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Siddharthnagar News: रफ्तार बेलगाम...जिंदगी पर विराम
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- बांसी-बस्ती मार्ग पर यातायात पुलिस ने एक ही दिन में पकड़े ओवरस्पीड में दौड़ रहे 89 वाहन
- हर माह जिले में औसतन 20 लोग गंवा रहे जान, इंटरसेप्टर से जांच में सामने आई बेपरवाही
सिद्धार्थनगर। सड़क पर तेज रफ्तार जानलेवा साबित हो रही है। जिले में हर माह औसतन 20 लोग जान गंवा रहे हैं। इसके बावजूद वाहन चालक सबक नहीं ले रहे हैं और बिना हेलमेट व सीट बेल्ट के तेज रफ्तार में गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। शुक्रवार को बांसी-बस्ती मार्ग पर यातायात पुलिस की जांच में 89 गाड़ियां निर्धारित गति सीमा से ज्यादा तेज रफ्तार में दौड़ती मिलीं। सभी का चालान करते हुए नियमों के पालन की हिदायत दी गई।
बांसी और बस्ती को जोड़ने वाला मार्ग काफी व्यस्त माना जाता है। दिनभर इस सड़क पर स्कूल वाहन, बसें, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली और दोपहिया वाहन दौड़ते रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क सीधी होने के कारण अधिकतर चालक यहां रफ्तार बढ़ा देते हैं जबकि आसपास कई गांवों के लोग पैदल भी इसी मार्ग को पार करते हैं। ऐसे में छोटी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन जाती है।
सड़क हादसों पर रोकथाम के उद्देश्य से जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कटया में यातायात विभाग ने शुक्रवार को पहली बार इंटरसेप्टर वाहनों के माध्यम से ओवरस्पीड गाड़ियों की निगरानी की। सड़क से गुजर रहे वाहनों की गति रिकॉर्ड की और ओवरस्पीड में चल रहे वाहनों पर कार्रवाई की। यातायात प्रभारी निरीक्षण अजय कुमार यादव ने बताया कि तेज रफ्तार सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह है। तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने वाले अपने साथ ही सड़क से गुजर रहे दूसरे लोगों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। इसी कारण जिले के प्रमुख मार्गों पर लगातार प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि वाहन की गति बढ़ने के साथ चालक का प्रतिक्रिया का समय घट जाता है और ब्रेक लगाने की दूरी कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि 60-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार भी आबादी वाले क्षेत्रों में घातक साबित हो सकती है। विभाग ने स्कूलों, बाजार और संवेदनशील चौराहों के आसपास विशेष निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई है। लगातार निगरानी और कार्रवाई से चालकों में नियमों के पालन की आदत विकसित होगी।
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हादसों के तीन वजह आम
- सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में अधिकतर दुर्घटनाएं तीन वजहों ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने और बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के सफर करने से होती हैं। इनमें भी तेज गति सबसे बड़ा कारण है। यदि चालक निर्धारित गति सीमा का पालन करें तो गंभीर हादसों और मौतों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।
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हर माह जा रही 20 लोगों की जान
जनपद में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है। इस साल जनवरी से जून तक 173 हादसे हुए जिनमें 122 लोगों की जान गई। वहीं, 111 लोग घायल हुए हैं। वहीं, वर्ष 2025 में जनवरी से जून के बीच 150 हादसे हुए थे जिनमें 108 लोगों की मौत हुई थी जबकि 104 लोग घायल हुए थे। यातायात नियमों की अनदेखी ही अधिकतर हादसों की वजह बनती है।
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एक नजर हाल में हुए हादसों पर
6 जुलाई - शिवनगर डिडई थाने के सामने दो बाइक की आमने-सामने टक्कर हुई। इस हादसे में एक ही बाइक पर सवार दो युवकों की मौत हो गई। इसमें मोहम्मद आरिफ (30 वर्ष) और मोहम्मद जीशान (16 वर्ष) शामिल थे। दोनों किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे।
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22 जून- भवानीगंज थाना क्षेत्र के बेंवा-भड़रिया मार्ग पर लटिया चौराहे के पास एक निजी बस ने बाइक को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में बाइक पर सवार दो दोस्तों, समीर (20 वर्ष) और शाकिब (13 वर्ष) की मौके की मौत हो गई थी।
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30 जून - खेसराहा क्षेत्र के बांसी-धानी मार्ग पर कोटिया पांडेय गांव के पास तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर पुलिया से टकरा गई। इस हादसे में बाइक सवार दो युवकों झिनकू चौहान और राधेश्याम की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी।
