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Siddharthnagar News: पितरों के तर्पण को बोधगया रवाना हुआ श्रद्धालुओं का जत्था
Tue, 29 Sep 2026 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 29 Sep 2026 11:45 PM IST
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सकारपार क्षेत्र के सिसहनिया गांव से तीर्थयात्रा के लिए रवाना होते श्रद्धालु। संवाद
- जिले के अलग अलग हिस्सों से भी तीर्थयात्रा पर निकले श्रद्धालु , विधि-विधान से करेंगे श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान
सिद्धार्थनगर/सकारपार। पितृपक्ष के अवसर पर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों में धार्मिक आस्था का माहौल बना हुआ है। नौगढ़, शोहरतगढ़, बांसी, इटवा और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से श्रद्धालुओं का जत्था गाजे- बाजे के बीच बोधगया (बिहार) के लिए रवाना हुआ। श्रद्धालु बोधगया पहुंचकर अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और विधि-विधान से पिंडदान करेंगे। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में धार्मिक आस्था का भाव देखने को मिला।
पितृपक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत परिजन और पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके निमित्त श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इसी धार्मिक भावना के साथ सिसहनिया गांव के श्रद्धालु बोधगया की यात्रा पर निकले हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि बोधगया पहुंचने के बाद धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार पुरोहितों के निर्देशन में पितरों के निमित्त सभी आवश्यक धार्मिक कर्मकांड संपन्न किए जाएंगे। बांसी तहसील क्षेत्र के सिसहनिया गांव से बोधगया (बिहार) के लिए रवाना होने वाले श्रद्धालुओं में गिरजापति उपाध्याय, बीरेंद्र उपाध्याय और इंद्रदेव उपाध्याय पत्नी के साथ रवाना हुए। वहीं बंश गोपाल उपाध्याय, राम सवारे शर्मा, सरजू शर्मा और जुगुल शर्मा भी उनके साथ रहे।
यात्रा पर निकलने से पहले श्रद्धालुओं ने घर पर तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म के साथ लोगों को भोजन करवाया। उसके बाद आवश्यक पूजन सामग्री एवं अन्य सामान के साथ रवाना हुए। इसी प्रकार नौगढ़ तहसील क्षेत्र के सिसवा बुजुर्ग गांव से कुछ लोग तीर्थयात्रा पर लोग गया के लिए निकले। ग्रामीणों ने तीर्थयात्रियों को मंगलमय और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए विदा किया। वहीं, श्रद्धालुओं ने भी बोधगया पहुंचकर विधि-विधान के साथ अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की बात कही।
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पितरों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान
श्रद्धालुओं के अनुसार पितृपक्ष में गया क्षेत्र में पिंडदान और तर्पण का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यहां पहुंचकर वे अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मिक शांति के लिए पूजा-अर्चना करेंगे। साथ ही परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना भी करेंगे। श्रद्धालुओं का कहना है कि पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान का समय नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है।
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सिद्धार्थनगर/सकारपार। पितृपक्ष के अवसर पर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों में धार्मिक आस्था का माहौल बना हुआ है। नौगढ़, शोहरतगढ़, बांसी, इटवा और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से श्रद्धालुओं का जत्था गाजे- बाजे के बीच बोधगया (बिहार) के लिए रवाना हुआ। श्रद्धालु बोधगया पहुंचकर अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और विधि-विधान से पिंडदान करेंगे। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में धार्मिक आस्था का भाव देखने को मिला।
पितृपक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत परिजन और पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके निमित्त श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इसी धार्मिक भावना के साथ सिसहनिया गांव के श्रद्धालु बोधगया की यात्रा पर निकले हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि बोधगया पहुंचने के बाद धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार पुरोहितों के निर्देशन में पितरों के निमित्त सभी आवश्यक धार्मिक कर्मकांड संपन्न किए जाएंगे। बांसी तहसील क्षेत्र के सिसहनिया गांव से बोधगया (बिहार) के लिए रवाना होने वाले श्रद्धालुओं में गिरजापति उपाध्याय, बीरेंद्र उपाध्याय और इंद्रदेव उपाध्याय पत्नी के साथ रवाना हुए। वहीं बंश गोपाल उपाध्याय, राम सवारे शर्मा, सरजू शर्मा और जुगुल शर्मा भी उनके साथ रहे।
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यात्रा पर निकलने से पहले श्रद्धालुओं ने घर पर तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म के साथ लोगों को भोजन करवाया। उसके बाद आवश्यक पूजन सामग्री एवं अन्य सामान के साथ रवाना हुए। इसी प्रकार नौगढ़ तहसील क्षेत्र के सिसवा बुजुर्ग गांव से कुछ लोग तीर्थयात्रा पर लोग गया के लिए निकले। ग्रामीणों ने तीर्थयात्रियों को मंगलमय और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए विदा किया। वहीं, श्रद्धालुओं ने भी बोधगया पहुंचकर विधि-विधान के साथ अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की बात कही।
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पितरों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान
श्रद्धालुओं के अनुसार पितृपक्ष में गया क्षेत्र में पिंडदान और तर्पण का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यहां पहुंचकर वे अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मिक शांति के लिए पूजा-अर्चना करेंगे। साथ ही परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना भी करेंगे। श्रद्धालुओं का कहना है कि पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान का समय नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है।