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Siddharthnagar News: चिटि्ठयों में अटकी जांच...‘पते’ पर नहीं पहुंचे दस्तावेज
Thu, 01 Jan 2026 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 01 Jan 2026 11:25 PM IST
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भनवापुर। जिले में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करते हुए पकड़ में आए 100 से अधिक शिक्षकों पर कार्रवाई हो चुकी है और सभी जेल भेजे जा चुके हैं। इस फर्जीवाड़े का खुलासा साल 2017-18 में हुआ था, लेकिन मामला अभी तक शांत नहीं हुआ है।
ऐसा ही मामला भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में सामने आया था। यहां एसटीएफ की ओर से की गई जांच में आठ शिक्षक फर्जी मिले। करीब डेढ़ साल पहले सितंबर 2024 में इन सभी पर त्रिलोकपुर थाने में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो कागजात की जरूरत पड़ी। इसके लिए पुलिस ने बेसिक शिक्षा विभाग से पत्राचार किया गया, लेकिन पांच माह बाद भी जवाब नहीं मिला है, जिससे जांच अटकी हुई है। वहीं पांच और शिक्षक उसी ब्लॉक क्षेत्र में संदिग्ध पाए गए हैं, जिनके कागजात की जांच शुरू हुई है। इससे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।
साल 2017-18 से फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर जिले में मुद्दा गरमाया हुआ है। दशकों से चल रहा फर्जीवाड़े का सिलसिला अभी भी जारी है। करीब डेढ़ साल पहले भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में एक साथ आठ लोगों ने कूटरचित अभिलेखों के आधार पर शिक्षक बनकर अपनी सेवाएं देने लगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने बिना कोई जांच किए मानव संपदा पहचान भी जारी कर दिया था।
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इस दौरान एक गोपनीय पत्र ने सारे फर्जीवाड़े से पर्दा उठा दिया। इसके बाद आठों फर्जी शिक्षक संबंधित विद्यालय से लापता हो गए। इसमें मामले में बीईओ की ओर से आठों फर्जी शिक्षकों पर धोखाधड़ी सहित अन्य धारा में एफआईआर दर्ज करवाई गई।
इसके बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल करते हुए संबंधित विभाग से सभी फर्जी शिक्षकों के दस्तावेज मांगें, लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी विभाग ने अभी तक कोई दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध नहीं कराए हैं। इससे जांच रुकी हुई है। अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अन्य पांच और अध्यापकों के फर्जी होने की खबर जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
इन पांच फर्जी अध्यापकों में से एक शिवशंकर श्रीवास्तव भनवापुर शिक्षा क्षेत्र के संविलयन उच्च प्राथमिक विद्यालय रमवापुर राउत में 2014 से कार्यरत था। उसने 22 दिसंबर 2009 को प्राथमिक विद्यालय हिजुरा में ज्वाइन किया। 2012 में वह प्राथमिक विद्यालय रमवापुर राउत में स्थानांतरित होकर आ गया। साल 2014 में पदोन्नति के उपरांत प्रधानाध्यापक बन गया। वर्तमान समय में कंपोजिट वह विद्यालय रमवापुर राउत में बतौर सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत है। जब शिव शंकर से दस्तावेज मांगें गए तो वह मेडिकल पर चला गया और तब से वह लापता है। इससे जांच लटक गई है।
भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के फर्जी आठ शिक्षकों के खिलाफ त्रिलोकपुर पुलिस ने सितंबर 2024 में एफआईआर दर्ज कर जांच के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाकी शिक्षक अरेस्ट स्टे लेकर गिरफ्तारी से बच गए।
पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। पुलिस के मुताबिक जांच को आगे बढ़ाने व मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए शिक्षा विभाग के पूर्व बीएसए समेत कई अन्य को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया, लेकिन अभी तक उधर से कोई जवाब नहीं आया। इससे यह मामला अभी भी अटका हुआ है।
