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Siddharthnagar News: परिसर की कार्य संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए विद्यार्थी का कार्य व्यवहार

Tue, 13 Aug 2024 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 13 Aug 2024 12:45 AM IST
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Siddharthnagar News: Student's work behavior should be in accordance with the work culture of the campus.
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में सोमवार को कला संकाय एवं विज्ञान संकाय के नव प्रवेशित विद्यार्थियों का परिचय समारोह आयोजित हुआ। इसमें बच्चों को शिक्षण कार्य से जुड़ी कई जानकारियां दी गईं। कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि विद्यार्थी ही सही मायने में शैक्षणिक संस्थानों के एंबेसडर होते हैं। परिसर की कार्य संस्कृति के अनुरूप ही विद्यार्थी का कार्य व्यवहार होना चाहिए। उच्च कोटि के आचरण व्यवहार के माध्यम से विद्यार्थी अपने शिक्षण संस्थानों को उत्कृष्टता प्रदान करने में अत्यंत सहयोगी होते हैं।
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उन्होंने कहा कि अपने संकाय एवं विभाग को निरंतर उत्कृष्ट बनाने के लिए सचेष्ट रहे। ज्ञान के नए अवसर उपलब्ध करने में निरंतर तत्पर रहें। मूल्य आधारित भारत की ज्ञान परंपरा के अनुरूप अध्यापन को आगे बढ़ाया जाना बहुत आवश्यक है। विद्यार्थियों के अंतरमन की प्रसन्नता ही उनके व्यक्तित्व को निखारने में उपयोगी साबित होगी। जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने का सही मार्ग चुनने वाले विद्यार्थी ही निरंतर सफलता की ओर अग्रसर होते हैं। शिक्षण संस्थानों में नवाचार तथा नई योजनाओं को लागू करने का प्रयास लगातार किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों के अंदर अपार क्षमताएं होती हैं, उनके कौशल को पहचानने और निखारने में शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक होती है। संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास के लिए पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ देश समाज के विषय में भी जानकारी आवश्यक है। ज्ञानार्जन में समृद्ध पुस्तकालय बहुत उपयोगी होता है।
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कुलसचिव डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा की नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आज का दिन उनके जीवन में अविस्मरणीय रहना चाहिए। इस प्रकार के कार्यक्रमों से नए विद्यार्थियों का उत्साह वर्धन होता है। उनके अंदर विश्वास की अखण्ड भावना आकार लेती है। कार्यक्रम को कुलानुशासक प्रो. दीपक बाबू ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के साथ-साथ आत्म अनुशासन बहुत आवश्यक है। सामान्य तौर पर यह देखा गया है कि आत्मा अनुशासित विद्यार्थी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होते हैं। विषय प्रस्तावना एवं स्वागत उद्बोधन देते हुए अधिष्ठाता कला संकाय एवं कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर नीता यादव ने कहा कि नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है।
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इस दौरान डॉ. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. अविनाश प्रताप सिंह, डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी, डॉ. मयंक कुशवाहा, डॉ. सरिता सिंह, डॉ. रेनू त्रिपाठी व डॉ. आभा द्विवेदी मौजूद थीं।


कुलपति ने किया पुस्तक लोकार्पण

कुलपति प्रो. कविता शाह की ओर से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में सहायक आचार्य डॉ. हृदय कांत पांडेय की ओर लिखित अंग्रजी विषय की लिटरेरी थ्योरी एंड क्रिटिसिज्म नामक पुस्तक का लोकार्पण किया गया। पुस्तक के विषय में बताते हुए डॉ. हृदय कांत पांडेय ने कहा कि पुस्तक में कई नवाचार सम्मिलित हैं। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए ये पुस्तक बेहद उपयोगी साबित होगी। पुस्तक में समीक्षा के साथ जेसी रैनसम के सत्ता मीमांसा तथा विजय मिश्र एवं वाब हॉज की उत्तर आधुनिकतावाद की भी समीक्षा की गई है।
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