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Siddharthnagar News: नारद मोह के मंचन के साथ रामलीला का हुआ शुभारंभ
Tue, 23 Sep 2025 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 23 Sep 2025 11:33 PM IST
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भनवापुर क्षेत्र के गोपिया में आयोजित श्रीरामलीला में शिव की झांकी। स्रोत विज्ञप्ति
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भनवापुर। स्थानीय ब्लाॅक क्षेत्र के गोपिया गांव में 10 दिवसीय रामलीला कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार की रात किया गया। प्रथम रात्रि स्थानीय कलाकारों ने शिव की भव्य झांकी से रामलीला का शुभारंभ किया गया।
ब्रह्मदेव मंदिर पर स्वतंत्र जन सेवा समिति और दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला में कलाकारों की ओर से दिखाया गया कि नारद तपस्या करने बैठ जाते हैं, जिसके कारण राजा इंद्र का सिंहासन हिलने लगता है। इंद्र, नारद की तपस्या भंग करने के लिए अपने सेवकों और परियों को भेजते हैं, लेकिन कोई भी कामयाब नहीं होता है। अंत में कामदेव नारद की तपस्या को भंग करने के लिए जाते हैं, लेकिन वह भी तपस्या भंग नहीं कर पाते हैं। इसी बात का नारद जी को घमंड हो जाता है और वह बारी-बारी से भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शंकर से कहते हैं कि हमने कामदेव को जीत लिया है। भगवान विष्णु उनके घमंड को दूर करने के लिए नारद के कहने पर हरि अर्थात बंदर का स्वरूप दे देते हैं, जैसे ही नारद उस रूप को लेकर राजा शील निधि की पुत्री के स्वयंवर में पहुंचते हैं वहां उनका उपहास होने लगता है और इस तरह नारद का घमंड चूर-चूर हो जाता है।
इस दौरान सुशील पांडेय, मनीष पांडेय, लवकुश यादव, विजय यादव, शिव कुमार मौजूद रहे।ए
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ब्रह्मदेव मंदिर पर स्वतंत्र जन सेवा समिति और दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला में कलाकारों की ओर से दिखाया गया कि नारद तपस्या करने बैठ जाते हैं, जिसके कारण राजा इंद्र का सिंहासन हिलने लगता है। इंद्र, नारद की तपस्या भंग करने के लिए अपने सेवकों और परियों को भेजते हैं, लेकिन कोई भी कामयाब नहीं होता है। अंत में कामदेव नारद की तपस्या को भंग करने के लिए जाते हैं, लेकिन वह भी तपस्या भंग नहीं कर पाते हैं। इसी बात का नारद जी को घमंड हो जाता है और वह बारी-बारी से भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शंकर से कहते हैं कि हमने कामदेव को जीत लिया है। भगवान विष्णु उनके घमंड को दूर करने के लिए नारद के कहने पर हरि अर्थात बंदर का स्वरूप दे देते हैं, जैसे ही नारद उस रूप को लेकर राजा शील निधि की पुत्री के स्वयंवर में पहुंचते हैं वहां उनका उपहास होने लगता है और इस तरह नारद का घमंड चूर-चूर हो जाता है।
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इस दौरान सुशील पांडेय, मनीष पांडेय, लवकुश यादव, विजय यादव, शिव कुमार मौजूद रहे।ए