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Siddharthnagar News: सेहत पर संकट...आतिशबाजी से जहरीली हुई हवा

Wed, 22 Oct 2025 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 22 Oct 2025 11:35 PM IST
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Siddharthnagar News: Health crisis...air becomes poisonous due to fireworks
शहर में छाया धुंध। - फोटो : दीपदान के दौरान धर्मनगरी के राघव घाट का सुंदर आकर्षक नजारा व जगमग मंदाकिनी। संवाद
सिद्धार्थनगर। मौसम की नमी और दीपावली पर दो दिन जमकर हुई आतिशबाजी से हवा की गुणवत्ता पर प्रभावित हुई है। बुधवार की सुबह जहां धुंध जैसे हालात नजर आए। वहीं, आंखों में जलन और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी भी होने लगी।
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दीपावली पर 300 क्विंटल से अधिक पटाखों से निकलने वाले धुएं से हवा की सेहत बिगड़ गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक सप्ताह में 80-90 के बीच रहा एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का स्तर छलांग लगाकर 156 पर पहुंच गया है। जो सांस और फेफड़े के रोगियों पर प्रतिकूल असर डालने के साथ ही एक स्वास्थ्य व्यक्ति को बीमार बनाने के लिए काफी है।
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विशेषज्ञों की राय है कि अगर पुरानी बीमारी से ग्रसित हैं तो सुबह और शाम में कम निकलें। आम लोग भी मास्क का प्रयोग करें तो बेहतर होगा। क्योंकि, मौसम में नमी के कारण धुंआ ऊपर जाने के बजाए बीच आसमान में ही उसकी एक परत बन जा रही है, ऐसे में बारिश होने तक संभलकर रहना होगा, वरना नुकसान हो सकता है।
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दशहरा के बाद मौसम में तब्दील शुरु हो गई है। रात और सुबह में गुलाबी ठंड का एहसास हो रहा है। तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। लेकिन, मौसम में बदलाव के साथ प्रदूषण हावी होने लगा। पिछले सप्ताह जहां एक्यूआई 80-90 दर्ज किया गया था। वह लंबी छलांग के साथ बुधवार सुबह 156 दर्ज किया गया।
सुबह धुंध की मोटी चादर के कारण देखने में लोगों को परेशानी हुई। यह हालात सुबह 10 बजे तक रहा। पूरे दिन धुंध रही, जिससे लोगों को असहजता महसूस हुई। मौसम में नमी और दीपावली पर दो दिन में 300 क्विंटल से अधिक पटाखा जलने के बाद उससे निकलने वाले विषैले धुंए के घुलने से यह समस्या होने की बात सामने आई है।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे सांस के रोगी : प्रदूषण का असर सेहत पर किस प्रकार से पड़ रहा है, इसकी हकीकत जानने के लिए बुधवार को मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में संवाद न्यूज एजेंसी की टीम पहुंचे। इमरजेंसी में 24 घंटे में 10 सांस के मरीज पहुंचे थे। कुछ घंटे ऑक्सीजन पर रखने के बाद सुधार हुआ तो दवा देने के साथ ही एहतियात बरतने, सुबह और शाम को कम निकलने और निर्माण स्थल या जहां धूल उड़ रही है, वहां कम जाने की सलाह और मास्क लगाने की सलाह दी गई।
हालांकि, डॉक्टरों का कहना था कि जिस उम्र के लोगों में सांस की तकलीफ पाई जा रही है, उनकी पुरानी हिस्ट्री है। मौसम में बदलाव हुआ है तो उन पर असर डालता है। अभी मरीजों की संख्या बढ़ेगी क्योंकि मौसम में नमी के बाद पॉल्युशन बढ़ता है। ऐसे में जो पहले से सांस, फेफड़े और अन्य बीमारी से ग्रसित हैं, उन्हें बचाव की जरूरत है।

अभी और बिगड़ेगी हवा की गुणवत्ता : जिले भर में बिके पटाखों और जारी किए गए लाइसेंस से दीपावली पर 300 करीब क्विंटल से अधिक पटाखा जलाए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। पांच तहसीलों पर 350 से अधिक अस्थायी दुकान और 22 स्थायी दुकानें लगी थीं। इसके साथ ही गांव और कस्बों में दुकानों पर बड़ी मात्रा में पटाखा रखा हुआ था, जिसकी ब्रिकी हुई और लोगों ने जलाया। इस पटाखे की धुंआ का असर रहा कि एक्यूआई में उछाल देखने को मिला। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जब धान की मढ़ाई शुरु होगी और धूल उठेगी, मौसम नम होगा तो यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है।
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