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Siddharthnagar News: लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को अस्थिर कर रहा है सोशल मीडिया निर्मित इको चेंबर
Sat, 31 Jan 2026 11:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 31 Jan 2026 11:53 PM IST
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पकड़ी के पास स्थित नर्सिंग कॉलेज पर आयोजित गोष्ठी में उपस्थित प्रोफेसर। स्रोत विज्ञप्ति
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सिद्धार्थनगर। दक्षेस के अधिकांश देश डिजिटल लोकतंत्र के इको चैंबर की समस्या से जूझ रहे हैं। दक्षिण एशिया में जिस डिजिटल लोकतंत्र की चर्चा की जा रही है, उसके दुष्प्रभाव गंभीर हैं। सोशल मीडिया द्वारा निर्मित इको चैंबर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को अस्थिर कर रहा है।
यह विचार मुख्य अतिथि प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने शहर के पकड़ी स्थित नर्सिंग कॉलेज में आयोजित दक्षिण एशिया में लोकतंत्र : गहराता संकट, भारत की भूमिका-चुनौतियां और संभावनाएं, विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में व्यक्त किए।
प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कहा कि नेपाल और श्रीलंका में युवाओं के उन्माद के कारण सरकारों का अचानक गिरना लोकतंत्र का नया स्वरूप नहीं बल्कि सोशल मीडिया जनित सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि लोग एक जैसी विचारधारा को देखकर उसी के गुलाम बन जाते हैं, जिससे निष्पक्ष विश्लेषण की क्षमता समाप्त हो जाती है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन भी सोशल मीडिया के दुरुपयोग का ही उदाहरण है।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा एवं स्ट्रैटेजिक स्टडीज विभाग के प्रो. विनोद सिंह ने लोकतंत्र के चार स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया की व्याख्या करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में इन सभी संस्थानों के स्तर पर लोकतांत्रिक संकट स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. सतीश द्विवेदी ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक जड़ें बेहद मजबूत हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया से उपजा उन्माद भारत में कभी उग्र जनांदोलन का रूप नहीं ले सका।
सेमिनार की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए प्रो. शक्ति जायसवाल ने बताया कि संगोष्ठी में चार तकनीकी सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किए गए।
अंत में प्राचार्य प्रो. अभय कुमार श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए बुद्ध विद्यापीठ पीजी कॉलेज के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। समापन सत्र का मंच संचालन प्रो. डॉ. रत्नाकर पांडेय ने किया।
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यह विचार मुख्य अतिथि प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने शहर के पकड़ी स्थित नर्सिंग कॉलेज में आयोजित दक्षिण एशिया में लोकतंत्र : गहराता संकट, भारत की भूमिका-चुनौतियां और संभावनाएं, विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में व्यक्त किए।
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प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कहा कि नेपाल और श्रीलंका में युवाओं के उन्माद के कारण सरकारों का अचानक गिरना लोकतंत्र का नया स्वरूप नहीं बल्कि सोशल मीडिया जनित सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि लोग एक जैसी विचारधारा को देखकर उसी के गुलाम बन जाते हैं, जिससे निष्पक्ष विश्लेषण की क्षमता समाप्त हो जाती है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन भी सोशल मीडिया के दुरुपयोग का ही उदाहरण है।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा एवं स्ट्रैटेजिक स्टडीज विभाग के प्रो. विनोद सिंह ने लोकतंत्र के चार स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया की व्याख्या करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में इन सभी संस्थानों के स्तर पर लोकतांत्रिक संकट स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. सतीश द्विवेदी ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक जड़ें बेहद मजबूत हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया से उपजा उन्माद भारत में कभी उग्र जनांदोलन का रूप नहीं ले सका।
सेमिनार की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए प्रो. शक्ति जायसवाल ने बताया कि संगोष्ठी में चार तकनीकी सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किए गए।
अंत में प्राचार्य प्रो. अभय कुमार श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए बुद्ध विद्यापीठ पीजी कॉलेज के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। समापन सत्र का मंच संचालन प्रो. डॉ. रत्नाकर पांडेय ने किया।