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Siddharthnagar News: जलवायु और मिट्टी के अनुसार करें बीज का प्रजातियों का चयन
Sat, 18 Jul 2026 01:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 18 Jul 2026 01:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
भारतभारी। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में सुगंधित धान बीज उत्पादन तकनीक विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण का शुक्रवार को समापन किया गया। इसमें किसानों को खेती से जुड़ी कई जानकारी देने के साथ जलवायु और मृदा के अनुसार धान की प्रजातियों के चयन की सलाह दी गई।
प्रशिक्षण में वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि फसल लगाने के लिए बीज हमेशा मान्यता प्राप्त स्रोत से ही खरीदना चाहिए और प्रजातियों का चयन क्षेत्र की जलवायु और मृदा की जांच के बाद उसके अनुसार करना चाहिए। इंजीनियर अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि धान की नर्सरी लगाने से पूर्व ट्राईकोडर्मा से मृदा उपचार करे और जीवाणु नाशक दवा स्ट्रैपटोसाइक्लीन एक ग्राम और फफूंद नाशक दवा बाविस्टिन 20 ग्राम को 10 ली पानी में मिला कर घोल बनाएं और उसमें आठ किलो बीज को 24 घंटों तक भिगोकर रखें।
इससे बीज अच्छी तरह उपचारित हो जाता है। प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शेष नारायण सिंह ने बताया कि जनपद में सुगंधित धान में अधिकतम क्षेत्रफल में कालानमक धान का है, यदि किसानों को अधिक लाभ कमाना है तो गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बीज हो या चावल उसकी शुद्धता बनाए रखें।
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भारतभारी। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में सुगंधित धान बीज उत्पादन तकनीक विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण का शुक्रवार को समापन किया गया। इसमें किसानों को खेती से जुड़ी कई जानकारी देने के साथ जलवायु और मृदा के अनुसार धान की प्रजातियों के चयन की सलाह दी गई।
प्रशिक्षण में वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि फसल लगाने के लिए बीज हमेशा मान्यता प्राप्त स्रोत से ही खरीदना चाहिए और प्रजातियों का चयन क्षेत्र की जलवायु और मृदा की जांच के बाद उसके अनुसार करना चाहिए। इंजीनियर अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि धान की नर्सरी लगाने से पूर्व ट्राईकोडर्मा से मृदा उपचार करे और जीवाणु नाशक दवा स्ट्रैपटोसाइक्लीन एक ग्राम और फफूंद नाशक दवा बाविस्टिन 20 ग्राम को 10 ली पानी में मिला कर घोल बनाएं और उसमें आठ किलो बीज को 24 घंटों तक भिगोकर रखें।
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इससे बीज अच्छी तरह उपचारित हो जाता है। प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शेष नारायण सिंह ने बताया कि जनपद में सुगंधित धान में अधिकतम क्षेत्रफल में कालानमक धान का है, यदि किसानों को अधिक लाभ कमाना है तो गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बीज हो या चावल उसकी शुद्धता बनाए रखें।
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