार से अधिक परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इसमें करीब सवा तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार निशुल्क किताब, ड्रेस के लिए बैंक खाते के माध्यम से रुपये देने के साथ ही निशुल्क शिक्षा दे रही है। बच्चे तकनीकी रूप से दक्ष हो सकें और सरलता से पढ़ाई कर सकें। इसके लिए निजी विद्यालयों की तर्ज पर विद्यालयों में स्मार्ट क्लास संचालित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें जनपद में स्मार्ट क्लास पहले कई विद्यालयों में चल रहे हैं। चरणबद्ध तरीके से डिजिटल शिक्षा को विस्तार देने की योजना है।
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इस पहल से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई अब तकनीक से जुड़कर नई दिशा तय करेंगी। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक एक स्मार्ट क्लास की स्थापना पर सवा दो लाख रुपये खर्च होंगे। इस तरह 400 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने की योजना है। इसमें 300 स्मार्ट क्लास बेसिक शिक्षा विभाग के बजट और 100 स्मार्ट क्लास सीएसआर फंड के जरिये तैयार की जाएंगी। 100 विद्यालय पर सीएसआर फंड से काम शुरू हुआ है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। उम्मीद है कि नए सत्र में 100 विद्यालय में स्मार्ट क्लास शुरू हो जाएगी। इससे बच्चों को पढ़ाई करने में सहूलियत मिलेगी।
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इस संबंध में बीएसए शैलेश कुमार ने बताया कि स्मार्ट क्लास बनाने का काम चल रहा है। जैसे-जैसे तैयार होंगे, बच्चों को पढ़ाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
स्मार्ट क्लास में यह सुविधाएं रहेंगी
स्मार्ट क्लास में डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, साउंड सिस्टम और इंटरनेट के जरिये कक्षा में पढ़ाई कराई जाएगी। विषयों को वीडियो, एनिमेशन और ग्राफिक्स के माध्यम से समझाया जाएगा, जिससे बच्चों की समझ बेहतर होगी और सीखने में रुचि बढ़ेगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अब निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। स्मार्ट क्लास का संचालन सिर्फ औपचारिकता न बने, इसके लिए शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे स्मार्ट क्लास चलाना अनिवार्य होगा। इसके संचालन और उपयोग की रिपोर्ट ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से शासन से निगरानी हो रही है। वहीं, से बीएसए को रिपोर्ट भेजी जा रही है, लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विद्यालयों से जवाब-तलब की कार्रवाई भी होगी।