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Siddharthnagar News: बीएचटी न डॉक्टर का हस्ताक्षर... हालत बिगड़ी तो बिना रेफर किए छोड़ दिया

Tue, 23 Sep 2025 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 23 Sep 2025 11:58 PM IST
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Siddharthnagar News: Neither BHT nor doctor's signature... when the condition worsened, he was left without referral
- प्रशासनिक टीम की जांच में सामने आई लापरवाही, जिस कागज पर हस्ताक्षर कराया, उसका पता नहीं
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- बीएचटी पर डॉक्टर का हस्ताक्षर और डिलीवरी करने की रिपोर्ट नहीं, हालत बिगड़ी तो कर दिया

सिद्धार्थनगर। प्रसूता सरिता को कदम कदम पर मारा गया। हर कदम पर लापरवाही हुई। मेडिकल कॉलेज में सिस्टम में बैठे लोगों ने गैर जिम्मेदाराना कार्य करते हुए बिना स्वास्थ्य परीक्षण किए ही आठ दिन बाद आने के लिए कहते हुए पल्ला झाड़ लिया। वहीं, जिदंगी बचाने के लिए आगे बढ़े तो मरीज माफिया की गिरफ्त में आ गए, जिन्होंने 99.1 प्रतिशत बेहतर इलाज का दावा करके उन्हें फंसाया और रुपये लेने के बाद हालात बिगड़ने पर छोड़ दिया।
जांच में भर्ती की शीट नहीं मिली। जो केस शीट मिली उसपर रेफर करने वाले डॉक्टर का हस्ताक्षर नहीं है। बस जब हालात काबू से बाहर हुए तो उन्होंने प्रसूता को मरने के लिए छोड़ दिया गया। प्रशासन की ओर से गठित टीम की जांच में यह संवेदनहीनता सामने आई है। ऐसी अनेकों सरिता, अनीता सिस्टम की लापरवाही, लाचारी और मरीज माफियों की सेंधमारी से बसने से पहले दुनिया छोड़कर चली जा रही हैं।
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जांच और बयान से यह भी स्पष्ट है कि मेडिकल काॅलेज में हेल्प डेस्क पर कार्यरत कंचन पटेल आरके सेवा चिकित्सालय के प्रबंधक आदित्य पटेल की चचेरी बहन हैं। ऐसी परिस्थिति में इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि मेडिकल काॅलेज में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आरके सेवा चिकित्सालय में मरीजों को बिना किसी मेडिकल कॉलेज के डाॅक्टर के लिखित रेफरल के भर्ती करा दिया गया। शिकायतकर्ता की ओर से जांच टीम को उपलब्ध कराए गए वीडियो से इसकी पुष्टि भी हुई है।
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मेडिकल कॉलेज में जांच न परीक्षण, भेज दिया

शिकायतकर्ता सुकई मौर्या ने आरोप लगाने के साथ जांच टीम को बयान दिया। इसमें मेडिकल काॅलेज सिद्धार्थनगर के चिकित्सक, स्टाफ की ओर से बिना चिकित्सीय परीक्षण किए ही उसको भर्ती किए जाने से मना करने की बात सामने आई है। इसकी वजह से मृतका के परिजनों को प्राइवेट चिकित्सालय में उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके लिए संबंधित कार्मिक की जवाबदेही तय करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
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जांच में हर कदम पर मिली लापरवाहीमरीजों को भर्ती करने और रेफर के लिए बेड हेड टिकट (बीएचटी) बनता है। इसमें रेफर करने के दौरान डॉक्टर का हस्ताक्षर होता है और रेफर के पीछे कारण लिखना होता है जबकि, जांच में केस शीट में मृतका के परिजनों के निशान अंगूठा लिया गया है, लेकिन पृष्ठों पर केस शीट अधूरी है। केस शीट में संलग्न ब्लड रिपोर्ट का अवलोकन किया गया, जिसमें ब्लड 13.7 और प्लेटलेट 1.45 लाख थी। केस शीट के अवलोकन से मरीज की सभी जांच सामान्य प्रतीत होती है। केस शीट पर अन्य हाॅस्पिटल में रेफर करने का अंकन नहीं पाया गया और न ही किसी भी डाॅक्टर का हस्ताक्षर पाया गया है, जिससे स्पष्ट हो सके किसने डिलीवरी कराई है।

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निष्कर्ष में सामने आई सच्चाई, मरने के लिए छोड़ दिया
टीम की जांच बयान, स्थलीय और अभिलेखीय निरीक्षण से जांच समिति से स्पष्ट किया कि डिलीवरी के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सालय में मौजूद नहीं थे। केस शीट को नियम संगत तरीके से भरे बिना ही परिजनों के अंगूठे लगवा लिए गए। परिस्थिति बेकाबू होने पर बिना लिखित रूप में रेफर किए ही आनन-फानन में मरीज को उसकी परिस्थिति पर अमानवीय तरीके से छोड़ दिया गया। स्थलीय निरीक्षण में ओटी में टेबल के नीचे अत्यधिक मात्रा में खून गिरा पाया गया। वहीं मरीज में खून की बहुत अधिक कमी पाई गई जो प्रसव को मैनेज न करने पाने के कारण हुई। जांच टीम ने इसके के कारण मरीज की मौत होने की आशंका जताई है। इसमें चिकित्सालय की गंभीर लापरवाही माना है।
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