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Siddharthnagar News: डाॅक्टरों और दवाओं की कमी... आयुर्वेद अस्पताल को इलाज की दरकार

Mon, 17 Nov 2025 11:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 17 Nov 2025 11:13 PM IST
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Siddharthnagar News : Shortage of doctors and medicines... Ayurveda hospital needs treatment
भनवापुर क्षेत्र के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल मल्हवार में मरीज देखते फार्मासिस्ट सच्चिदानंद पांड
- भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के छह अस्पतालों में केवल दो डाॅक्टरों की है तैनाती
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भनवापुर। इलाज की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की तरफ लोग पिछले कुछ वर्षों से लौट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण भनवापुर में सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। यहां खुद अस्पताल को ही इलाज की दरकार है। ब्लाॅक क्षेत्र में छह अस्पतालों में केवल दो ही डाॅक्टरों कि तैनाती है। इतना ही नहीं इन जगहों पर जीवन रक्षक दवाओं की भी काफी कमी है, जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को चूरन देकर वापस कर दिया जाता है।
ब्लाॅक क्षेत्र में राजकीय आयुर्वेद अस्पताल सिकटा, जूड़ीकुइयां, रमवापुर जगतराम, मल्हवार, सोहना और फत्तेपुर में संचालित हो रहा है। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल रमवापुर जगतराम और सोहना में ही डाॅक्टरों की तैनाती की गई है बाकी अस्पतालों का संचालन फार्मासिस्ट के सहारे किया जा रहा है। इन अस्पतालों में दवाओं का भी अभाव है, जहां केवल चूरन के अलावा कोई दवाएं उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में रिष्ठ, आसव, सिरप, अवलेह, च्यवनप्राश, काढ़ा आदि की कमी है। आयुर्वेद अस्पताल में दवाओं की कमी के कारण मरीजों को प्राइवेट मेडिकल स्टोर से ही आयुर्वेदिक दवाएं खरीदनी पड़ती है।
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पिछले एक सप्ताह से बुखार खांसी से परेशान हैं। इलाज के लिए मल्हवार आयुर्वेदिक अस्पताल पर आए हैं, जहां मौजूद फार्मासिस्ट सच्चिदानंद पांडेय ने जांच कर कुछ चूरन देकर बाकी दवा बाहर से लेने का सलाह दी है।
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- सीताराम, लोहरौला
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जब अंग्रेजी दवाओं से सही नहीं हुआ तो आयुर्वेद अस्पताल में दवा के लिए आया था। खांसी, बुखार के साथ ही पाइल्स के मामले में आयुर्वेदिक दवाएं बेहतर काम करती है। इसकी जानकारी पर मल्हवार अस्पताल पर आया, जहां जरूरी दवाएं नहीं है।

- सूरज, पलेशर


ढाई माह से शासन स्तर पर दवाओं के मांग की फाइल रुकी हुई है। इसलिए दवाओं की कमी है। शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद ही दवाएं उपलब्ध हो पाएंगी।
- डॉ. विजय बहादुर, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी
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