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Siddharthnagar News: धनतेरस पर भी अनुदेशकों के खाते खाली
Thu, 05 Nov 2026 11:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 05 Nov 2026 11:24 PM IST
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- दिवाली से पहले मानदेय नहीं मिलने से अनुदेशकों की बढ़ी मुश्किलें, त्योहार की तैयारियां प्रभावित
सिद्धार्थनगर। दिवाली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में धनतेरस की खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ गई है। वहीं, परिषदीय विद्यालयों में तैनात अनुदेशकों को अब तक मानदेय नहीं मिला है। भुगतान में देरी से अनुदेशकों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। त्योहार के समय मानदेय नहीं मिलने से घर की जरूरतों, बच्चों की खरीदारी और दिवाली की तैयारियों पर असर पड़ रहा है।
अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष माहेश्वरी पाठक ने बताया कि पहले पीएफएमएस प्रणाली के माध्यम से मानदेय का भुगतान होता था। इस व्यवस्था में मानदेय जारी होने के दो से तीन दिनों के भीतर धनराशि अनुदेशकों के खातों में पहुंच जाती थी। लेकिन भुगतान व्यवस्था बदलकर एसएनए स्पर्श प्रणाली लागू होने के बाद से लगातार देरी हो रही है।
उन्होंने बताया कि बीएसए कार्यालय से मानदेय भेजे जाने के बाद ट्रेजरी तक भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने में ही सात से आठ दिन लग जा रहे हैं। इसके बावजूद अनुदेशकों के खातों में समय से धनराशि नहीं पहुंच रही है। इससे त्योहार के समय उनकी आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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संघ के मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक ने कहा कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर भी अनुदेशकों को अपने मानदेय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। धनतेरस पर परिवार के लिए जरूरी सामान खरीदने और बच्चों की खुशियों से जुड़ी तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मानदेय का भुगतान समय से सुनिश्चित कराने की मांग की, ताकि अनुदेशकों को त्योहार पर आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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सिद्धार्थनगर। दिवाली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में धनतेरस की खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ गई है। वहीं, परिषदीय विद्यालयों में तैनात अनुदेशकों को अब तक मानदेय नहीं मिला है। भुगतान में देरी से अनुदेशकों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। त्योहार के समय मानदेय नहीं मिलने से घर की जरूरतों, बच्चों की खरीदारी और दिवाली की तैयारियों पर असर पड़ रहा है।
अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष माहेश्वरी पाठक ने बताया कि पहले पीएफएमएस प्रणाली के माध्यम से मानदेय का भुगतान होता था। इस व्यवस्था में मानदेय जारी होने के दो से तीन दिनों के भीतर धनराशि अनुदेशकों के खातों में पहुंच जाती थी। लेकिन भुगतान व्यवस्था बदलकर एसएनए स्पर्श प्रणाली लागू होने के बाद से लगातार देरी हो रही है।
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उन्होंने बताया कि बीएसए कार्यालय से मानदेय भेजे जाने के बाद ट्रेजरी तक भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने में ही सात से आठ दिन लग जा रहे हैं। इसके बावजूद अनुदेशकों के खातों में समय से धनराशि नहीं पहुंच रही है। इससे त्योहार के समय उनकी आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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संघ के मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक ने कहा कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर भी अनुदेशकों को अपने मानदेय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। धनतेरस पर परिवार के लिए जरूरी सामान खरीदने और बच्चों की खुशियों से जुड़ी तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मानदेय का भुगतान समय से सुनिश्चित कराने की मांग की, ताकि अनुदेशकों को त्योहार पर आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।