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Siddharthnagar News: नेपाल में बढ़ेगा गन्ने का रकबा, भारत से लाई गईं चार उन्नत किस्में

Tue, 13 Oct 2026 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 13 Oct 2026 11:40 PM IST
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Siddharthnagar News: Sugarcane acreage to increase in Nepal; four improved varieties brought from India
- नेपाल में गन्ने की उन्नत किस्मों के बीज सौंपते भारतीय दूतावास और कृषि अनुसंधान परिषद के अधिकारी
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- दो साल तक होगा परीक्षण, बेहतर परिणाम मिलने पर किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे बीज
- उत्पादकता बढ़ाकर चीनी आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी
खुनुवां। नेपाल में गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और चीनी के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भारत से गन्ने की चार उन्नत किस्में लाई गई हैं। इनकी उत्पादन क्षमता 82.5 से 93.2 टन प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। नेपाल कृषि अनुसंधान परिषद (नार्क) अब इन किस्मों का दो साल तक परीक्षण करेगी। परिणाम अनुकूल रहने पर बीजों का संवर्धन कर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे नेपाल में गन्ने का रकबा और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
काठमांडो में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय दूतावास की प्रथम सचिव निशा ने नार्क के कार्यकारी निदेशक श्रीमत श्रेष्ठ को इन किस्मों के बीज सौंपे। इन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ और नार्क के राष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान कार्यक्रम, जीतपुर (बारा) के सहयोग से नेपाल लाया गया है।
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लाई गई किस्मों में सीओएलके 16202 की उत्पादन क्षमता 93.2 टन प्रति हेक्टेयर और सुक्रोज की मात्रा 17.7 प्रतिशत है। वहीं, सीओएलके 16470 की उत्पादन क्षमता 82.5 टन प्रति हेक्टेयर और सुक्रोज की मात्रा 17.4 प्रतिशत है। जल्दी पकने वाली सीओएस 17231 की क्षमता 91.5 टन प्रति हेक्टेयर और सुक्रोज की मात्रा 17.7 प्रतिशत है। इसी तरह सीओएस 18231 की उत्पादन क्षमता 92.5 टन प्रति हेक्टेयर और सुक्रोज की मात्रा 18 प्रतिशत है। चारों किस्में गन्ने में लगने वाले रेड रॉट यानी लाल सड़न रोग के प्रति प्रतिरोधी बताई गई हैं।
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भारत की तुलना में नेपाल में कम है उत्पादकता
वर्तमान में नेपाल में करीब 53 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है और सालाना लगभग 27 लाख टन उत्पादन होता है। वहां गन्ने की औसत उत्पादकता करीब 50 टन प्रति हेक्टेयर है जबकि भारत में यह लगभग 82 टन प्रति हेक्टेयर है। कम उत्पादकता के कारण नेपाल अपनी कुल चीनी खपत की करीब 30 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है।


परीक्षण के बाद किसानों तक पहुंचेंगे बीज
नार्क के अनुसार, विभिन्न अनुसंधान केंद्रों पर दो साल तक इन किस्मों का परीक्षण और तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। उपयुक्त पाए जाने पर इन्हें औपचारिक रूप से जारी कर पंजीकृत किया जाएगा। इसके बाद बीजों का संवर्धन कर चीनी मिलों के समन्वय से किसानों तक पहुंचाया जाएगा। उम्मीद है कि उन्नत किस्मों से गन्ने की उत्पादकता बढ़ेगी, किसानों की आय में सुधार होगा और नेपाल की चीनी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
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