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Siddharthnagar News: सड़कों पर छुट्टा पशुओं का डेरा, रफ्तार का चस्का जानलेवा

Mon, 18 Aug 2025 12:04 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 18 Aug 2025 12:04 AM IST
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Siddharthnagar News: Stray animals are camping on the roads, addiction to speed is fatal
भनवापुर क्षेत्र के बिजौरा में सड़क पर छुट्टा पशु।  - फोटो : संवाद
- बाढ़ और बारिश से ताल और सिवान में भरा पानी, बेठिकाना पशुओं ने सड़कों पर बनाया ठिकाना, बढ़ रहे हैं हादसे फोटाे- है
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सिद्धार्थनगर। हाईवे से गांव-कस्बों की सड़कों तक इन दिनों छुट्टा पशु डेरा जमा रहे हैं और आए दिन हादसे की वजह बन रहे हैं। रात के अंधेरे में तेज रफ्तार वाहन सड़कों पर बैठे और टहलते पशुओं से टकरा रहे हैं। अवैध कट से निकलने वाले छुट्टा पशुओं की वजह से सभी वाहन सवार हादसे के शिकार हो रहे हैं। पिछले सप्ताह ही गोल्हौरा क्षेत्र के बड़हरघाट गांव के पास छुट्टा पशु से टकरा जाने से बाइक सवार एक युवक की मौत हो चुकी है।
बारिश और बाढ़ की वजह से ताल और सिवान में पानी भर जाने के कारण बेठिकाना पशुओं ने सड़कों पर ठिकाना बना लिया है। खेतों और मैदानों से निकलकर ये सड़कों पर आ जा रहे हैं। रविवार की शाम लुंबिनी-ककरहवा मार्ग पर 10 से अधिक पशु बैठे दिखे। वाहन चालक किनारे से होकर निकल रहे थे। तेज हाॅर्न बजाने पर इन पशुओं में कोई हरकत नहीं दिख रही थी। इसी तरह शहर के पुराने नौगढ़ में भी सड़क पर पशु डेरा जमाए दिखे। पांच-छह पशु सड़क पर बैठे हुए थे। इस दौरान वहां से गुजर रहे कस्बे के रहने वाले राजेश, दीपक और जगदीश आदि का कहना था कि रोशनी रहने तक तो गनीमत है, अंधेरे में अचानक पशुओं के सामने आने पर वाहनों का संतुलन बिगड़ने से मुश्किल हो सकती है।पुरानी नौगढ़ के रईस, नितेश और रिजवान ने बताया कि कई बार बाइक चालक गिर जा रहे हैं। उनका कहना था कि रोशनी पड़ने पर केवल पशुओं की आंख चमकती दिखाई पड़ती है। धान की रोपाई और बारिश के बाद शहर की सड़कों पर भी छुट्टा पशु बैठे दिख रहे हैं। वहीं, शहर के सनई चौराहे पर भी कुछ इसी तरह का नजारा दिखा। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब एक महीने से बड़ी संख्या में पशु सड़कोंं पर ही डेरा बनाए हुए हैं और आए दिन हादसे का सबब बन रहे हैं।-------
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ग्रामीण इलाकों में खतरा ज्यादा
शोहरतगढ़ के चिल्हिया, बांसी के गोल्हौरा, इटवा और डुमरियागंज इलाके में छुट्टा पशु सड़क पर ही नजर आते हैं। दिन में खेत में और शाम होते ही सड़क पर इनका कब्जा हो जाता है। इटवा क्षेत्र के रहने वाले राम अशोक ने बताया कि देहात के पशुओं के सड़क पर आने के बाद खतरा और बढ़ जाता है क्योंकि वाहनोंं के आने या हाॅर्न बजाने पर चौंक कर भागते हैं, ऐसे में ये कब गाड़ी से टकरा जाएं इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। जितेंद्र ने कहा कि बारिश में रात में जो भी हादसे सड़कों पर होते हैं इनमें अधिकतर छुट्टा पशुओं की वजह से ही होते हैं।
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हाईवे पर खड़े वाहन भी खतरनाक

जिले के स्टेट और नेशनल हाईवे पर सड़कों पर खड़े वाहनों से भी हादसे का खतरा बना रहता है। बांसी- बस्ती मार्ग पर जगह-जगह सर्विस लेन है, जहां पर ट्रक-लाॅरी आदि बड़े वाहन खड़े करने के लिए जगह बनाई गई है। इसके बावजूद हाईवे पर जगह-जगह बड़े वाहन खड़े देखे जा सकते हैं। इसमें नेपाल बाॅर्डर का बढ़नी इलाका बेहद संवेदनशील है। ढेबरुआ थानाक्षेत्र के बढ़नी एनएच-730 पर नेपाल जाने वाले ट्रकों का सड़क के दोनों किनारों पर जमावड़ा रहता है। भंसार में देरी और वैकल्पिक पार्किंग के अभाव में ट्रक सड़क पर ही खड़े हो रहे हैं। इससे यातायात व्यवस्था तो बाधित हो ही रही है, खतरा भी पैदा हो रहा है।
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रिकॉर्ड में 76 गोशाला, मैदान में छुट्टा पशुओं की भरमार
छुट्टा पशुओं की वजह से बढ़ती समस्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने न्याय पंचायत स्तर पर स्थाई व अस्थाई गोशाला बनाने की कवायद शुरु कराई। जनपद में 76 गोशालाएं बनवाई गईं। शहरी इलाके में नगर पालिका और ग्रामीण इलाके लिए बीडीओ को इसकी व्यवस्था की जिम्मेदारी है। मौजूदा समय में 50 से अधिक गोशालाएं सक्रिय हैं। हालांकि, लोगों का कहना है कि अधिकतर गोशालाओं में पशुओं की संख्या कम ही हैं। बारिश के बाद अधिकांश स्थानों पर पशुओं को छोड़ दिया गया। इसीलिए सड़कों पर पशु नजर आने लगे हैं। डुमरियागंज में स्थित कान्हा गौशाला में 85 गोवंश रखे गए हैं। गोशाला में देखभाल के लिए नगर पंचायत कर्मचारियों की तैनाती की गई है। 20 गोवंश को नगर के लोगों को सुपुर्द कर दिया गया है। गोशाला में मौजूद गोवंश की देखभाल के लिए नगर पंचायत एक सुपरवाइजर समेत छह कर्मचारियों की तैनाती की है लेकिन रविवार को मौके पर सिर्फ तीन कर्मचारी ही मौजूद मिले।

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000बोले जिम्मेदार
छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए ईओ और बीडीओ को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अगर सड़क पर पशु पहुंच रहे हैं तो उन्हें पकड़वा कर गोशाला में संरक्षित करवाया जाएगा।
- गौरव श्रीवास्तव, एडीएम
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