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Siddharthnagar News: डिजिटल पढ़ाई और साइबर में बढ़ा रुझान.. हल्लौर से निकलकर अमेरिका तक तय किया सफर
Fri, 07 Nov 2025 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 07 Nov 2025 12:22 AM IST
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- साइबर की पढ़ाई में मिला पास पहले स्थान और मेडल
- यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट फ्लोरिडा में रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर देश का नाम कर रहे है रोशन
- डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर निवासी फरमान हैदर ने जीता अंतरराष्ट्रीय साइबर वॉरियर्स का पुरस्कार
डुमरियागंज। सपने वो नहीं जो नींद में आए, सपने वो हैं जो हमें सोने न दें। इस कथन को सच कर दिखाया है सिद्धार्थनगर के एक गांव हल्लौर के फरमान हैदर ने। संघर्ष, मेहनत और लगन का पर्याय बन चुके फरमान को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट फ्लोरिडा में आयोजित एडवासिंग डब्लू-2 साइबर सिक्योरिटी प्रतियोगिता में न सिर्फ पुरस्कार मिला है बल्कि जिले और देश का नाम भी गर्व से ऊंचा हुआ है।
फरमान हैदर का नाम जिले के ऐसे चुनिंदा लोगों में शामिल हो गया है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर सुदूर अमेरिका की धरती पर अपनी पहचान बनाई है। फरमान साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रतियोगिता में जीत हासिल कर भारत के पहले प्रतिभावान बने हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। इससे पहले इस पुरस्कार को चीन, जापान और इसराइल जैसे देशों के योग्य लोगों ने हासिल किया था।
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विज्ञान की जिज्ञासा से अमेरिका की भरी उड़ान
बचपन से ही फरमान ने विज्ञान और तकनीक में गहरी रुचि दिखाई। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट थॉमस स्कूल हल्लौर से हुई, जहां उन्होंने फर्स्ट क्लास में हाईस्कूल पास किया। नाना वजीहुल हसन और असगर जमील की छत्रछाया में शिक्षा का महत्व समझा। नाना के इंतकाल के बाद, फरमान को उनके करीबी रिश्तेदार इंतेखाब आलम मार्गदर्शन के लिए मुंबई ले गए,जहां से उनके पेशेवर सफर की नींव रखी गई। मुंबई में, फरमान ने प्रवीण पाटिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (पॉलीटेक्निक) में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। तीन साल तक हर सेमेस्टर में टॉपर रहे। डिप्लोमा फर्स्ट क्लास डिस्टिंक्शन 89 प्रतिशत के साथ पास किया। इसके बाद मेरिट पर उन्हें जेवियर इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग में बीटेक में प्रवेश मिला, जहां भी उन्होंने 93 प्रतिशत अंकों के साथ कॉलेज टॉप कर अपनी श्रेष्ठता साबित की।
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मिला साइबर सुरक्षा में महारत और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
बीटेक की डिग्री के बाद फारमान ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर पेशेवर सफर शुरू किया, जहां दो साल में उन्होंने अनुभव और कौशल दोनों हासिल किया, मगर फरमान की मंजिल सिर्फ नौकरी नहीं थी। उनका सपना विश्व-स्तरीय ज्ञान और साइबर सुरक्षा में महारत हासिल करना था। अपने दृढ़ उद्देश्य और उत्कृष्ट तकनीकी अनुभव के कारण उन्हें अप्रैल 2024 में यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट फ्लोरिडा में मास्टर इन साइबर सिक्योरिटी एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में एडमिशन मिला। यह उनके लिए दोहरी खुशी थी, क्योंकि उन्हें साथ ही रिसर्च असिस्टेंट के लिए भी चुना गया।
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जड़ों से जुड़े रहें युवा : फरमान
फरमान हैदर ने अपनी सफलता के बाद कहा कि छोटे शहरों या ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने पर हमें अपने सपने नहीं दबाने चाहिए। उनकी काबिलियत किसी से कम नहीं होती। यह संदेश उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें सच करने की हिम्मत रखते हैं। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि मेहनत और निरंतरता ही सफलता की चाबी है। फरमान की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार बल्कि हल्लौर के लिए भी गर्व का विषय है। उनका यह सफर आज पूरे देश के युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करता है।
