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उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ख्याति फैलाएगी सिद्धार्थ युनिवर्सिटी
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सिद्धार्थ विवि में संचालित होंगे छह नए कोर्स
हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म दर्शन पाठ्यक्रम शुरू करने की कवायद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिस धरती के भगवान बुद्ध ने पूरी दुनिया को धर्म का पाठ पढ़ाया, उसी धरती पर स्थापित सिद्धार्थ विवि की ख्याति देश विदेश में फैलने वाली है। नेपाल से सटे कपिलवस्तु में संचालित विश्वविद्यालय में छह नए कोर्स की पढ़ाई शुुरू होगी। हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म दर्शन पाठ्यक्रम शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। नए कोर्स शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय में देश-विदेश से आकर अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ेगी। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी। वर्तमान में 500 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। नेपाल एवं अन्य देशों के विद्यार्थी भी यहां अध्ययन कर रहे हैं। विज्ञान विषय के छह नए कोर्स शुरू होंगे, जबकि शोध कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। कोरोना के कारण पिछले वर्ष नेपाल के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हुई थी। इस बार एसएसबी के जवान उन्हें आईकार्ड दिखाने पर छात्र-छात्राओं सीमा पर प्रवेश दिया जा रहा है। इस बाबत कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि सिद्धार्थ विवि की स्थापना के बाद से रोज नई-नई उपलब्धियों को हासिल करता जा रहा है। दूरदराज से छात्रों को लाने के लिए परिवहन सेवा शुुरू की गई हैं। नए कोर्स की पढ़ाई के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों को शोध कराने का कार्य प्रारंभ किया गया है
विदेशी भाषाओं का केंद्र बिंदु बनेगा विवि
सिद्धार्थ विवि में संस्कृत, तिब्बती, सिंघली, अपभ्रंश, कोरियाई और थाई भाषा केंद्र की स्थापना करने की योजना है। बौद्ध धर्म दर्शन का अध्ययन अध्यापन सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए पाली प्रबोधनी पुस्तक प्रकाशित भी कर दी गई है। वर्तमान सत्र में बौद्ध दर्शन एवं पालि भाषा प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम स्नातकोत्तर कक्षाओं के सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य एवं निशुल्क शुरू की गई हैं। ।
एमबीए पाठ्यक्रम को मिली मंजूरी
सिद्धार्थ विवि में वाणिज्य संकाय अंतर्गत बीकाम एवं एमकाम तथा कला संकाय अंतर्गत अर्थशास्त्र, हिंदी, प्राचीन इतिहास, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, इतिहास, बीबीए, समाजशास्त्र, संस्कृत, अंग्रेजी की कक्षाएं संचालित हैं। भविष्य में मनोविज्ञान, भूगोल, गृह विज्ञान, कला संकाय अंतर्गत कक्षाएं संचालित होंगी। विज्ञान संकाय की कक्षाएं आगामी सत्र से प्रारंभ होने की संभावना है। बॉयोटेक्नोलॉजी, गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान शामिल है। एमबीए पाठ्यक्रम की भी मान्यता मिल चुकी है। फैकल्टी चयन के बाद पढ़ाई शुरू हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र भी 2019 से स्थापित है। अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से अहम पटल पर विवि को बड़ी उपलब्धि मिल चुकी हैं।
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हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म दर्शन पाठ्यक्रम शुरू करने की कवायद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिस धरती के भगवान बुद्ध ने पूरी दुनिया को धर्म का पाठ पढ़ाया, उसी धरती पर स्थापित सिद्धार्थ विवि की ख्याति देश विदेश में फैलने वाली है। नेपाल से सटे कपिलवस्तु में संचालित विश्वविद्यालय में छह नए कोर्स की पढ़ाई शुुरू होगी। हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म दर्शन पाठ्यक्रम शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। नए कोर्स शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय में देश-विदेश से आकर अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ेगी। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी। वर्तमान में 500 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। नेपाल एवं अन्य देशों के विद्यार्थी भी यहां अध्ययन कर रहे हैं। विज्ञान विषय के छह नए कोर्स शुरू होंगे, जबकि शोध कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। कोरोना के कारण पिछले वर्ष नेपाल के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हुई थी। इस बार एसएसबी के जवान उन्हें आईकार्ड दिखाने पर छात्र-छात्राओं सीमा पर प्रवेश दिया जा रहा है। इस बाबत कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि सिद्धार्थ विवि की स्थापना के बाद से रोज नई-नई उपलब्धियों को हासिल करता जा रहा है। दूरदराज से छात्रों को लाने के लिए परिवहन सेवा शुुरू की गई हैं। नए कोर्स की पढ़ाई के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों को शोध कराने का कार्य प्रारंभ किया गया है
विदेशी भाषाओं का केंद्र बिंदु बनेगा विवि
सिद्धार्थ विवि में संस्कृत, तिब्बती, सिंघली, अपभ्रंश, कोरियाई और थाई भाषा केंद्र की स्थापना करने की योजना है। बौद्ध धर्म दर्शन का अध्ययन अध्यापन सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए पाली प्रबोधनी पुस्तक प्रकाशित भी कर दी गई है। वर्तमान सत्र में बौद्ध दर्शन एवं पालि भाषा प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम स्नातकोत्तर कक्षाओं के सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य एवं निशुल्क शुरू की गई हैं। ।
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एमबीए पाठ्यक्रम को मिली मंजूरी
सिद्धार्थ विवि में वाणिज्य संकाय अंतर्गत बीकाम एवं एमकाम तथा कला संकाय अंतर्गत अर्थशास्त्र, हिंदी, प्राचीन इतिहास, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, इतिहास, बीबीए, समाजशास्त्र, संस्कृत, अंग्रेजी की कक्षाएं संचालित हैं। भविष्य में मनोविज्ञान, भूगोल, गृह विज्ञान, कला संकाय अंतर्गत कक्षाएं संचालित होंगी। विज्ञान संकाय की कक्षाएं आगामी सत्र से प्रारंभ होने की संभावना है। बॉयोटेक्नोलॉजी, गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान शामिल है। एमबीए पाठ्यक्रम की भी मान्यता मिल चुकी है। फैकल्टी चयन के बाद पढ़ाई शुरू हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र भी 2019 से स्थापित है। अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से अहम पटल पर विवि को बड़ी उपलब्धि मिल चुकी हैं।
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