{"_id":"6aa19b92f3ed3eef410d909c","slug":"siddharthnagar-news-the-audience-in-the-pandal-broke-into-jubilation-the-moment-shri-krishna-was-born-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1035-164287-2026-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: श्रीकृष्ण का जन्म होते ही पंडाल में झूम उठे श्रोता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: श्रीकृष्ण का जन्म होते ही पंडाल में झूम उठे श्रोता
Wed, 09 Sep 2026 11:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 09 Sep 2026 11:16 PM IST
विज्ञापन
चिल्हिया। भीमापार के विवेकानंद नगर स्थित आईटीआई कॉलेज परिसर के राधा-कृष्ण मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बुधवार को श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया गया। भगवान का जन्म होते ही पूरा पंडाल जयघोष से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ का उद्घोष करते हुए नृत्य कर खुशी मनाई। कथावाचक आचार्य संतोष शुक्ल महाराज ने कहा कि भगवान का स्मरण करने मात्र से परिवार और व्यक्ति पर आने वाली विपत्तियां दूर होती हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि कंस के कारागार में भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही कारागार के ताले खुल गए और बंदी रक्षक गहरी नींद में सो गए। देवकी और वासुदेव की हथकड़ियां व बेड़ियां भी खुल गईं।
उन्होंने बताया कि वासुदेव नवजात कृष्ण को लेकर नंद बाबा के घर जा रहे थे। रास्ते में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। वासुदेव ने कृष्ण को दोनों हाथों से ऊपर उठा लिया। वासुदेव सुरक्षित यमुना पार कर नंद बाबा के घर पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रद्धालुओं ने ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ का उद्घोष करते हुए नृत्य कर खुशी मनाई। कथावाचक आचार्य संतोष शुक्ल महाराज ने कहा कि भगवान का स्मरण करने मात्र से परिवार और व्यक्ति पर आने वाली विपत्तियां दूर होती हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि कंस के कारागार में भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही कारागार के ताले खुल गए और बंदी रक्षक गहरी नींद में सो गए। देवकी और वासुदेव की हथकड़ियां व बेड़ियां भी खुल गईं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि वासुदेव नवजात कृष्ण को लेकर नंद बाबा के घर जा रहे थे। रास्ते में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। वासुदेव ने कृष्ण को दोनों हाथों से ऊपर उठा लिया। वासुदेव सुरक्षित यमुना पार कर नंद बाबा के घर पहुंचे।
विज्ञापन