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Siddharthnagar News: राजकीय महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी... बाधित हो रही पढ़ाई
Sun, 07 Dec 2025 11:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 07 Dec 2025 11:44 PM IST
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खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के बेलौहा स्थापित राजकीय महाविद्यालय। संवाद
खेसरहा। ब्लॉक क्षेत्र के पंचमोहनी में वर्ष 2019 में राजकीय महाविद्यालय का स्थापन की गई। छह वर्षों से उसमें पठन-पाठन का कार्य भी चल रहा है, लेकिन अभी तक विषयों के शिक्षकों का नियुक्ति नहीं होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है।
पिछले पांच वर्षों में सृजित 30 पदों के मुकाबले महज कुछ पदों पर ही नियुक्ति हो सकी है। शैक्षिक संसाधनों की इस कमी का सबसे बड़ा असर 250 से अधिक छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है, जिन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही हैं।
महाविद्यालय में कला संकाय के अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, गृहविज्ञान, मनोविज्ञान तथा विज्ञान संकाय के भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, प्राणी विज्ञान, प्रयोगशाला सहायक व परिचर के कई पद आज रिक्त पड़े हैं। आउटसोर्सिंग से होने वाली चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियां भी पूरी नहीं हो पाई हैं। विज्ञान वर्ग में शिक्षक न होने की वजह से बीएससी के छात्र लगभग पूरी तरह ऑनलाइन पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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ग्रामीण छात्राओं के लिए यह संस्थान घर के पास उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है, लेकिन संसाधनों की कमी उनकी प्रगति में बड़ी बाधा बन रही है। शिक्षण संस्थान को पूर्ण स्टाफ और बेहतर संसाधन मिलना अब समय की जरूरत बन गया है ताकि ग्रामीण प्रतिभाएं अपने सपनों को उड़ान दे सकें।
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पिछले पांच वर्षों में सृजित 30 पदों के मुकाबले महज कुछ पदों पर ही नियुक्ति हो सकी है। शैक्षिक संसाधनों की इस कमी का सबसे बड़ा असर 250 से अधिक छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है, जिन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही हैं।
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महाविद्यालय में कला संकाय के अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, गृहविज्ञान, मनोविज्ञान तथा विज्ञान संकाय के भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, प्राणी विज्ञान, प्रयोगशाला सहायक व परिचर के कई पद आज रिक्त पड़े हैं। आउटसोर्सिंग से होने वाली चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियां भी पूरी नहीं हो पाई हैं। विज्ञान वर्ग में शिक्षक न होने की वजह से बीएससी के छात्र लगभग पूरी तरह ऑनलाइन पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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ग्रामीण छात्राओं के लिए यह संस्थान घर के पास उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है, लेकिन संसाधनों की कमी उनकी प्रगति में बड़ी बाधा बन रही है। शिक्षण संस्थान को पूर्ण स्टाफ और बेहतर संसाधन मिलना अब समय की जरूरत बन गया है ताकि ग्रामीण प्रतिभाएं अपने सपनों को उड़ान दे सकें।