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Siddharthnagar News: पिटाई से भाभी की मौत मामले में ननद को 10 वर्ष का कारावास
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सिद्धार्थनगर। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने गुलफेशां उर्फ पापा को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अभियुक्ता को ढाई वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला ढेबरुआ थाना क्षेत्र के दुधवनिया गांव का है। अभियोजन के अनुसार, ग्राम अकहरहा निवासी अरबाज ने 31 मई 2019 को पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उसकी मां शबनम बानो रात करीब 12 बजे अपने पिता के घर में कुरान शरीफ पढ़ रही थीं। उसी दौरान उसकी बुआ गुलफेशां उर्फ पापा पत्नी अतीकुर्रहमान अपने बेटे एहतेशाम के साथ वहां पहुंचीं और बाजार जाने को लेकर आपत्ति जताने लगीं। इसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई।
अभियोजन के मुताबिक, कहासुनी के बाद गुलफेशां और उसके बेटे ने शबनम बानो के साथ मारपीट की। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीच-बचाव कराया, लेकिन तब तक शबनम बानो की हालत गंभीर हो चुकी थी। परिजन उन्हें इलाज के लिए बढ़नी ले जा रहे थे, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। बाद में डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया और साक्ष्य जुटाते हुए मामले की विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उपलब्ध साक्ष्यों व अभिलेखों का परीक्षण किया। इसके आधार पर न्यायालय ने अभियुक्ता को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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मामला ढेबरुआ थाना क्षेत्र के दुधवनिया गांव का है। अभियोजन के अनुसार, ग्राम अकहरहा निवासी अरबाज ने 31 मई 2019 को पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उसकी मां शबनम बानो रात करीब 12 बजे अपने पिता के घर में कुरान शरीफ पढ़ रही थीं। उसी दौरान उसकी बुआ गुलफेशां उर्फ पापा पत्नी अतीकुर्रहमान अपने बेटे एहतेशाम के साथ वहां पहुंचीं और बाजार जाने को लेकर आपत्ति जताने लगीं। इसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई।
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अभियोजन के मुताबिक, कहासुनी के बाद गुलफेशां और उसके बेटे ने शबनम बानो के साथ मारपीट की। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीच-बचाव कराया, लेकिन तब तक शबनम बानो की हालत गंभीर हो चुकी थी। परिजन उन्हें इलाज के लिए बढ़नी ले जा रहे थे, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। बाद में डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया और साक्ष्य जुटाते हुए मामले की विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उपलब्ध साक्ष्यों व अभिलेखों का परीक्षण किया। इसके आधार पर न्यायालय ने अभियुक्ता को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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