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Siddharthnagar News: हनुमान ने जलाई सोने की लंका, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा पंडाल
Thu, 27 Nov 2025 11:12 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 27 Nov 2025 11:12 PM IST
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भनवापुर क्षेत्र के गागापुर में श्रीरामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
भनवापुर। क्षेत्र के गागापुर में चल रही रामलीला कार्यक्रम के दौरान बुधवार की रात लंका दहन का मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य का मंचन किया गया। पूरा रामलीला पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
इस दौरान हनुमान ने अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट करने के बाद फल खाते हुए पेड़ों को क्षतिग्रस्त करने का दृश्य देखकर श्रद्धालु हंसी से लोटपोट हो गए।
कलाकारों द्वारा प्रस्तुत दृश्य की शुरुआत भगवान राम और लक्ष्मण द्वारा माता सीता की खोज से हुई। इस दौरान उनकी भेंट रावण द्वारा घायल गिद्ध राज जटायु से हुई, जिन्होंने राम को पूरी वृतांत सुनाकर प्राण त्याग दिए। उनके अंतिम संस्कार के बाद, प्रभु राम ने शबरी के आश्रम में जाकर ऋषिमुख पर्वत का पता जाना, जहां उनकी मुलाकात हनुमान से हुई और दोनों में मित्रता हो गई। इसके बाद भगवान राम ने सुग्रीव को उनके बड़े भाई बाली से लड़ने के लिए भेजा। राम ने पेड़ की आड़ से बाली का वध किया। राम ने सुग्रीव को राजा और अंगद को युवराज बनाया।
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माता सीता की खोज में हनुमान को दक्षिण दिशा में भेजा गया। उन्होंने समुद्र पार करने के दौरान नाग माता सुरसा को नतमस्तक किया, लंका पहुंचकर राक्षसी लंकिनी का वध किया और विभीषण से भेंट की।
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इस दौरान हनुमान ने अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट करने के बाद फल खाते हुए पेड़ों को क्षतिग्रस्त करने का दृश्य देखकर श्रद्धालु हंसी से लोटपोट हो गए।
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कलाकारों द्वारा प्रस्तुत दृश्य की शुरुआत भगवान राम और लक्ष्मण द्वारा माता सीता की खोज से हुई। इस दौरान उनकी भेंट रावण द्वारा घायल गिद्ध राज जटायु से हुई, जिन्होंने राम को पूरी वृतांत सुनाकर प्राण त्याग दिए। उनके अंतिम संस्कार के बाद, प्रभु राम ने शबरी के आश्रम में जाकर ऋषिमुख पर्वत का पता जाना, जहां उनकी मुलाकात हनुमान से हुई और दोनों में मित्रता हो गई। इसके बाद भगवान राम ने सुग्रीव को उनके बड़े भाई बाली से लड़ने के लिए भेजा। राम ने पेड़ की आड़ से बाली का वध किया। राम ने सुग्रीव को राजा और अंगद को युवराज बनाया।
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माता सीता की खोज में हनुमान को दक्षिण दिशा में भेजा गया। उन्होंने समुद्र पार करने के दौरान नाग माता सुरसा को नतमस्तक किया, लंका पहुंचकर राक्षसी लंकिनी का वध किया और विभीषण से भेंट की।