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Siddharthnagar News: ढाई सौ से अधिक दुकानें ग्रीन पटाखे की मांग कम
Fri, 06 Nov 2026 12:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 06 Nov 2026 12:15 AM IST
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बांसी माघ मेला मैदान में लगीे पाटाा की दुकान । संवाद
- फोटो : सांकेतिक
सिद्धार्थनगर। जिले में ढाई सौ से अधिक दुकानों पर पटाखों की बिक्री होती है लेकिन ग्रीन पटाखों का कारोबार सीमित है। दीपावली पर वायु और ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए ग्रीन पटाखों को बेहतर विकल्प माना जा रहा है, फिर भी बाजार में इनकी मांग कम है।
पूर्व मुख्य अग्निशमन अधिकारी एनके सिंह के अनुसार, सामान्य पटाखों से निकलने वाली हानिकारक गैसों को कम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने ग्रीन पटाखों की तकनीक विकसित की है।
इनसे सामान्य पटाखों की तुलना में हानिकारक उत्सर्जन कम करने का प्रयास किया जाता है। इनके निर्माण में विशेष रासायनिक संरचना का इस्तेमाल होता है। ग्रीन पटाखों की प्रमुख श्रेणियों में स्टार, स्वास और सफल शामिल हैं।
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उन्होंने बताया कि स्टार यानी सेफ थर्माइट क्रैकर विशेष संरचना के जरिए प्रदूषक उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं। स्वास (सेफ वाटर रिलीजिंग सिस्टम) में पानी छोड़ने की तकनीक से धूल के कणों को कम करने का प्रयास किया जाता है। वहीं, सफल (सेफ मिनिमल एल्युमिनियम) पटाखों में एल्युमिनियम का इस्तेमाल सीमित रखा जाता है। अरोमा क्रैकर्स में बारूद की गंध के बजाय खुशबू देने की व्यवस्था होती है।
पैकेट पर ग्रीन लिखा होना प्रमाणन की गारंटी नहीं : ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए पैकेट पर निर्माता का नाम, सीएसआईआर-नीरी से संबंधित प्रमाणन और अन्य जरूरी विवरण देखना चाहिए। क्यूआर कोड होने पर उसकी वैधता की भी जांच करनी चाहिए।
पैकेट पर ग्रीन या इको फ्रेंडली लिखा होने से उत्पाद को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। ग्राहकों को अधिकृत और वैध लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदने चाहिए।
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पूर्व मुख्य अग्निशमन अधिकारी एनके सिंह के अनुसार, सामान्य पटाखों से निकलने वाली हानिकारक गैसों को कम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने ग्रीन पटाखों की तकनीक विकसित की है।
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इनसे सामान्य पटाखों की तुलना में हानिकारक उत्सर्जन कम करने का प्रयास किया जाता है। इनके निर्माण में विशेष रासायनिक संरचना का इस्तेमाल होता है। ग्रीन पटाखों की प्रमुख श्रेणियों में स्टार, स्वास और सफल शामिल हैं।
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उन्होंने बताया कि स्टार यानी सेफ थर्माइट क्रैकर विशेष संरचना के जरिए प्रदूषक उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं। स्वास (सेफ वाटर रिलीजिंग सिस्टम) में पानी छोड़ने की तकनीक से धूल के कणों को कम करने का प्रयास किया जाता है। वहीं, सफल (सेफ मिनिमल एल्युमिनियम) पटाखों में एल्युमिनियम का इस्तेमाल सीमित रखा जाता है। अरोमा क्रैकर्स में बारूद की गंध के बजाय खुशबू देने की व्यवस्था होती है।
पैकेट पर ग्रीन लिखा होना प्रमाणन की गारंटी नहीं : ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए पैकेट पर निर्माता का नाम, सीएसआईआर-नीरी से संबंधित प्रमाणन और अन्य जरूरी विवरण देखना चाहिए। क्यूआर कोड होने पर उसकी वैधता की भी जांच करनी चाहिए।
पैकेट पर ग्रीन या इको फ्रेंडली लिखा होने से उत्पाद को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। ग्राहकों को अधिकृत और वैध लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदने चाहिए।