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Siddharthnagar News: ईद मिलादुन्नबी आज, निकाला जाएगा जुलूस-ए-मोहम्मदी
Wed, 26 Aug 2026 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 26 Aug 2026 12:31 AM IST
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डुमरियागंज नगर क्षेत्र के बैदोलागढ़ में ईदुल मिलादुन्नबी को लेकर बनाया गया भव्य गेट व की गई सजा
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सिद्धार्थनगर। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की जयंती, ईद मिलादुन्नबी को लेकर तहसील क्षेत्र में सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। बुधवार को पैगंबर की जयंती के उपलक्ष्य में जगह-जगह मिलाद की महफिल, जलसा आयोजित करने के साथ ही जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जाएगा।
इसके जरिये पैगंबर मोहम्मद साहब के पैगाम को जन-जन को पहुंचाया जाएगा। त्योहार को लेकर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। डुमरियागंज से लेकर बेवा चौराहा लगभग सात किलोमीटर मार्ग पर पुलिस और सीआरपीएफ और पीएसी का कड़ा पहरा रहेगा। बैदौलागढ़ गरीब नवाज मदरसा के मौलाना मकसूद अकरम ने बताया कि इस्लाम धर्म प्रवर्तक हजरत मोहम्मद का जन्म अरब के रेगिस्तान के शहर मक्का में 571 ईस्वी में 12 तारीख को हुआ था। पैगंबर साहब के जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो चुका था। जब वह छह वर्ष के थे तो उनकी मां की भी मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद पैगंबर मोहम्मद अपने चाचा अबू तालिब और दादा अब्दुल मुत्तलिब के साथ रहने लगे। इनके पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम बीबी आमिना था।
अल्लाह ने सबसे पहले पैगंबर हजरत मोहम्मद को ही पवित्र कुरान अता की थी। इसके बाद ही पैगंबर साहब ने पवित्र कुरान का संदेश दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया। पैगंबर के जन्मदिवस को मुस्लिम समुदाय के लोग अरबी महीने रबी उल अव्वल की 12 तारीख को ईद मिलादुन्नबी के रूप में धूमधाम से मनाते हैं।
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इस दिन रात भर प्रार्थनाएं होती हैं और जगह-जगह जुलूस भी निकाले जाते हैं। घरों और मस्जिदों में इस मुबारक दिन कुरान पढ़ी जाती है। ईद मिलादुन्नबी के मौके पर घर और मस्जिद को सजाया जाता है और मोहम्मद साहब के संदेशों को पढ़ा जाता है।
हजरत मोहम्मद ने हमेशा दुनिया को अमन शांति और सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलने का पैगाम दिया। आज के दिन लोग गरीबों में दिल खोलकर दान भी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ईद मिलादुन्नबी के दिन दान और जकात करने से अल्लाह खुश होते हैं।
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इसके जरिये पैगंबर मोहम्मद साहब के पैगाम को जन-जन को पहुंचाया जाएगा। त्योहार को लेकर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। डुमरियागंज से लेकर बेवा चौराहा लगभग सात किलोमीटर मार्ग पर पुलिस और सीआरपीएफ और पीएसी का कड़ा पहरा रहेगा। बैदौलागढ़ गरीब नवाज मदरसा के मौलाना मकसूद अकरम ने बताया कि इस्लाम धर्म प्रवर्तक हजरत मोहम्मद का जन्म अरब के रेगिस्तान के शहर मक्का में 571 ईस्वी में 12 तारीख को हुआ था। पैगंबर साहब के जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो चुका था। जब वह छह वर्ष के थे तो उनकी मां की भी मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद पैगंबर मोहम्मद अपने चाचा अबू तालिब और दादा अब्दुल मुत्तलिब के साथ रहने लगे। इनके पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम बीबी आमिना था।
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अल्लाह ने सबसे पहले पैगंबर हजरत मोहम्मद को ही पवित्र कुरान अता की थी। इसके बाद ही पैगंबर साहब ने पवित्र कुरान का संदेश दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया। पैगंबर के जन्मदिवस को मुस्लिम समुदाय के लोग अरबी महीने रबी उल अव्वल की 12 तारीख को ईद मिलादुन्नबी के रूप में धूमधाम से मनाते हैं।
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इस दिन रात भर प्रार्थनाएं होती हैं और जगह-जगह जुलूस भी निकाले जाते हैं। घरों और मस्जिदों में इस मुबारक दिन कुरान पढ़ी जाती है। ईद मिलादुन्नबी के मौके पर घर और मस्जिद को सजाया जाता है और मोहम्मद साहब के संदेशों को पढ़ा जाता है।
हजरत मोहम्मद ने हमेशा दुनिया को अमन शांति और सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलने का पैगाम दिया। आज के दिन लोग गरीबों में दिल खोलकर दान भी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ईद मिलादुन्नबी के दिन दान और जकात करने से अल्लाह खुश होते हैं।

डुमरियागंज नगर क्षेत्र के बैदोलागढ़ में ईदुल मिलादुन्नबी को लेकर बनाया गया भव्य गेट व की गई सजा