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11 अगस्त- बांसी-धानी मार्ग पर दो बाइक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बाइक सवार एक युवक नितेश मौर्य की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल दूसरे युवक प्रिंस साहनी की इलाज के दौरान तीन दिन बाद 14 अगस्त को मौत हो गई थी।
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- हर माह जिले में औसतन 20 लोग गंवा रहे जान, इंटरसेप्टर से जांच में सामने आई बेपरवाही
सिद्धार्थनगर। सड़क पर तेज रफ्तार जानलेवा साबित हो रही है। जिले में हर माह औसतन 20 लोग जान गंवा रहे हैं। इसके बावजूद वाहन चालक सबक नहीं ले रहे हैं और बिना हेलमेट व सीट बेल्ट के तेज रफ्तार में गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। शुक्रवार को बांसी-बस्ती मार्ग पर यातायात पुलिस की जांच में 89 गाड़ियां निर्धारित गति सीमा से ज्यादा तेज रफ्तार में दौड़ती मिलीं। सभी का चालान करते हुए नियमों के पालन की हिदायत दी गई।
बांसी और बस्ती को जोड़ने वाला मार्ग काफी व्यस्त माना जाता है। दिनभर इस सड़क पर स्कूल वाहन, बसें, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली और दोपहिया वाहन दौड़ते रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क सीधी होने के कारण अधिकतर चालक यहां रफ्तार बढ़ा देते हैं जबकि आसपास कई गांवों के लोग पैदल भी इसी मार्ग को पार करते हैं। ऐसे में छोटी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन जाती है।
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सड़क हादसों पर रोकथाम के उद्देश्य से जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कटया में यातायात विभाग ने शुक्रवार को पहली बार इंटरसेप्टर वाहनों के माध्यम से ओवरस्पीड गाड़ियों की निगरानी की। सड़क से गुजर रहे वाहनों की गति रिकॉर्ड की और ओवरस्पीड में चल रहे वाहनों पर कार्रवाई की। यातायात प्रभारी निरीक्षण अजय कुमार यादव ने बताया कि तेज रफ्तार सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह है। तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने वाले अपने साथ ही सड़क से गुजर रहे दूसरे लोगों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। इसी कारण जिले के प्रमुख मार्गों पर लगातार प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि वाहन की गति बढ़ने के साथ चालक का प्रतिक्रिया का समय घट जाता है और ब्रेक लगाने की दूरी कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि 60-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार भी आबादी वाले क्षेत्रों में घातक साबित हो सकती है। विभाग ने स्कूलों, बाजार और संवेदनशील चौराहों के आसपास विशेष निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई है। लगातार निगरानी और कार्रवाई से चालकों में नियमों के पालन की आदत विकसित होगी।
हादसों के तीन वजह आम
- सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में अधिकतर दुर्घटनाएं तीन वजहों ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने और बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के सफर करने से होती हैं। इनमें भी तेज गति सबसे बड़ा कारण है। यदि चालक निर्धारित गति सीमा का पालन करें तो गंभीर हादसों और मौतों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।
हर माह जा रही 20 लोगों की जान
जनपद में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है। इस साल जनवरी से जून तक 173 हादसे हुए जिनमें 122 लोगों की जान गई। वहीं, 111 लोग घायल हुए हैं। वहीं, वर्ष 2025 में जनवरी से जून के बीच 150 हादसे हुए थे जिनमें 108 लोगों की मौत हुई थी जबकि 104 लोग घायल हुए थे। यातायात नियमों की अनदेखी ही अधिकतर हादसों की वजह बनती है।
एक नजर हाल में हुए हादसों पर
6 जुलाई - शिवनगर डिडई थाने के सामने दो बाइक की आमने-सामने टक्कर हुई। इस हादसे में एक ही बाइक पर सवार दो युवकों की मौत हो गई। इसमें मोहम्मद आरिफ (30 वर्ष) और मोहम्मद जीशान (16 वर्ष) शामिल थे। दोनों किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे।
22 जून- भवानीगंज थाना क्षेत्र के बेंवा-भड़रिया मार्ग पर लटिया चौराहे के पास एक निजी बस ने बाइक को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में बाइक पर सवार दो दोस्तों, समीर (20 वर्ष) और शाकिब (13 वर्ष) की मौके की मौत हो गई थी।
30 जून - खेसराहा क्षेत्र के बांसी-धानी मार्ग पर कोटिया पांडेय गांव के पास तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर पुलिया से टकरा गई। इस हादसे में बाइक सवार दो युवकों झिनकू चौहान और राधेश्याम की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी।
11 अगस्त- बांसी-धानी मार्ग पर दो बाइक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बाइक सवार एक युवक नितेश मौर्य की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल दूसरे युवक प्रिंस साहनी की इलाज के दौरान तीन दिन बाद 14 अगस्त को मौत हो गई थी।