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- यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट फ्लोरिडा में रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर देश का नाम कर रहे है रोशन
- डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर निवासी फरमान हैदर ने जीता अंतरराष्ट्रीय साइबर वॉरियर्स का पुरस्कार
डुमरियागंज। सपने वो नहीं जो नींद में आए, सपने वो हैं जो हमें सोने न दें। इस कथन को सच कर दिखाया है सिद्धार्थनगर के एक गांव हल्लौर के फरमान हैदर ने। संघर्ष, मेहनत और लगन का पर्याय बन चुके फरमान को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट फ्लोरिडा में आयोजित एडवासिंग डब्लू-2 साइबर सिक्योरिटी प्रतियोगिता में न सिर्फ पुरस्कार मिला है बल्कि जिले और देश का नाम भी गर्व से ऊंचा हुआ है।
फरमान हैदर का नाम जिले के ऐसे चुनिंदा लोगों में शामिल हो गया है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर सुदूर अमेरिका की धरती पर अपनी पहचान बनाई है। फरमान साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रतियोगिता में जीत हासिल कर भारत के पहले प्रतिभावान बने हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। इससे पहले इस पुरस्कार को चीन, जापान और इसराइल जैसे देशों के योग्य लोगों ने हासिल किया था।
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विज्ञान की जिज्ञासा से अमेरिका की भरी उड़ान
बचपन से ही फरमान ने विज्ञान और तकनीक में गहरी रुचि दिखाई। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट थॉमस स्कूल हल्लौर से हुई, जहां उन्होंने फर्स्ट क्लास में हाईस्कूल पास किया। नाना वजीहुल हसन और असगर जमील की छत्रछाया में शिक्षा का महत्व समझा। नाना के इंतकाल के बाद, फरमान को उनके करीबी रिश्तेदार इंतेखाब आलम मार्गदर्शन के लिए मुंबई ले गए,जहां से उनके पेशेवर सफर की नींव रखी गई। मुंबई में, फरमान ने प्रवीण पाटिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (पॉलीटेक्निक) में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। तीन साल तक हर सेमेस्टर में टॉपर रहे। डिप्लोमा फर्स्ट क्लास डिस्टिंक्शन 89 प्रतिशत के साथ पास किया। इसके बाद मेरिट पर उन्हें जेवियर इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग में बीटेक में प्रवेश मिला, जहां भी उन्होंने 93 प्रतिशत अंकों के साथ कॉलेज टॉप कर अपनी श्रेष्ठता साबित की।
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मिला साइबर सुरक्षा में महारत और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
बीटेक की डिग्री के बाद फारमान ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर पेशेवर सफर शुरू किया, जहां दो साल में उन्होंने अनुभव और कौशल दोनों हासिल किया, मगर फरमान की मंजिल सिर्फ नौकरी नहीं थी। उनका सपना विश्व-स्तरीय ज्ञान और साइबर सुरक्षा में महारत हासिल करना था। अपने दृढ़ उद्देश्य और उत्कृष्ट तकनीकी अनुभव के कारण उन्हें अप्रैल 2024 में यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट फ्लोरिडा में मास्टर इन साइबर सिक्योरिटी एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में एडमिशन मिला। यह उनके लिए दोहरी खुशी थी, क्योंकि उन्हें साथ ही रिसर्च असिस्टेंट के लिए भी चुना गया।
जड़ों से जुड़े रहें युवा : फरमान
फरमान हैदर ने अपनी सफलता के बाद कहा कि छोटे शहरों या ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने पर हमें अपने सपने नहीं दबाने चाहिए। उनकी काबिलियत किसी से कम नहीं होती। यह संदेश उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें सच करने की हिम्मत रखते हैं। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि मेहनत और निरंतरता ही सफलता की चाबी है। फरमान की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार बल्कि हल्लौर के लिए भी गर्व का विषय है। उनका यह सफर आज पूरे देश के युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करता है।