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Siddharthnagar News: राखी का धागा, रिश्तों का सफर, बहनों के कदमों से गुलजार हुआ बाजार
Fri, 28 Aug 2026 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 28 Aug 2026 12:04 AM IST
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सिद्धार्थनगर रोड़वेल पर बस में चढ़ती महिलाएं। संवाद
- फोटो : टूंडला के स्टेशन रोड पर बरसात के दौरान गुजरते वाहन संवाद
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- बस अड्डे से बाजार तक दिखी त्योहार की रौनक, 66 बसें लगाई गईं, मुफ्त यात्रा से महिलाओं को राहत
सिद्धार्थनगर। सुबह की पहली बस से लेकर देर शाम तक बाजारों में उमड़ती भीड़ तक, रक्षाबंधन ने जिले को रिश्तों की आवाजाही से रंग दिया। कोई बहन दूर शहर से मायके लौटी तो कोई भाई बहन के घर पहुंचने की तैयारी में दिखा। हाथ में राखी, मिठाई का डिब्बा और अपनों से मिलने की खुशी लिए बस अड्डों से लेकर बाजार तक शुक्रवार को त्योहार की रौनक छाई रही। इस बार महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा ने सफर कुछ आसान किया लेकिन राखी, मिठाई और उपहारों की बढ़ती कीमतों ने त्योहार का बजट बढ़ा दिया।
रक्षाबंधन पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए सिद्धार्थनगर डिपो की ओर से 66 बसें लगाई गई हैं। बसों के फेरे भी बढ़ाए गए हैं ताकि दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी न हो। गोरखपुर, बस्ती, लखनऊ समेत दूसरे शहरों में रहने वाले भाई-बहनों के भी त्योहार पर घर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। बांसी, शोहरतगढ़, इटवा, डुमरियागंज, बढ़नी आदि से भी एसी तरह गहमागहमी देखी गई।
सिद्धार्थनगर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक बीके गंगवार ने बताया कि रक्षाबंधन को देखते हुए यात्रियों की सुविधा के लिए 66 बसें लगाई गई हैं। जरूरत के अनुसार बसों के फेरे बढ़ाए जा रहे हैं ताकि यात्रियों को आवागमन में परेशानी न हो। महिलाओं को सरकार की मुफ्त यात्रा सुविधा का लाभ भी मिल रहा है।
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कलाई पर राखी, हाथ में खरीदारी का थैला
- त्योहार की आहट बाजार में भी साफ दिखाई दी। राखी की दुकानों पर बहनों और बच्चों की पसंद के मुताबिक अलग-अलग डिजाइन उपलब्ध रहे। दुकानदार संजय कसौधन, अनिल कसौधन आदि ने बताया कि पारंपरिक राखियों के साथ कार्टून, लाइट और आकर्षक डिजाइन वाली राखियों की मांग रही। भाई बहन के लिए कपड़े, घड़ी, कॉस्मेटिक्स, मोबाइल एक्सेसरीज और अन्य उपहार खरीदते नजर आए।
मिठाई की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी रही। व्यापारियों के मुताबिक रक्षाबंधन पर सिर्फ राखी की बिक्री नहीं बढ़ती बल्कि मिठाई, कपड़े, गिफ्ट और अन्य सामान का कारोबार भी तेज हो जाता है। कलाई पर बंधने वाला कुछ इंच का धागा बाजार के कई कारोबार को रफ्तार देता है।
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राखी की थाली का बजट बढ़ा
- इस बार त्योहार की मिठास पर महंगाई का असर भी दिखा। मिठाई के दाम बढ़ने से सामान्य परिवार का बजट बढ़ गया है। छेना और लालमोहन करीब 400 से बढ़कर 460 रुपये किलो, बर्फी 400 से 500, सोनपापड़ी 500 से 620 और काजू बर्फी 1200 से 1260 रुपये किलो तक पहुंच गई है। राखी, आधा से एक किलो मिठाई और सामान्य उपहार को जोड़ें तो एक परिवार का खर्च आसानी से 500 से 1000 रुपये तक पहुंच रहा है। बेहतर उपहार और महंगी मिठाई लेने पर यही बजट 1500 से 2000 रुपये या उससे अधिक हो जाता है। हालांकि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा ने आने-जाने के खर्च का बोझ जरूर कम किया।
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मिठाई में मिठास के साथ सावधानी भी जरूरी
- रक्षाबंधन पर मिठाई की मांग बढ़ने के साथ मिलावट का खतरा भी रहता है। ग्राहकों को चमकदार रंग, असामान्य गंध या बहुत सस्ती मिठाई खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। पैक्ड मिठाई लेते समय निर्माण और उपयोग की तारीख जरूर देखें। दुकानदार से बिल लेना भी जरूरी है। त्योहार को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से भी नमूना जांच और कार्रवाई की जा रही है।
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सरहद के आर-पार भी बंधेगा रिश्तों का धागा
- सिद्धार्थनगर की खासियत यह भी है कि यहां रक्षाबंधन का रिश्ता भारत-नेपाल सीमा तक पहुंचता है। सीमा से सटे गांवों में कई परिवारों के रिश्तेदार नेपाल में हैं तो कई परिवारों की रिश्तेदारी भारतीय क्षेत्र में है। त्योहार पर होने वाली आवाजाही इन परिवारों के लिए खास मायने रखती है। सीमा भले दो देशों को अलग करती हो लेकिन भाई-बहन के रिश्ते का धागा दूरी और सरहद दोनों से आगे निकल जाता है।
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आज बस अड्डे से बाजार तक दिखी रौनक
- रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही बस अड्डों पर यात्रियों की भीड़ रही। बाजारों में राखी, गिफ्ट और मिठाई की खरीदारी चलती रही। किसी के हाथ में मायके के लिए राखी थी तो किसी के हाथ में भाई के लिए उपहार। सफर कितना भी लंबा हो और खर्च कितना भी बढ़ जाए, भाई की कलाई तक पहुंचकर राखी बांधने की खुशी के सामने बाकी हिसाब छोटा पड़ गया।
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सिद्धार्थनगर। सुबह की पहली बस से लेकर देर शाम तक बाजारों में उमड़ती भीड़ तक, रक्षाबंधन ने जिले को रिश्तों की आवाजाही से रंग दिया। कोई बहन दूर शहर से मायके लौटी तो कोई भाई बहन के घर पहुंचने की तैयारी में दिखा। हाथ में राखी, मिठाई का डिब्बा और अपनों से मिलने की खुशी लिए बस अड्डों से लेकर बाजार तक शुक्रवार को त्योहार की रौनक छाई रही। इस बार महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा ने सफर कुछ आसान किया लेकिन राखी, मिठाई और उपहारों की बढ़ती कीमतों ने त्योहार का बजट बढ़ा दिया।
रक्षाबंधन पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए सिद्धार्थनगर डिपो की ओर से 66 बसें लगाई गई हैं। बसों के फेरे भी बढ़ाए गए हैं ताकि दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी न हो। गोरखपुर, बस्ती, लखनऊ समेत दूसरे शहरों में रहने वाले भाई-बहनों के भी त्योहार पर घर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। बांसी, शोहरतगढ़, इटवा, डुमरियागंज, बढ़नी आदि से भी एसी तरह गहमागहमी देखी गई।
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सिद्धार्थनगर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक बीके गंगवार ने बताया कि रक्षाबंधन को देखते हुए यात्रियों की सुविधा के लिए 66 बसें लगाई गई हैं। जरूरत के अनुसार बसों के फेरे बढ़ाए जा रहे हैं ताकि यात्रियों को आवागमन में परेशानी न हो। महिलाओं को सरकार की मुफ्त यात्रा सुविधा का लाभ भी मिल रहा है।
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कलाई पर राखी, हाथ में खरीदारी का थैला
- त्योहार की आहट बाजार में भी साफ दिखाई दी। राखी की दुकानों पर बहनों और बच्चों की पसंद के मुताबिक अलग-अलग डिजाइन उपलब्ध रहे। दुकानदार संजय कसौधन, अनिल कसौधन आदि ने बताया कि पारंपरिक राखियों के साथ कार्टून, लाइट और आकर्षक डिजाइन वाली राखियों की मांग रही। भाई बहन के लिए कपड़े, घड़ी, कॉस्मेटिक्स, मोबाइल एक्सेसरीज और अन्य उपहार खरीदते नजर आए।
मिठाई की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी रही। व्यापारियों के मुताबिक रक्षाबंधन पर सिर्फ राखी की बिक्री नहीं बढ़ती बल्कि मिठाई, कपड़े, गिफ्ट और अन्य सामान का कारोबार भी तेज हो जाता है। कलाई पर बंधने वाला कुछ इंच का धागा बाजार के कई कारोबार को रफ्तार देता है।
राखी की थाली का बजट बढ़ा
- इस बार त्योहार की मिठास पर महंगाई का असर भी दिखा। मिठाई के दाम बढ़ने से सामान्य परिवार का बजट बढ़ गया है। छेना और लालमोहन करीब 400 से बढ़कर 460 रुपये किलो, बर्फी 400 से 500, सोनपापड़ी 500 से 620 और काजू बर्फी 1200 से 1260 रुपये किलो तक पहुंच गई है। राखी, आधा से एक किलो मिठाई और सामान्य उपहार को जोड़ें तो एक परिवार का खर्च आसानी से 500 से 1000 रुपये तक पहुंच रहा है। बेहतर उपहार और महंगी मिठाई लेने पर यही बजट 1500 से 2000 रुपये या उससे अधिक हो जाता है। हालांकि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा ने आने-जाने के खर्च का बोझ जरूर कम किया।
मिठाई में मिठास के साथ सावधानी भी जरूरी
- रक्षाबंधन पर मिठाई की मांग बढ़ने के साथ मिलावट का खतरा भी रहता है। ग्राहकों को चमकदार रंग, असामान्य गंध या बहुत सस्ती मिठाई खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। पैक्ड मिठाई लेते समय निर्माण और उपयोग की तारीख जरूर देखें। दुकानदार से बिल लेना भी जरूरी है। त्योहार को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से भी नमूना जांच और कार्रवाई की जा रही है।
सरहद के आर-पार भी बंधेगा रिश्तों का धागा
- सिद्धार्थनगर की खासियत यह भी है कि यहां रक्षाबंधन का रिश्ता भारत-नेपाल सीमा तक पहुंचता है। सीमा से सटे गांवों में कई परिवारों के रिश्तेदार नेपाल में हैं तो कई परिवारों की रिश्तेदारी भारतीय क्षेत्र में है। त्योहार पर होने वाली आवाजाही इन परिवारों के लिए खास मायने रखती है। सीमा भले दो देशों को अलग करती हो लेकिन भाई-बहन के रिश्ते का धागा दूरी और सरहद दोनों से आगे निकल जाता है।
आज बस अड्डे से बाजार तक दिखी रौनक
- रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही बस अड्डों पर यात्रियों की भीड़ रही। बाजारों में राखी, गिफ्ट और मिठाई की खरीदारी चलती रही। किसी के हाथ में मायके के लिए राखी थी तो किसी के हाथ में भाई के लिए उपहार। सफर कितना भी लंबा हो और खर्च कितना भी बढ़ जाए, भाई की कलाई तक पहुंचकर राखी बांधने की खुशी के सामने बाकी हिसाब छोटा पड़ गया।