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Siddharthnagar News: एसआईआर प्रक्रिया में फंसी नेपाल मूल की बहुएं, 15 हजार को नोटिस

Mon, 02 Feb 2026 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 02 Feb 2026 12:25 AM IST
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Siddharthnagar News : Multiple Nepal origin hung in SIR process, 15,000 notice
- 25 साल से करती आ रहीं हैं मतदान, अब मिला नोटिस
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सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल के पारंपरिक रोटी-बेटी संबंधों के कारण नेपाल मूल की हजारों महिलाएं वर्षों से यहां रहकर मतदान करती आ रही हैं, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लागू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत अब करीब 15 हजार नेपाली मूल की बहुएं मतदाता सूची से बाहर होने की आशंका से जूझ रही हैं।

निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना और विदेशी नागरिकों के नाम हटाना है। इसी प्रक्रिया के तहत नेपाल में जन्मी बहुओं को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस मिलने के बाद इन महिलाओं से उनके माता-पिता की भूमि से जुड़े दस्तावेज और नागरिकता प्रमाण मांगे जा रहे हैं, जिससे वे लगातार तहसील और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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सबसे अधिक कठिनाई 1987 के बाद जन्मी बहुओं को हो रही है, जिनके पास नेपाल से जुड़े पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि भारत में किसी भी विदेशी नागरिक को मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता। नेपाल मूल की बहुओं के संबंध में अभी निर्वाचन आयोग से कोई अलग दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इसी कारण नोटिस के बाद उनके नाम पेंडिंग सूची में रखे जा रहे हैं।
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गांव स्तर पर बढ़ी परेशानी
- कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र के ग्राम अहिरौली में ही आठ नेपाली मूल की बहुएं हैं, जिन्हें एसआईआर के दूसरे चरण में नोटिस मिला है। इन महिलाओं की सुनवाई 28 जनवरी 2025 को निर्धारित की गई थी। महिलाएं अपना और अपने पति का आधार कार्ड लेकर कृषि भवन पहुंचीं, लेकिन कई के नाम अब तक परिवार रजिस्टर की नकल में दर्ज नहीं हो सके। इससे उनकी मतदाता सूची में स्थिति पेंडिंग बनी हुई है।
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हमारा क्या कसूर
- पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे वर्षों से भारत में रह रही हैं और लोकसभा सहित कई चुनावों में मतदान कर चुकी हैं। अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नोटिस मिलने से उनके वोटिंग अधिकार पर संकट खड़ा हो गया है।
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पूनम पांडेय (अहिरौली) ने कहा, संविधान ने हमें मतदान का अधिकार दिया है। हमारे परिजनों ने रोटी-बेटी के रिश्ते के तहत यहां शादी की थी। अब एसआईआर प्रक्रिया ने सब कुछ जटिल बना दिया है।

कुसुम देवी ने बताया, लोकसभा चुनाव में वोट दिया था। अब नोटिस भेजकर हमें मतदान से वंचित किया जा रहा है जबकि मांगे गए दस्तावेज देने के बाद भी नाम पेंडिंग रखा जा रहा है।


अनीता यादव ने सरकार और निर्वाचन आयोग से अपील की कि भारत-नेपाल के पारंपरिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए नेपाली बहुओं को एसआईआर में राहत दी जाए।

वहीं किरन देवी ने कहा, 25 वर्षों से मतदान कर रही हूं। अब नोटिस देकर हमें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। यह दोनों देशों के रिश्तों में भी बाधा बन सकता है।
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