थानाध्यक्ष त्रिलोकपुर चंद्रकांत पांडेय ने बताया कि बीएसए सहित कई अन्य को नोटिस देकर जानकारी मांगी गई है, लेकिन अभी तक जवाब नहीं प्राप्त हुआ है। जवाब आने के बाद ही जांच आगे बढ़ेगी।
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ऐसा ही मामला भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में सामने आया था। यहां एसटीएफ की ओर से की गई जांच में आठ शिक्षक फर्जी मिले। करीब डेढ़ साल पहले सितंबर 2024 में इन सभी पर त्रिलोकपुर थाने में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो कागजात की जरूरत पड़ी। इसके लिए पुलिस ने बेसिक शिक्षा विभाग से पत्राचार किया गया, लेकिन पांच माह बाद भी जवाब नहीं मिला है, जिससे जांच अटकी हुई है। वहीं पांच और शिक्षक उसी ब्लॉक क्षेत्र में संदिग्ध पाए गए हैं, जिनके कागजात की जांच शुरू हुई है। इससे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।
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साल 2017-18 से फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर जिले में मुद्दा गरमाया हुआ है। दशकों से चल रहा फर्जीवाड़े का सिलसिला अभी भी जारी है। करीब डेढ़ साल पहले भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में एक साथ आठ लोगों ने कूटरचित अभिलेखों के आधार पर शिक्षक बनकर अपनी सेवाएं देने लगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने बिना कोई जांच किए मानव संपदा पहचान भी जारी कर दिया था।
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इस दौरान एक गोपनीय पत्र ने सारे फर्जीवाड़े से पर्दा उठा दिया। इसके बाद आठों फर्जी शिक्षक संबंधित विद्यालय से लापता हो गए। इसमें मामले में बीईओ की ओर से आठों फर्जी शिक्षकों पर धोखाधड़ी सहित अन्य धारा में एफआईआर दर्ज करवाई गई।
इसके बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल करते हुए संबंधित विभाग से सभी फर्जी शिक्षकों के दस्तावेज मांगें, लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी विभाग ने अभी तक कोई दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध नहीं कराए हैं। इससे जांच रुकी हुई है। अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अन्य पांच और अध्यापकों के फर्जी होने की खबर जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
इन पांच फर्जी अध्यापकों में से एक शिवशंकर श्रीवास्तव भनवापुर शिक्षा क्षेत्र के संविलयन उच्च प्राथमिक विद्यालय रमवापुर राउत में 2014 से कार्यरत था। उसने 22 दिसंबर 2009 को प्राथमिक विद्यालय हिजुरा में ज्वाइन किया। 2012 में वह प्राथमिक विद्यालय रमवापुर राउत में स्थानांतरित होकर आ गया। साल 2014 में पदोन्नति के उपरांत प्रधानाध्यापक बन गया। वर्तमान समय में कंपोजिट वह विद्यालय रमवापुर राउत में बतौर सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत है। जब शिव शंकर से दस्तावेज मांगें गए तो वह मेडिकल पर चला गया और तब से वह लापता है। इससे जांच लटक गई है।
भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के फर्जी आठ शिक्षकों के खिलाफ त्रिलोकपुर पुलिस ने सितंबर 2024 में एफआईआर दर्ज कर जांच के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाकी शिक्षक अरेस्ट स्टे लेकर गिरफ्तारी से बच गए।
पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। पुलिस के मुताबिक जांच को आगे बढ़ाने व मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए शिक्षा विभाग के पूर्व बीएसए समेत कई अन्य को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया, लेकिन अभी तक उधर से कोई जवाब नहीं आया। इससे यह मामला अभी भी अटका हुआ है।
थानाध्यक्ष त्रिलोकपुर चंद्रकांत पांडेय ने बताया कि बीएसए सहित कई अन्य को नोटिस देकर जानकारी मांगी गई है, लेकिन अभी तक जवाब नहीं प्राप्त हुआ है। जवाब आने के बाद ही जांच आगे बढ़ेगी।