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Siddharthnagar News: नेपाल में लहलहा रही तस्करी की फसल.. किसान झेल रहे अकाल

Wed, 12 Nov 2025 10:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 12 Nov 2025 10:53 PM IST
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Siddharthnagar News : Smuggled crops are flourishing in Nepal
नेपाल स्थित सुठौली भंसार कार्यालय में जमा बरामद भारतीय यूरिया खाद। फाइल फोटो
सिद्धार्थनगर। जिले में एक ओर समितियों पर किसान एक-एक बोरी यूरिया के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सीमा से सटे नेपाल क्षेत्र में भारतीय खाद खुलेआम बेची जा रही है। लगातार खाद की खेप बॉर्डर पार पहुंच रही है, लेकिन जिम्मेदार सिर्फ हाथ मलते रह जा रहे हैं।
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कामयाबी भी मिल रही है तो सिर्फ 10-20 बोरी खाद। इसमें भी तस्कर हत्थे नहीं चढ़ रहे हैं, जिससे इनकी जड़ों तक पहुंचने का मौका भी नहीं मिल पा रहा है।
सीमा से सटे नेपाल में मंगलवार को 220 बोरी भारतीय यूरिया की खेप की बरामदगी की गई। इससे इसकी पुष्टि हो गई है कि खाद की तस्करी में पूरा चैनल कम कर रहा है। पूरा सिंडिकेट किसानों की कमर तोड़ने में लगा है। यूरिया की मांग अभी कम है, जिससे तस्कर पहले ही खाद लेकर इसे बॉर्डर पार पहुंचा दे रहे हैं, जिसका खामियाजा बाद में किसानों को भुगतना पड़ेगा।
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अभी भी एक-एक बोरी के लिए किसान लाइन लगाने को विवश हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह खेल केवल पिकअप या बाइक से नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क के जरिये किया जा रहा है, जिसमें कुछ जिसमें सीमावर्ती इलाके के दुकानदार, कुछ समिति वाले और विभागीय कर्मचारी भी शामिल हैं। लगातार बॉर्डर पर खाद पकड़े जाने के बाद भी इस पर विराम लगाने में संबंधित विभाग और प्रशासन नाकाम दिख रहा है।
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कैसे बॉर्डर पार जा रही है खाद : जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। अमूमन खास से लेकर के राशन और कपड़ा आदि की तस्करी होती है। समय और देश में अधिक मांग के अनुसार तस्करी का ट्रेंड बदलता है। हर काम के लिए अलग-अलग तस्कर हैं और उनके अलग-अलग नेटवर्क संचालित होता है। जो बाकायदा एक सिंडिकेट के जरिये इस संगठित अपराध को अंजाम देते हैं।
जैसे कि मौजूदा समय में गेहूं की बुवाई और 10 दिन बाद सिंचाई के बाद यूरिया की मांग बढ़ने वाली है। नेपाल में खाद के दाम महंगे हैं चीन से आने वाली खाद की कीमत बहुत अधिक है जबकि भारतीय मूल्य से भी खाद महंगी पड़ती है। इसकी कमी तस्कर पूरी करते हैं जो सीजन शुरू होते ही बॉर्डर पर करने का काम शुरू कर देते हैं।
बॉर्डर से जुड़े सूत्रों के अनुसार सीमा से सटे कई गांवों में रात के समय छोटे-छोटे वाहनों और पिकअप से खाद की बोरियां नेपाल पार कराई जाती हैं। हर बोरी पर 200 रुपये से 250 रुपये का अतिरिक्त मुनाफा लेकर यह खाद वहां के बाजारों में 900 से 1000 प्रति बोरी तक बेची जा रही है। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क में स्थानीय दलालों के साथ कुछ निजी दुकान वाले जो सीमावर्ती इलाके के हैं। इसमें कुछ समिति कर्मी भी शामिल हैं। जो किसानों के नाम पर खाद की एंट्री दिखाकर तस्करों को बेच देते हैं।
सीमावर्ती इलाके के खुनुवां क्षेत्र के नसीम अहमद में बताया कि खेल पहले से तैयार रहता है। इसमें जो लोकल के किसान खाद के लिए जाते हैं उनका आदर और खतौनी दुकानदार या समिति के पास होता है। समिति पर तो बहुत कम लेकिन निजी दुकानों पर अक्सर ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां दो बोरी खाद लेने वाले किसानों के नाम पर 10 से 12 बोरी एंट्री कर दी गई। इसमें बाकायदा उसका हस्ताक्षर रहता है, लेकिन उसे नहीं पता रहता है कि कितनी खाद उसके नाम से खारिज हुई है। इसी का फायदा उठाकर तस्कर मालामाल हो रहे हैं। किसानों का सत्यापन स्थानीय स्तर पर नहीं होता है। किस-किस ने कितनी खाद खरीदी है, इसका आंकड़ा विभाग के पास नहीं रहता है।
तस्करी का असली काला खेल इसके बाद शुरू होता है। धान खेत में पड़ा रहता है तभी डीएपी की तस्करी हो शुरू हो जाती है। जब तक कटाई होकर बुवाई की बात आती है और सिंचाई का सीजन आने वाला होता है तब तक यूरिया का खेप नेपाल में पहुंचने का काम शुरू हो जाता है। इसमें पूरा सिस्टम काम करता है। दो बोरी 10 बोरी वालों को कभी कभार पकड़ लिया जाता है जबकि बड़ी खेप आसानी से बॉर्डर पर हो जाता है। वहीं, बढ़नी क्षेत्र के रामविलास ने बताया कि कभी-कभी पिकअप गाड़ी भी पकड़ी जाती है। लेकिन वह शर्ट के हिसाब से हो जाती है। जब 20 गाड़ी 25 गाड़ी पर हो जाता है तो यह गाड़ी पकड़ कर दिखाया जाता है और हो जाता है की बड़ी कार्रवाई हो गई।
वहीं समितियां की बात करें तो जिले के लोटन, बढ़नी क्षेत्र और जोगिया ब्लाॅक क्षेत्र के समितियां पर खाद के लिए किसान परेशान है। कहीं डीएपी नहीं है तो कहीं उड़िया नहीं है। कुछ खाद उपलब्ध है, जिन्हें लोग लेना वाजिब नहीं समझ रहे हैं। उनका कहना है कि 20-20-0-13 या फिर अन्य खाद काम नहीं करता है। डीएपी और यूरिया यहां की मुख्य खाद है।
उसकी उपलब्धता भरपूर मात्रा में होनी चाहिए। किसानों का कहना था कि प्राइवेट पर 1400 की डीएपी के 16 से 1700 रुपये ले लिए जाते हैं जबकि यूरिया 380 से 420 रुपये तक वसूला जाता है। किसान रामदेव ने बताया कि धान कट गया है। गेहूं की बुवाई करनी है लेकिन खाद नहीं है। निजी दुकानों पर डीएपी ढाई से 300 रुपये प्रति बोरी महंगा मिल रहा है जबकि डेढ़ सौ रुपये बोरी तक की यूरिया अधिक ले रहे हैं।

वहीं, जोगिया क्षेत्र के किसान प्रभु यादव ने बताया कि मांग को देखते हुए समितियां पर भारी मात्रा में सप्लाई होनी चाहिए, जिससे किसानों की किल्लत दूर हो जाए। समितियां पर पर्याप्त मात्रा में खाद मिलेगी तो निजी दुकानदार भी अधिक दम नहीं वसूल पाएंगे। कुछ ही मुनाफा लेंगे। इस पर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
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